Lord Shri Rama
08/05/2026
🚩श्री सीतारामाभ्यां नमः 🚩
🌺 श्रीराम और हनुमानजी — भक्ति और प्रेम का अद्वितीय मिलन 🌺
जब भक्त और भगवान के प्रेम की बात होती है, तब सबसे पहले स्मरण होता है प्रभु श्रीराम और भक्तशिरोमणि हनुमानजी का।
यह केवल स्वामी और सेवक का संबंध नहीं था, यह आत्मा और परमात्मा का दिव्य मिलन था।
वाल्मीकि रामायण में वर्णन आता है कि जब हनुमानजी पहली बार ब्राह्मण रूप में श्रीराम से मिले, तब प्रभु उनकी वाणी, ज्ञान और विनम्रता से अत्यंत प्रसन्न हुए। श्रीराम ने लक्ष्मणजी से कहा—
> “नानृग्वेदविनीतस्य नायजुर्वेदधारिणः।
नासामवेदविदुषः शक्यमेवं विभाषितुम्॥”
अर्थात — जिसने वेदों का गहन अध्ययन न किया हो, वह इतनी मधुर और प्रभावशाली वाणी नहीं बोल सकता।
श्रीरामचरितमानस में तुलसीदासजी लिखते हैं—
> प्रभु पहिचानि परेउ गहि चरना।
सो सुख उमा जाइ नहि बरना॥
जैसे ही हनुमानजी ने प्रभु को पहचाना, वे उनके चरणों में गिर पड़े। उस मिलन का आनंद शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता।
हनुमानजी की भक्ति निष्काम थी। उन्हें न स्वर्ग चाहिए था, न मोक्ष — केवल श्रीराम की सेवा।
इसीलिए वे कहते हैं—
> राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहाँ विश्राम॥
अध्यात्म रामायण में हनुमानजी का अद्भुत भाव मिलता है—
> देहदृष्ट्या तु दासोऽहं, जीवदृष्ट्या त्वदंशकः।
आत्मदृष्ट्या त्वमेवाहम्॥
अर्थात — देह से मैं आपका दास हूँ, जीवभाव से आपका अंश हूँ, और आत्मा की दृष्टि से आप और मैं एक ही हैं।
श्रीराम और हनुमानजी का यह संबंध हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति वही है, जिसमें अहंकार नहीं, केवल समर्पण हो।
जहाँ “राम” हैं वहाँ प्रेम है, और जहाँ “हनुमान” हैं वहाँ अटूट सेवा और विश्वास।
🚩 जय श्रीराम
🚩 जय हनुमान
श्रीमद् भागवत गीता का पूर्ण ज्ञान सरल की सरल भाषा में 🕉️🔥🚩🙏 #भगवद्गीता
05/05/2026
🚩 श्रीमते नारायणाय नमः 🚩
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम् ॥
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वे केवल धन की देवी नहीं हैं, वे समस्त चराचर जगत की स्वामिनी (ईश्वरी) हैं। लक्ष्मी तंत्र में वर्णन आता है कि माता ही 'कुशल कारण' हैं—यानी वह बुद्धिमत्ता जो हर कार्य को पूर्णता तक पहुँचाती है।
माता लक्ष्मी की शरण में जाने का अर्थ है—अपनी बुद्धि, वाणी और कर्मों में दिव्यता लाना। जहाँ सत्य और पुरुषार्थ है, वहाँ लक्ष्मी का स्थायी निवास है। 🌿 धन्य है वह हृदय जहाँ युगल सरकार (लक्ष्मी-नारायण) एक साथ विराजते हैं। 🕉️
#श्रीसूक्त #महामन्त्र #माता_लक्ष्मी #अध्यात्म #साधना
02/05/2026
🌼 श्री सीतारामाभ्यां नमः 🌼
हर एक जिज्ञासु आत्मा को वेदों के अंगों का ज्ञान अवश्य होना चाहिए। ये ही वेदाध्ययन की नींव हैं—
शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष।
📖 ये छह वेदांग हमें न केवल शास्त्रों को समझने की क्षमता देते हैं, बल्कि जीवन को भी अनुशासित और प्रकाशमय बनाते हैं।
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