Rajesh singh mahar
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“In life, it's not where you go, it's who you travel with.”
16/08/2022
. 🍞🧀 #आधा_किलो_मक्खन🍞🧀
एक बार एक #किसान था। वो रोज एक #बनिए को आधा किलो मक्खन बेचता था।
एक दिन बनिया अपने घर गया और सोचा की इस मक्खन को तोलता हूँ, ताकि पता चल जाये की मुझे सही मात्रा में मक्खन मिल रहा हैं या नहीं। उससे वजन किया तो पता चला की मक्खन आधा किलो से कम था।
इस पर बनिए को गुस्सा आ गया और वो उस किसान को कोर्ट में ले गया।
कोर्ट में जज ने किसान से पूछा, “वह मक्खन को तोलने के लिए क्या इस्तेमाल करता हैं।”
किसान ने जवाब दिया, ” हुजूर, मैं अनपढ़ हु। मेरे पास कोई आधा किलो का बाट भी नहीं हैं।”
जज ने पूछा, “तो तुम मक्खन को कैसे तोलते हो?”
किसान ने जवाब दिया, “हुजूर, में बहुत समय से रोज इस बनिए की दुकान से आधा किलो आटा खरीदता हु। और जो भी आटा लाता हु, उसके बराबर मक्खन तोलकर इस बनिए को दे देता हूँ।
अगर कोई दोषी हैं तो वो बनिया खुद है, जो मुझे रोज कम आटा तोल कर देता है.....
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22/07/2022
"दर्शन" (दर्शन और देखने में अंतर) :
एक दिन मित्र ने कहा : “चलो मंदिर चलते हैं?”
मैं : “किसलिए?”
मित्र बोला : “दर्शन के लिए!”
मैं : “क्यों ! कल ठीक से दर्शन नहीं किया था क्या?”
मित्र : “तू भी क्या इन्सान है! दिन भर एक जगह बैठा रहता है। पर थोड़ी देर भगवान के दर्शन करने के लिए नहीं जा सकता।”
मैंने कहा : "महाशय! चलने में मुझे कोई समस्या नहीं है। किन्तु आप यह मत कहिये कि दर्शन करने चलेगा क्या? यह कहिये कि देखने चलेगा क्या?
मित्र बोला : “किन्तु दोनों का मतलब तो एक ही होता है।”
मैं : नहीं! दोनों में जमीन आसमान का अंतर है।
मित्र : “कैसे?”
कैसे? यही प्रश्न । अक्सर मैंने देखा है लोग तीर्थ यात्रा पर जाते है किसलिए? भव्य मंदिर और मूर्तियों को देखने के लिए, ना कि दर्शन के लिए।
अब आप सोच रहे होंगे की देखने और दर्शन करने में क्या अंतर है?
देखने का मतलब है, सामान्य देखना जो हम दिनभर कुछ ना कुछ देखते रहते हैं। किन्तु दर्शन का अर्थ होता है – जो हम देख रहे है 'उसके पीछे छुपे तथ्य और सत्य को जानना'।
देखने से मनोरंजन हो सकता है, परिवर्तन नहीं। किन्तु दर्शन से मनोरंजन हो ना हो लेकिन परिवर्तन अवश्यम्भावी है।
अधिकांश लोग मंदिरों में केवल देखने तक ही सीमित रहते हैं, दर्शन को नहीं समझ पाते। फलतः उन्हें वह लाभ नहीं मिल पाता जिसका महात्म्य ग्रंथों में मिलता है।
शास्त्रों में तीर्थयात्रा के बहुत से लाभ बताये गये हैं किन्तु लोग तीर्थ यात्रा का मतलब केवल जगह – जगह भ्रमण करना और मंदिर और मूर्तियों को देखना ही समझते हैं। यह मनोरंजन है दर्शन नहीं।
दर्शन क्या है?
दर्शन वह है जो आपके जीवन को बदलने की प्रेरणा दे।
दर्शन वह है जो आपके जीवन का कायाकल्प कर दे। दर्शन वह है जो आपके जीवन में आमूल – चूल परिवर्तन कर दे।
अंग्रेजी में दर्शन का मतलब होता है – फिलोसोफी, जिसका अर्थ होता है - यथार्थ की परख का दृष्टिकोण।
इसी के लिए हमारे वैदिक साहित्य में षड्दर्शन की रचना की गई। जिनमें जीवन के सभी आवश्यक और यथार्थ तत्वों की व्याख्या की गई है।
यदि आप अब भी सोच रहे हैं कि दर्शन क्या है? तो फिर जीवन के व्यावहारिक दृष्टान्तों से समझाने की कोशिश करते हैं।
रामकृष्ण परमहंस की दक्षिणेश्वर की काली को उनसे पहले और उनके बाद हजारों लोगों ने देखा किन्तु किसी को दर्शन नहीं हुआ।
क्यों? क्योंकि रामकृष्ण परमहंस ने ना केवल काली की मूर्ति को देखा बल्कि उसके दर्शन को समझा इसलिए काली ने रामकृष्ण परमहंस को दर्शन दिया।
भगवान श्री राम के मंदिर जाकर उनकी मूर्ति के दर्शन करने का मतलब है उनके जीवन चरित्र को समझा जाये और उसी के अनुसार अपने जीवन में परिवर्तन किया जाये। यही राम का दर्शन है। यदि आप राम की मूर्ति तो देखते हैं किन्तु अपने जीवन में कोई परिवर्तननही नहीं करते हैं तो फिर आपको राम के दर्शन का कोई लाभ नहीं मिलने वाला।
यदि आप शिवजी का दर्शन करने जाते हैं और आपके मन में क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष ही भरा है तो फिर दर्शन का क्या लाभ?
यदि आप हनुमानजी का दर्शन करने जाते हैं और आपका मन पवित्र नहीं है, तो फिर हनुमानजी का दर्शन करना व्यर्थ है।
"भक्त वही सच्चा, जो है अभी बच्चा।" जो बड़ा हो गया वो भक्त नहीं हो सकता और जो भक्त हो गया उसमें बड़प्पन नहीं हो सकता।
आपके लिए दर्शन का क्या अर्थ है?
सोचें, समझें l
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