Manoj mishra
02/05/2026
#उन्नत_टूलकिट_वितरण_कार्यक्रम : NGOs/FPOs/NPOs आदि के लिए बेशुमार अवसर...
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हमारे गांवों-कस्बों में ऐसे शिल्पकार/कारीगर होते हैं जो लकड़ी, मिट्टी, धातु, पत्थर, रेशे, घास व कपड़े आदि को अपनी कला से जीवंत कर देते हैं. मगर हस्तशिल्प उत्पादों को तैयार करने के दौरान पारंपरिक औजारों/तकनीक के इस्तेमाल से शिल्पकारों/कारीगरों को अत्यधिक शारीरिक थकान होती है, सामानों की बर्बादी अधिक होती है, लागत ज्यादा हो जाती है, उत्पादकता सिमित होती है व उत्पादों की फिनिशिंग भी विश्व-स्तरीय नहीं हो पाती है. यहीं कारण है कि तेजी से बदलती इस डिजिटल दुनिया में केवल पुराने औजारों व पारंपरिक तकनीक के दम पर तैयार हस्तशिल्प उत्पादों को देशी-विदेशी बाजारों में टिके रहना मुश्किल होते जा रहा है. फलतः आय-अर्जन कम होने से नई पीढ़ी हस्तशिल्प उद्यम की ओर अपेक्षा के अनुरूप आकर्षित नहीं हो पा रही है. लिहाजा; हाल के वर्षों में गौरवशाली भारतीय हस्तशिल्पों का संरक्षण व संवर्द्धन एक अहम् चुनौती के रूप में उभर कर आया है.
जाहिर है वर्तमान समय में भारतीय शिल्पकारों/कारीगरों के कौशल को आधुनिक बाजार के जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए उन्हें अत्याधुनिक तकनीक व टूलकिट (औजारों) से जोड़कर उनकी कार्यक्षमता में अपेक्षित वृद्धि करना बेहद जरुरी हो चला है. अत्याधुनिक औजारों (टूलकिट)/ तकनीक के इस्तेमाल से न केवल समय, श्रम व लागत में कमी आती है अपितु श्रम दक्षता, फिनिशिंग, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता व मुनाफा में आशातीत इजाफा संभव हो पाता है. बहरहाल विविध प्रकार के हस्तशिल्पों को आकर्षक, इनोवेटिव, टिकाऊ, किफायती व बाजार मांग के अनुरूप अपेक्षाकृत कम लागत में तेजी से तैयार करने हेतु शिल्पकारों/ कारीगरों को उन्नत औजार (टूलकिट)/ तकनीक उपलब्ध कराना और उन्हें सतत् एवं सम्मानजनक आय-अर्जन के काबिल बनाना वक्त का तकाजा है. कहना न होगा कि हस्तशिल्प की दुनिया में उन्नत टूलकिट व कुशल हस्त एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं.
उक्त के आलोक में भारत सरकार के #वस्त्र_मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत कार्यालय विकास आयुक्त ( #हस्तशिल्प) द्वारा एक महत्वाकांक्षी उप - योजना संचालित की जा रही है. जिसका नाम है “हस्तशिल्प क्षेत्र में कौशल विकास”. उल्लिखित उप-योजना का प्रमुख घटक है – ‘उन्नत टूलकिट वितरण कार्यक्रम’ ( आईटीडीपी ).
आज के ब्लॉग में “ #हस्तशिल्प_क्षेत्र_में_कौशल_विकास” के तहत् संचालित ‘उन्नत टूलकिट वितरण कार्यक्रम’ ( #आईटीडीपी ) के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है. इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन के द्वारा एनजीओ, ट्रस्ट, एनपीओ और एफपीओ आदि न केवल आकर्षक अनुदान सहायता प्राप्त कर सुदृढ़ व सबल बन सकते हैं अपितु बड़े पैमाने पर कुशल हस्तशिल्पकारों/कारीगरों को उद्यमी ( Entrepreneur ) बनाने में अहम् योगदान कर सकते हैं. इतना ही नहीं ‘उन्नत टूलकिट वितरण कार्यक्रम’ ( आईटीडीपी ) के कार्यान्वयन के बदौलत न केवल किफायती, उन्नत व आकर्षक हस्तशिल्प उत्पाद तैयार किये जा सकेगें बल्कि भारतीय हस्तशिल्प उत्पाद वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से परचम भी लहरा सकेगें. इसके आलावा विविध प्रकार के शिल्पकलाओं को सम्मानजनक बारहमासी आय-अर्जन के साधन के रूप में प्रतिष्ठापित किया जा सकेगा. अब यहाँ यह बताने की जरुरत नहीं कि उल्लिखित कार्यक्रम के क्रियान्वयन के बदौलत गौरवशाली भारतीय हस्तशिल्पों का संरक्षण व संवर्द्धन भी हो सकेगा.
