Tree Foundation
05/06/2026
द्रोणपुष्पी, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में ‘गुमा’ के नाम से भी जाना जाता है, आयुर्वेद में एक अत्यंत गुणकारी औषधीय पौधा माना जाता है। यह प्राचीन काल से पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसके पत्ते, फूल और जड़—तीनों ही औषधीय दृष्टि से उपयोगी हैं। इस औषधि का उल्लेख ‘भावप्रकाश निघण्टु’ सहित अन्य आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है, जहाँ इसके गुण, रस, प्रभाव और औषधीय उपयोगों का विस्तृत वर्णन उपलब्ध है।
✅️ द्रोणपुष्पी के प्रमुख औषधीय उपयोग जानिए —
1️⃣ सर्दी-खांसी और बुखार :-
द्रोणपुष्पी के पत्तों का काढ़ा पारंपरिक रूप से जुकाम, खांसी और हल्के बुखार में दिया जाता है। इसके ज्वरनाशक और सूजनरोधी गुण शरीर के तापमान और गले की सूजन कम करने में सहायक हो सकते हैं।
2️⃣ श्वसन संबंधी समस्याएँ :-
इसमें मौजूद बायोएक्टिव तत्व श्वसन तंत्र की सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं। लोकचिकित्सा में इसे बलगम निकालने के रूप में भी उपयोग किया जाता है।
3️⃣ त्वचा रोगों में लाभकारी :-
इसके एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण त्वचा संक्रमण में सहायक माने जाते हैं। इसके पत्तों का लेप फोड़े-फुंसी, खुजली या हल्की सूजन पर लगाया जाता है।
4️⃣ पीलिया में उपयोगी :-
इसके पत्तों का रस लिवर की सफाई करता है और पीलिया के इलाज में पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है।
5️⃣ जोड़ों का दर्द और सूजन :-
सूजनरोधी प्रभाव के कारण इसके अर्क का उपयोग दर्द और सूजन में राहत के लिए किया जाता है।
6️⃣ पाचन समस्याएँ :-
हल्के अपच, गैस या पेट दर्द में पारंपरिक रूप से इसका उपयोग किया जाता है। इसके कुछ घटक पाचन क्रिया को संतुलित करने में सहायक माने जाते हैं।
7️⃣ कीट-दंश से राहत :-
ग्रामीण क्षेत्रों में इसके पत्तों को मसलकर कीट के काटने वाली जगह पर लगाया जाता है, जिससे जलन और सूजन में राहत मिल सकती है।
✅️ सेवन का तरीका और मात्रा —
■ स्वरस :-
ताजे पत्तों को पीसकर रस निकालें, 5–10 मिली० (शहद के साथ) दिन में एक बार ले सकते है। यह खांसी, बलगम, हल्का अस्थमा, इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार है।
■ काढ़ा :-
5–10 ग्राम सूखी पत्तियाँ या पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फूल, फल) को 200–250 ml पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो छान लें। दिन में 1–2 बार, भोजन के बाद 20–30 मिली० सेवन कर सकते है। यह बुखार, सर्दी-खांसी, गले की सूजन, हल्के पाचन विकार में फायदेमंद है।
■ चूर्ण :-
छाया में सुखाए गए पंचांग का चूर्ण 1–3 ग्राम गुनगुने पानी या शहद के साथ दिन में एक बार ले सकते है। यह पाचन सुधार, हल्की सूजन, सामान्य कमजोरी में फायदेमंद है।
■ लेप :-
ताजी पत्तियों को पीसकर प्रभावित स्थान पर लगाएं। यह फोड़े-फुंसी, त्वचा संक्रमण, कीट-दंश, जोड़ों का दर्द में प्रभावी है।
✅️ सावधानी —
1) इसका स्वाद अत्यंत कड़वा और तीखा होता है, अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से यह पेट में जलन पैदा कर सकता है।
2) गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इसका सेवन बिना अनुभवी वैद्य की सलाह के नहीं करना चाहिए।
#द्रोणपुष्पी
Click here to claim your Sponsored Listing.
Contact the organization
Telephone
Website
Address
Thane , Wagle Estate
Thane