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कभी अमेरिका भी इरान के परमाणु कार्यक्रम में था मददगार
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लॉरेंस बिश्नोई एक ऐसा नाम है जो अपराध की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है। उसके अपराधी बनने की कहानी यह बताती है कि कैसे एक साधारण छात्र अपराध की दुनिया के दलदल में फंसता जा रहा है और उसके द्वारा फैलाया गया डर अब शासन-प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। हाल ही में महाराष्ट्र के विधायक और बालीवुड में दाऊद इब्राहिंम के खास कहे जाने वाले बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद लारेंस इन दिनों खासे चर्चा में है।
कौन है लारेंस बिस्नोई जिसने दी सलमान को मारने की धमकी LawrenceBishnoi
01/10/2024
नवरात्रि पर माता के नौ रूपों को चढ़ता है नौ अलग-अलग प्रसाद
इस बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 3 अक्टूबर से हो रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार शारदीय नवरात्रि में माता रानी का वाहन पालकी होगा। मान्यता है कि नवरात्रि का प्रारंभ जब रविवार या सोमवार के दिन से होता है तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। यदि नवरात्रि, गुरुवार या शुक्रवार से शुरू हों तो माता रानी पालकी में आती हैं। वहीं, नवरात्रि की शुरुआत अगर मंगलवार या शनिवार से होती है तो मां घोड़े पर सवार होकर आती हैं। नवरात्रि अगर बुधवार से शुरू हो तो माता रानी नौका में सवार होकर आती हैं।
शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्रि आने वाला है। इस दौरान माता के नौ रूपों मां शैलपुत्री, मां ब्रह्म्चारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कुष्मांडा, मां स्कन्दमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की अलग अलग विधानों से पूजा की जाती है। इन पूजा विधानों में माता को चढ़ाए जाने वाले भोग प्रसाद का विशेष महत्व होता है। हर देवी को अलग-अलग भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह न केवल माता का आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम है बल्कि इससे जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता की प्राप्ति भी होती है। आइये आपको बताते हैं कि शारदीय नवरात्रि में इस बार किस दिन कौन सा प्रसाद अर्पित किया जाना चाहिए..
नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन माता को घी का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है
दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। उन्हें शक्कर या मिश्री का भोग अर्पित करने का विधान बताया गया है। मान्यता है कि इस भोग को अर्पित करने से जातक को लंबी आयु, धैर्य और सुखी जीवन की प्राप्ति होती है।
नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। उन्हें दूध और उससे बने प्रसाद जैसे खीर या मिठाई का भोग अर्पित करना चाहिए। यह भोग भक्तों के जीवन में सुख और शांति लाता है।
चौथे दिन माता कूष्मांडा की पूजा में उन्हें मालपुए का भोग अर्पित करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इस भोग को अर्पित करने से व्यक्ति को बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पांचवें दिन माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है। उन्हें मुख्य रूप से केले का भोग अर्पित किया जाता है। इस दिन केला अर्पित करने से घर में सुख और समृद्धि आती है। स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहता है।
छठें दिन माता कात्यायनी की पूजा की जाता है। उन्हें शहद का भोग अर्पित किया जाता है। शहद का भोग अर्पित करने से सुंदरता और आकर्षण की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में रस बना रहता है।
सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा की जाती है। उन्हें गुड़ का भोग अर्पित करना चाहिए। यह भोग देने से जीवन के सारे कष्ट दूर होते हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
नवरात्रि का आठवां दिन मां महागौरी की आराधना के लिए नियत किया गया है। भारत के कुछ हिस्सों में अष्टमी इस दिन मां को नारियल का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि महागौरी का पूजन करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं.
नवरात्रि का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री के नाम है। इस दिन व्रत कर लोग नवरात्रि के पूजन का समापन करते हैं। मान्यता है कि इस दिन मां को तिल अर्पित करने से विशेष फल मिलता है। नवमी पर मां को घर की बनी हुई खीर और हलवा-पूड़ी का भोग लगाना चाहिए। मां सिद्धिदात्री का पूजन करने से मनुष्य के जीवन में सुख-शांति आती है.
प्रसाद में इनका है विशेष महत्व
नवरात्रि में यदि आप विशेष न कर पा रहे हों तो इन प्रसादों को मां को अर्पित करें। पूजा में इना विशेष महत्व है।
1- नारियल के लड्डू
2- मखाने की खीर
3- सूजी का हल्वा
4- मालपुआ और
5- साबूदाने की खीर
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