#योजना_का_स्वरूप : ‘उन्नत टूलकिट वितरण कार्यक्रम’ ( आईटीडीपी ) केवल एक सरकारी योजना ही नहीं है अपितु भारत की विरासत को संजोये लाखों हाथों को अत्यधिक कौशल युक्त बनाने का एक अहम् अभियान भी है. उल्लिखित कार्यक्रम के तहत् पंजीकृत शिल्पकारों को उनके कौशल के आधार पर चिन्हित कर उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देकर उन्हें निशुल्क टूलकिट (औजार) वितरित किये जाते हैं. मसलन; काष्ठशिल्प ( Woodwork) से जुड़े शिल्पकारों के बीच इलेक्ट्रिक सैंडर, पावर ड्रिल व नक्काशी मशीन इत्यादि. हस्त बुनाई ( Handloom ) से जुड़े शिल्पियों/कारीगरों के बीच उन्नत चरखे व आधुनिक करघे आदि. धातु शिल्प ( Metal Craft) से जुड़े शिल्पियों/कारीगरों के बीच गैस वेल्डिंग व पॉलिशिंग मशीन आदि उपकरण. “वोकल फॉर लोकल”, “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” तथा “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को अपेक्षित गति देने वाला यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम पुरे भारतवर्ष में लागु है. फ़िलहाल जरुरत है इस कार्यक्रम को पुरे शिद्धत से धरातल पर कार्यान्वित करने की.
विविध प्रकार के हस्तशिल्प गतिविधियों जुड़े पंजीकृत शिल्पकारों/कारीगरों को कौशलयुक्त बनाने व उन्हें उन्नत टूलकिट वितरण कार्य में रूचि रखने वाले गैर लाभकारी संगठनों/ विभागों/ निकायों के लिए इस कार्यक्रम में व्यापक अवसर है. उक्त कार्यक्रम के कार्यान्वयन हेतु उल्लिखित संस्थान/संगठन विभिन्न प्रकार के शिल्पकलाओं के संरक्षण व संवर्द्धन की दिशा में अपेक्षित कदमताल कर सकते हैं. मसलन; कुम्भ्कारी व मिट्टी की वस्तुएं, आभूषण, कठपुतली, कांच के मोती, गुड़िया व खिलौने, शीतल पट्टी, सांझी कला, पेपर मशी, तुली एवं सिरका, इमिटेशन आभूषण, स्क्रू पाइन, चित्रकारी, माला बद्धी, मिथिला चित्रकारी, लाख की चूड़ियाँ, पतंग निर्माण, कौना, जूट शिल्प, अगरबत्तियां, मोती शिल्प, घास, पती, सरकंडा, रेशा, मोमबत्ती, वस्त्र चित्रकारी, लोक चित्रकला, सूखे पुष्प, क्रुल, शंख शैल, कॉयर ट्विस्टिंग, कठपुतली, धान-पुआल कार्य, वाद्य यंत्र, लेस, सिंग व हड्डी, बेन व बांस, जरी व जरी की वस्तुएं, दीवार लटकन, बंधेज (टाई व डाई), थेवा, वस्त्र (हथकरघा), वस्त्र (हस्त कशीदाकारी), टेराकोटा, तंजौर चित्रकारी, सुजीनी, रोगन कला, चमड़ा (जूते), चमड़ा (अन्य सामग्री), हस्त ठप्पा, छपाई वस्त्र, एप्लिक, चीनी मिट्टी के कार्य,कशिदाकृत व क्रोशिये से बनी वस्तुएं, कांच, ट्विस्टिंग कार्य, काष्ठ (नक्काशी), काष्ठ (घुमावदार एवं लेकर वेयर ), लकड़ी के पात्र, फर्नीचर, कालीन एवं दरियां, धातु चित्र ( शास्त्रीय ), धातु चित्र (लोक कला), कालीन एवं अन्य फर्श बिछावन, कला धातु के बर्तन, बिदरी, फिलिग्री एवं सिल्वर के पात्र, सोने का काम, पोली स्टोन, मीनाकारी, आर्टवेयर के रूप में शॉल, पत्थर (नक्काशी),स्टोन व प्लास्टिक इनले इत्यादि विविध प्रकार के हस्तशिल्प. इन सांकेतिक हस्तशिल्पों के आलावा भारतीय सभ्यता व संस्कृति से जुड़े कई स्थानीय हस्तशिल्प भी शामिल हैं.
स्मरण रहे की ये हस्तशिल्प भारत की आत्मा है. ‘उन्नत टूलकिट वितरण कार्यक्रम’ ( आईटीडीपी ) उस आत्मा में नई उर्जा का संचार कर रहा है. जब तकनीक व परंपरा का संगम होता है तब चमत्कार होता है. आज हमारा शिल्पकार/कारीगर केवल भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए श्रेष्ठ शिल्प उत्पाद बनाने को तैयार है. ..अब बस जरुरत है इन हुनरमंद हाथों को उन्नत टूलकिट उपलब्ध कराने की.
