Advocate Aditi Kumar

Advocate Aditi Kumar

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17/06/2024

बिहार में #राक्षसराज चल रहा है । महिलाओं पर जुल्म और अत्याचार बढ़ता ही जा रहा है । उसके बावजूद भी चाटुकार मीडिया चूँ तक नही बोल रहा । यहां का मुख्यमंत्री अपना कुर्सी बचाने के लिए जोड़ घटाव करने में ब्यस्त है और जनता भगवान भरोसे जी रहा है ।

#शर्मनाक

23/04/2024

आप सभी को श्री हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।

श्री बजरंगबली जी से मैं आप सभी के लिए उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हूँ।

जय श्री राम 🙏🏻

22/03/2024

सम्राट चौधरी जी , आज आपने जो बेतुका बयान दिया है इसकी मैं घोर निंदा करती हूं । ये बयान आपकी कुंठित मानसिकता को दर्शाता है । आपने बिहार के समस्त माताओं बहनों का घोर अपमान किया है ।

आपको बिहार की माताओं बहनों से माफी मांगनी होगी ।

पिता पुत्री का रिश्ता क्या होता है , ये Rohini Acharya जी ने देश को समझा दिया है । रोहिणी जी के इस बलिदान से आने वाली पीढ़ी भी सबक लेगी कि मां पिता से बढ़कर दुनिया मे कुछ नहीं होता । माँ बाप ही भगवान का असली रूप होते है ।

यही हमारे देश की संस्कृति है ।

मातृ देवों भवः और पितृ देवो भवः की परिभाषा देश के सामने रोहिणी जी ने चरितार्थ कर दिया है ।

इस बेटी पर पूरा देश गौरवान्वित महसूस करता है ।

21/03/2024

युवा किसी भी देश का वर्तमान और भविष्य हैं। वो देश की नींव हैं, जिस पर देश की प्रगति और विकास निर्भर करता है। लेकिन आज भी अपने देश मे नौजवानो की ऊर्जा व्यर्थ हो रही है। हर जगह शिक्षा के लिए जरूरी आधारभूत संरचना की कमी है तो कहीं प्रछन्न बेरोजगारी जैसे हालात हैं। इन स्थितियों के बावजूद युवाओें को एक उन्नत एवं आदर्श जीवन की ओर अग्रसर करना वर्तमान की सबसे बड़ी जरूरत है।

युवा सपनों को आकार देने का अर्थ है सम्पूर्ण मानव जाति के उन्नत भविष्य का निर्माण। यह सच है कि हर दिन के साथ जीवन का एक नया लिफाफा खुलता है, नए अस्तित्व के साथ, नए अर्थ की शुरूआत के साथ, नयी जीवन दिशाओं के साथ। हर नई आंख देखती है इस संसार को अपनी ताजगी भरी नजरों से। इनमें जो सपने उगते हैं इन्हीं में नये समाज की, नयी आदमी की नींव रखी जाती है।

अपने देश का सबसे बड़ा दुश्मन महंगाई और बेरोजगारी है । जो जाति और धर्म देखकर नही आती । अपने देश मे हिन्दू मुस्लिम ,मंदिर मस्जिद , ये सब कोई मुद्दा नही है । इसमे तो सिर्फ लोगो को उलझाया जाता रहा है ।

आज युवापीढ़ी के सामने दो रास्ते हैं- एक रास्ता है निर्माण का दूसरा रास्ता है ध्वंस का। जहां तक ध्वंस का प्रश्न है, उसे सिखाने की जरूरत नहीं है। अनपढ़, अशिक्षित और अक्षम युवा भी ध्वंस कर सकता है। वास्तव में देखा जाए तो ध्वंस क्रिया नहीं, प्रतिक्रिया है। उपेक्षित, आहत, प्रताड़ित और महत्वाकांक्षी व्यक्ति खुले रूप में ध्वंस के मैदान में उतर जाता है। उसके लिए न योजना बनाने की जरूरत है और न सामग्री जुटाने की। योजनाबद्ध रूप में भी ध्वंस किया जाता है, पर वह ध्वंस के लिए अपरिहार्यता नहीं है।

मूल प्रश्न है कि क्या हमारे आज के नौजवान भारत को एक सक्षम देश बनाने का स्वप्न देखते हैं ? या कि हमारी वर्तमान युवा पीढ़ी केवल उपभोक्तावादी संस्कृति से जन्मी आत्मकेन्द्रित पीढ़ी है ? दोनों में से सच क्या है ? दरअसल हमारी युवा पीढ़ी महज स्वप्नजीवी पीढ़ी नहीं है, वह रोज यथार्थ से जूझती है, उसके सामने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगी होती जाती शिक्षा, कैरियर की चुनौती और उनकी नैसर्गिक प्रतिभा को कुचलने की राजनीति विसंगतियां जैसी तमाम विषमताओं और अवरोधों की ढेरों समस्याएं भी हैं। उनके पास कोरे स्वप्न ही नहीं, बल्कि आंखों में किरकिराता सच भी है। इन जटिल स्थितियों से लोहा लेने की ताकत युवा में ही हैं। क्योंकि युवा शब्द क्रांति का प्रतीक है। इसीलिये युवापीढ़ी पर यह दायित्व है कि हम सब युवा ऐसी क्रांति करे, जिससे नौजवानों के जीवनशैली में रचनात्मक परिवर्तन आ सके, हिंसा-आतंक की राह को छोड़कर वे निर्माण की नयी पगडंडियों पर अग्रसर हो सके ।

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