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28/04/2023

।। Buddha Amrut Vaani ।।

"अनिक्‍कसावो कासावं, यो वत्थं परिदहिस्सति।
अपेतो दमसच्‍चेन, न सो कासावमरहति॥"

जिसने राग आदि कषायों को बिना त्यागे काषाय वस्त्र धारण किया है, वह इंद्रिय दमन न किया हुआ, सत्य कथन न करने वाला वह अर्हतों की ध्वजा[ काषाय वस्त्र (चीवर)] धारण करने का अधिकारी नहीं है।

"यो च वन्तकसावस्स, सीलेसु सुसमाहितो।
उपेतो दमसच्‍चेन, स वे कासावमरहति॥"

जिसने राग आदि कषायों को निकाल फेक दिया है, जो चतुपारिशुध्दिक शीलों में प्रतिष्ठित है, इंद्रिय दमन करने वाला, सत्य ही कथन करने वाला वह निसंदेह अर्हतों की ध्वजा [काषाय वस्त्र (चीवर)] धारण करने का अधिकारी है।

(धम्मपद गाथा 9, 10 - ये गाथाएं तथागत ने देवदत्त को उद्देश्य कर कही है।)

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