#पात्रता : उल्लिखित हस्तशिल्पों के संरक्षण, संवर्द्धन व समग्र उन्नयन के साथ-साथ शिल्पकारों/कारीगरों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उन्नत टूलकिट उपलब्ध कराने एवं बारहमासी आय-अर्जन सुनिश्चित करने हेतु ‘उन्नत टूलकिट वितरण कार्यक्रम’ ( आईटीडीपी ) से सम्बंधित उपयुक्त परियोजना प्रस्ताव विभिन्न प्रकार के सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थान/ विभाग/ निकाय सब्मिट कर सकते हैं. इन संस्थानों में एनजीओ, ट्रस्ट, एनपीओ, एफपीओ, उत्पादक कंपनी, किसी विशिष्ट कानून के तहत् पंजीकृत स्वायत संगठन, विशिष्ट क़ानूनी इकाई वाले कोई संस्थान, शैक्षणिक व अन्य संस्थान, शहरी व ग्रामीण स्थानीय स्व-शासकीय संस्थान, निर्यात संवर्द्धन परिषद्, राज्य व केन्द्रीय सरकारी एजेंसियां व सार्वजानिक निकाय आदि शामिल हैं.
#परियोजना_प्रस्ताव : ‘उन्नत टूलकिट वितरण कार्यक्रम’ ( आईटीडीपी ) के संचालन हेतु कार्यालय हस्तशिल्प आयुक्त (हस्तशिल्प) द्वारा पात्र संगठनों से परियोजना प्रस्ताव आमंत्रित किये जाते है. विस्तृत जानकारी के लिए विभागीय वेबसाइट https://handicrafts.nic.in का अवलोकन किया जा सकता है. परियोजना प्रस्ताव MIS पोर्टल पर ऑनलाइन अप्लाई किये जाते हैं. इसके पूर्व इच्छुक व पात्र संगठनों/ संस्थानों /विभागों को पहले वस्त्र मंत्रालय ( हस्त शिल्प ) में सूचीबद्ध (Empanelment) होना अनिवार्य है.
#अनुदान_सहायता : ‘उन्नत टूलकिट वितरण कार्यक्रम’ ( आईटीडीपी ) के संचालन हेतु चयनित संगठनों/ संस्थानों /विभागों को 100 फीसदी अनुदान सहायता प्रदान की जाती है.
#कैसे_करें_शुरुआत : सर्वप्रथम इच्छुक व पात्र संगठनों/ संस्थानों/ विभागों को वस्त्र मंत्रालय के अधीन कार्यरत विकास आयुक्त कार्यालय (हस्तशिल्प) में अपने को सूचीबद्ध कर लेना अनिवार्य है. साथ ही अपेक्षित डॉक्यूमेंट्स की तैयारी भी कर लेना जरुरी है. तदोपरांत मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप अपेक्षित परियोजना प्रस्ताव अपने क्षेत्र के लिए सूचीबद्ध/उपयुक्त हस्तशिल्प Key Activities में प्रशिक्षण व उन्नत टूलकिट वितरण हेतु सब्मिट करें. सम्यक मार्गदर्शन, सूचना व त्रुटिरहित प्रोजेक्ट सबमिशन के लिए किसी सुयोग्य कंसल्टेंट का मदद लेना श्रेयस्कर रहेगा. इच्छुक संगठन/संस्थान/विभाग इस क्षेत्र में वर्षों से कार्यरत ख्यातिलब्ध कंसल्टेंसी संस्थान AINFC (All India NGOs + FPOs Consultancy) से अपेक्षित मार्गदर्शन, विभागीय सम्बंद्धन तथा प्रोजेक्ट की तैयारी व सब्मिशन आदि की गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं.
#चलते_चलते : और हाँ ! इच्छुक व पात्र संगठनों/ संस्थानों /विभागों को वस्त्र मंत्रालय ( हस्त शिल्प ) में सूचीबद्ध ( ) कराने या अपेक्षित मार्गदर्शन या उपयुक्त परियोजना प्रस्ताव तैयार कराने अथवा एफपीओ/ ओएफपीओ/ एनजीओ/ एनपीओ/ ट्रस्टों/ क्लस्टरों के पंजीकरण कराने या विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के लिये लाभकारी प्रोजेक्ट्स तैयार कराने अथवा एफपीओ के सीईओ व निदेशकों के गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण अथवा विविध संस्थानों के सुदृढ़ीकरण व समग्र उन्नयन हेतु हमारे ख्यातिलब्ध संस्थान का सहयोग लिया जा सकता है. हमारा संपर्क - सूत्र है :
All India NGOs + FPOs Consultancy
: 7004975926 :: : [email protected]
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