Shiv kumar
08/04/2026
समाज, धर्म और प्रकृति — सच कौन?समाज कहता है — ऐसे जीओ। धर्म कहता है — ऐसे सोचो। लेकिन प्रकृति कहती है — बस जैसे हो, वैसे रहो। समाज बदलता है, धर्म की व्याख्या बदलती है, पर प्रकृति का नियम नहीं बदलता। इंसान ने समाज बनाया, इंसान ने धर्म की व्याख्या की, लेकिन इंसान खुद प्रकृति की देन है। फिर ऊँचा कौन हुआ? प्रकृति — क्योंकि वही सत्य है। धर्म — अगर वह प्रकृति के साथ है। समाज — अगर वह दोनों का सम्मान करे। वरना…जो प्रकृति के खिलाफ जाएगा,वो चाहे समाज हो या धर्म — टिकेगा नहीं।सोचिए…आप किसके साथ खड़े हैं —समाज के, धर्म के, या प्रकृति के?
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