Lpproduction
24/04/2025
R**E FILM REVIEW BY HARSH*TA SINGH CHARAN
यह बात बिल्कुल सही है कि बलात्कार की रोकथाम महिलाओं को अपनी सुरक्षा सिखाने से नहीं, बल्कि पुरुषों को यह सिखाने से शुरू होनी चाहिए कि किसी को हानि पहुँचाना गलत है। सुरक्षा शिक्षा का केंद्र बिंदु 'सहमति, सम्मान और ज़िम्मेदारी' होना चाहिए—न कि महिलाओं के व्यवहार को नियंत्रित करना।
यह 2025 है—आज की महिलाएं अपने परिवेश को समझती हैं, जानती हैं कि उन्हें हर कदम सोच-समझकर और विवेक के साथ रखना है। लेकिन अब वक्त आ गया है कि डर महिलाओं में नहीं, अपराधी मानसिकता रखने वालों में पैदा हो। डर—कानूनी कार्रवाई का, सामाजिक बहिष्कार का, और नैतिक शर्म का।
इसलिए ज़रूरी है कि पुरुषों को इस अभियान में शामिल किया जाए। उनसे बातचीत की जाए, सवाल पूछे जाएं, और उन्हें इस संकट की गंभीरता का अहसास कराया जाए।
उन्हें समझाना होगा कि यह सिर्फ 'महिलाओं का मुद्दा' नहीं है, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है, जिसमें हर पुरुष की भागीदारी अनिवार्य है।
एक नया संवाद शुरू करें—जहाँ पुरुष भी अपने विचार, शंकाएं और अनुभव साझा करें। उन्हें न केवल सुनें, बल्कि सही दिशा में सोचने और बदलाव लाने के लिए प्रेरित करें।
क्योंकि जब तक पुरुष बदलेंगे नहीं, तब तक समाज नहीं बदलेगा।
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24/04/2025
R**E FILM REVIEW BY SONIKA JAIN
आज मैंने जो शॉर्ट मूवी देखी — वो सिर्फ एक कहानी नहीं थी,
वो एक चीख थी, जो हमारे समाज की चुप्पी को चीरती है।
वो एक सन्नाटा था, जो हमारे भीतर तक गूंजता है।
वो दर्द था — जो किसी और का नहीं, हम सबका है।
एक महिला का बलात्कार सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं होता,
वो पूरी मानवता पर कलंक बनकर उभरता है।
इस फिल्म ने उस सच्चाई को सामने लाया है,
जिससे हम अक्सर आँखें चुराते हैं।
इस कहानी ने बताया कि दर्द केवल शारीरिक नहीं होता,
वो मानसिक होता है, सामाजिक होता है —
जो पीड़िता को जीवन भर अपने साथ ढोना पड़ता है।
लेकिन क्या हम सिर्फ दर्शक बनकर रह जाएंगे?
क्या हम बस अफसोस जताकर आगे बढ़ जाएंगे?
नहीं।
अब वक़्त है — बोलने का, खड़े होने का,
हर उस सोच के खिलाफ, जो औरत की आज़ादी को खतरा मानती है।
हर उस चुप्पी के खिलाफ, जो अपराध को पलने देती है।
हमें शिक्षा देनी होगी — सिर्फ स्कूलों में नहीं,घरों में, दिलों में, ज़हन में।
हमें यह समझाना होगा कि “ना” का मतलब “ना” होता है,
और इज़्ज़त किसी कपड़े, किसी चाल, या किसी समय की मोहताज नहीं होती।
इस मूवी ने हमें दर्पण दिखाया है —
अब ज़िम्मेदारी हमारी है कि उस दर्पण को तोड़ें नहीं,बल्कि खुद को उसमें देखकर बदलें।
एक ऐसा समाज बनाएं —
जहाँ किसी महिला को अपनी सुरक्षा के लिए डरना न पड़े,
और इंसाफ़ के लिए लड़ते-लड़ते थकना न पड़े।
हर संभव प्रयास रहेगा मेरा इस मुहिम में सम्पूर्ण देश में इसका आगाज हमारे शहर उदयपुर से व्यापक स्तर पर हो ।
आदरणीय चन्द्रगुप्त जी भाईसाहब आपका धन्यवाद समाज में व्याप्त इस तरह की बुराई को जड़ से उखाड़ने में हिस्सा बनने पर ।
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24/04/2025
*समिधा संस्थान की और से केवल महिलाओं के लिये शॉर्ट फिल्म रेप का विशिष्ट प्रदर्शन*
समिधा संस्थान की और से *लेखक तथा निर्माता-निर्देशक लोकेश पालीवाल* द्वारा निर्मित शॉर्ट फिल्म “रेप” (मात्र 15 मिनट) का विशिष्ट प्रदर्शन, भीम परमेश्वर जी मंदिर स्थित छात्रावास में किया गया
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता सुषमा कुमावत, स्वीटी छाबड़ा, अर्चना सिंह, नेहा मंत्री, दिव्या जोशी, अनीता शर्मा, दीप माला मेवाड़, नम्रता सिंह चौहान, ममता शर्मा, सपना देवड़ा, अनीता शर्मा, सीमा मालवीय सहित लगभग 30 से अधिक महिलाओं ने फिल्म का अवलोकन किया तथा विषय पर अपने विचार व्यक्त किए
इस विषय पर संस्था अध्यक्ष चंद्र गुप्त चौहान ने कहा कि इस फिल्म का मुख्य उद्देश्य समाज में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है
इस फिल्म के ज़रिए एक बड़ी और ज़रूरी बात कहने की कोशिश कर रहे हैं जो अक्सर खबरों की सुर्खियों में तो आती हैं, लेकिन हमारी संवेदना तक नहीं पहुँच पातीं। यह फिल्म न सिर्फ यौन हिंसा के मानसिक दर्द को उजागर करती है, बल्कि उन रोज़मर्रा की चुप गलतियों की ओर भी इशारा करती है, जो कई महिलाएं हर दिन बिना कुछ कहे सहती हैं।
इस अवसर पर संस्था के कार्यकर्ता प्रदीप रवानी, कुंतल जोशी, लोकेश जोशी, आकाश वाघरेचा, सहित फिल्म निर्देशक लोकेश पालीवाल एवं फिल्म की नायिका प्रिया कुमावत सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे
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