GyanVerchos
05/07/2024
*स्वामी रामतीर्थ ने कहा था "मनुष्य के जैसे विचार होते हैं वैसा ही उसका जीवन बनता है।" स्वामी विवेकानन्द ने कहा था “स्वर्ग और नर्क कहीं अन्यत्र नहीं इनका निवास हमारे विचारों में ही है।" मनुष्य जैसे विचार करता है उनकी सूक्ष्म तरंगें विश्वाकाश में फैल जाती हैं। विचारों में बड़ा जादू है। वे हमें उठा सकते हैं और गिरा भी देते हैं। आवश्यकता इस बात की है हमें आशावादी, उदार, दिव्य, पुरोगामी, उत्कृष्ट विचारों से अपने मन को सराबोर रखना चाहिए। हीन और वुरे विचारों से छुटकारा पाने के लिए उच्च दिव्य विचारों का अभ्यास करना आवश्यक है । बुरे विचारों को सद्विचारों से काटना चाहिए।*
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