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08/06/2026
*इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश- पीड़ित को ₹25000 का मुआवजा दे UP सरकार, किसान को लूंगी में घसीटकर थाने ले गई थी पुलिस*
✨Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पुलिस के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि घरेलू मामले में पुलिस को दखल देने का अधिकार नहीं है। पुलिस अधिकारी कोई पंच-सरपंच नहीं होता है, जो लोग उनके पास सुलह के लिए आए।
*पुलिस लूंगी में एक व्यक्ति को ले गई थी थाने *
✨इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की मनमानी पर कड़ी टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को 25 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। मामला 24 घंटे की गैरकानूनी हिरासत का है। जिसमें एक शख्स को लुंगी पहने हालत में घर से घसीटकर थाने ले जाया गया था। कोर्ट ने पुलिस अधिकारी के इस कार्य को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन माना।
*याचिकाकर्ता ने क्या कहा था?*
✨याचिकाकर्ता ने अपने शिकायती पत्र में बताया था कि वह अपने कृषि योग्य भूमि के देखभाल के लिए हंडिया थाना क्षेत्र स्थित अपने गांव गया था। 26 नवंबर 2022 को पुलिस अधिकारी उसे लूंगी और कुर्ता पहने हुए बाहर घसीट कर ले गए। पहले पुलिस चौकी ले जाया गया फिर हंडिया थाना ले गए। 24 घंटे हिरासत में रखा।
✨उनके एक रिश्तेदार ने घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई थी। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने छोड़ने के लिए 20 हजार की डिमांड की। इस संबंध में उनके पुत्र ने मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और प्रयागराज पुलिस आयुक्त को भी पत्र भेजा था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
*अदालत ने पुलिस पर बड़ी टिप्पणी की*
✨हाईकोर्ट की डबल बेंच जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार ने ये आदेश पारित किया। 29 मई को सुनवाई के बाद अपने आदेश में अदालत ने कहा कि पुलिस ने राज्य सरकार से मिले अधिकार की आड़ में गैरकानूनी रूप से व्यक्ति को आजादी से वंचित किया है। इसलिए याचिकाकर्ता मुआवजे का भी अधिकारी है।
✨अदालत में पुलिस ने याचिकाकर्ता की तरफ से लगाए गए आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज या खंडन नहीं किया। जिसे अदालत में पुलिस की तरफ से आरोपी को स्वीकार करना माना। हाई कोर्ट के इस आदेश का दूरगामी प्रभाव देखने को मिलेगा। पुलिस की मनमानी भी रुकेगी।
✨न्यूज़ अड्डा यूपी “ब्रेकिंग न्यूज़” इलाहाबाद
08/06/2026
*Varanasi News: ‘3 फीट की दीवार में छात्र रहते हैं, 9 फीट में कैदी’, BHU के बिरला हॉस्टल की बॉउंड्री उंची करने के विरोध में उतरे छात्र*
✨BHU News: पंडित मदन मोहन मालवीय की बगिया काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) एक बार फिर चर्चा में है। इस बार चर्चा विश्वविद्यालय कैंपस में स्थित बिरला छात्रावास को लेकर है। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन धरोहर के साथ खिलवाड़ कर रहा है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि 3 फीट के छात्रावास की बाउंड्री को तोड़कर विश्वविद्यालय प्रशासन 9 फीट की करने जा रहा है, जिसके बाद छात्रों ने विरोध स्वरूप कुलपति को ज्ञापन सौंपा है।
*केंद्रीय कार्यालय के पास छात्रों का प्रदर्शन*
✨वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय के पास एकत्रित हुए बिरला छात्रावास के छात्र और छात्र नेताओं ने कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपा है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय छात्रावास की बाउंड्री को तोड़कर और ऊंचा कर रहा है, जिससे छात्रावास का भव्य स्वरूप खतरे में आ जाएगा। छात्रों ने बताया कि बिरला छात्रावास विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा, ऐतिहासिक विरासत और विशिष्ट स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण प्रतीक है। छात्रों ने बताया कि यह छात्रावास केवल एक आवासीय परिसर ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान का अभिन्न अंग भी है, इसके साथ खिलवाड़ ना किया जाए।
✨बिरला छात्रावास में रहने वाले छात्र ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन जानबूझकर ऐतिहासिक धरोहरों को तोड़ने में लगा हुआ है। इससे पहले रुईया छात्रावास को भी तोड़कर ऊंचा किया गया, जिसके बाद उस छात्रावास की सुंदरता समाप्त हो गई। छात्र ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन जानबूझकर छात्रों को जेल की चार दिवारी के अंदर कैद करना चाहता है। छात्रों का कहना है कि 3 फीट की दीवार में शिक्षार्थी रहते हैं। अब छात्रों को 9 फीट ऊंची दीवार में में कैदियों की तरह रखने की तैयारी की जा रही है।
*धरोहरों को संरक्षित रखना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी*
✨छात्रों ने कुलपति को दिए ज्ञापन में कहा है कि वर्तमान में बिरला छात्रावास परिसर में चल रहे निर्माण कार्य और संरचनात्मक बदलावों के कारण इसकी मूल वास्तु कला और ऐतिहासिक स्वरूप पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। छात्रावास की विशिष्ट पहचान उसके विस्तृत खुले परिसर, पारंपरिक स्थापत्य शैली में ही निहित रही है, जिसे संरक्षित रखना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी भी है। इन्हीं बातों को लेकर छात्र सेंट्रल ऑफिस के पास एकत्रित हुए और कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपा है। वही इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन है अपना स्पष्टीकरण नहीं जारी किया है।
✨न्यूज़ अड्डा यूपी “ब्रेकिंग न्यूज़” वाराणसी
08/06/2026
*वाराणसी: गंगा में मछुआरों को मिला 200 किलो वजनी 2500 साल पुराना मौर्य कालीन शिवलिंग*
✨Varanasi news: वाराणसी की गंगा नदी में मछुआरों को मछली पकड़ने का दौरान, एक दुर्लभ शिवलिंग मिला है। दावा किया जा रहा है कि यह शिवलिंग करीब 2500 साल पुराना है और इसका इतिहास मौर्य कालीन सभ्यता से जुड़ा हुआ है। मछुआरों के जाल में फंसने के बाद शिवलिंग को गंगा नदी से बाहर निकाल कर घाट के ही पास स्थित गंगा मंदिर में स्थापित किया गया है।पुरातत्व विभाग को भी पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है।
*मछुआरों को मिला शिवलिंग*
✨वाराणसी के सुजाबाद-डोमरी इलाके में गंगा नदी में मछुआरों को मछली पकड़ने के दौरान एक दुर्लभ शिवलिंग मिला है। इसके बाद मछुआरों ने घाट किनारे ही स्थित गंगा मंदिर में इसे स्थापित कर दिया। मंदिर के पुजारी लाल बाबू ने विधिवत पूजा अर्चन कर शिवलिंग को स्थापित किया है। बताया जा रहा है कि यह शिवलिंग 2500 साल पुराना है। वहीं, मामले की जानकारी होने के बाद पुरातत्व विभाग भी मौके पर पहुंच गया है और शिवलिंग की जांच में जुटा हुआ है।
✨मछुआरों ने बताया कि प्रतिदिन वे मछली पकड़ने के लिए गंगा नदी में जाल डालते हैं, लेकिन रविवार को जाल डालने के बाद जाल अत्यधिक भारी हो गया। मछुआरों ने बताया कि इस दौरान करीब डेढ़ दर्जन लोगों को जाल खींचने के लिए बुलाना पड़ा और करीब 1 घंटे की मशक्कत के बाद जाल को पानी से बाहर निकाला गया।
✨मछुआरों ने बताया कि इस दौरान उन्हें जाल में फंसा हुआ एक शिवलिंग मिला, जिसका वजन करीब 2 क्विंटल के आसपास है। इसके बाद विधिवत उसकी पूजा अर्चना की गई। वहीं, स्थानीय लोगों को शिवलिंग मिलने की जानकारी होने के बाद मौके पर पूजा पाठ करने के लिए लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई।
*पुरातत्व विभाग ने क्या कहा?*
✨विशेषज्ञों की मानें तो यह शिवलिंग मौर्यकालीन इतिहास से जुड़ा हुआ है। वहीं, जिस पत्थर से शिवलिंग का निर्माण हुआ है, वह नेपाल के इलाकों में पाया जाता है, जिसका रंग काला होता है। वहीं, शिवलिंग को मंदिर में स्थापित किए जाने के बाद मंदिर के पुजारी ने पुरातत्व विभाग को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद सोमवार को पुरातत्व विभाग की टीम मंदिर परिसर पहुंची और गंगा नदी से बरामद किए गए शिवलिंग की जांच में जुटी हुई है। फिलहाल, पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की मानें तो शिवलिंग काफी पुराना है। हालांकि, इसके बारे में पूरी जानकारी जांच होने के बाद ही पता चल पाएगी।
✨न्यूज़ अड्डा यूपी “ब्रेकिंग न्यूज़” वाराणसी
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