Rankubeshy BSP
24/03/2026
कुछ लोग सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए महापुरुषों और सम्मानित नेताओं पर अनर्गल टिप्पणी करते हैं। हाल ही में द्वारा बहुजन समाज की महान नेता जी के सम्मान में बने स्थलों पर की गई टिप्पणी न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि उनकी संकीर्ण सोच को भी दर्शाती है।
को शायद यह समझ नहीं है कि ये स्थल केवल “पत्थर” नहीं हैं, बल्कि संघर्ष, स्वाभिमान और सामाजिक न्याय के प्रतीक हैं। ये प्रेरणा स्थल उन करोड़ों बहुजनों की भावनाओं का केंद्र हैं, जिन्होंने सदियों के अन्याय के बाद सम्मान पाना शुरू किया।
कोई साधारण राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक मिशन है — समाज के दबे-कुचले वर्गों को उनका हक दिलाने का मिशन। ऐसे में इस मिशन और इसके प्रतीकों का अपमान करना बेहद निंदनीय है।
पत्रकारिता एक जिम्मेदारी है, लेकिन जब कोई व्यक्ति अपने निजी स्वार्थ और चमचागिरी में सच्चाई से भटक जाता है, तो उसकी विश्वसनीयता अपने आप खत्म हो जाती है। पहले भी गलत खबरों के कारण सवालों में घिरे लोगों को दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
हम बहुजन समाज के लोग अपने मार्ग और अपने महापुरुषों के सम्मान को लेकर पूरी तरह जागरूक हैं। हमें किसी के भटकाने की आवश्यकता नहीं है।
#लखनऊचलो
✍️ अंकेश कुमार
28/02/2026
आज मैं आप सभी के सामने भारत के विकास से जुड़ी उस सच्चाई को रखने आया हूँ, जिसे हम जानते तो हैं, लेकिन मानने से कतराते हैं।
भारत के विकास में सबसे बड़ी बाधा कोई विदेशी ताकत नहीं, बल्कि हमारी अपनी बनाई हुई व्यवस्था — जातिवाद है।
साथियो,
जब दुनिया विज्ञान, तकनीक और शिक्षा में आगे बढ़ रही थी, तब हमारा समाज यह तय करने में लगा रहा कि कौन ऊँच है और कौन नीच।
हमने इंसान को इंसान नहीं, जाति में बाँटकर देखा।
नतीजा यह हुआ कि प्रतिभा दब गई, मेहनत हार गई और भाईचारा टूट गया।
सोचिए,
क्या एक गरीब का दर्द उसकी जाति देखकर कम या ज़्यादा होता है?
क्या एक होनहार बच्चे की प्रतिभा उसकी जाति से तय होती है?
नहीं!
फिर भी हमने सदियों तक यही अन्याय किया।
बंधुओ और बहनो,
जातिवाद ने हमें आपस में लड़ाया,
राजनीति ने इसे हथियार बनाया,
और विकास पीछे छूटता चला गया।
जब समाज बँटा होता है,
तो देश मज़बूत नहीं बन सकता।
जब एक हाथ दूसरे हाथ को काटने लगे,
तो शरीर स्वस्थ नहीं रह सकता।
आज ज़रूरत है कि हम
जाति नहीं, इंसान देखें।
नाम नहीं, काम देखें।
जन्म नहीं, योग्यता देखें।
साथियो,
जातिवाद से निजात केवल कानून से नहीं आएगी,
यह सोच बदलने से आएगी।
यह तब आएगी जब हम अपने बच्चों को यह सिखाएँगे कि
सभी इंसान बराबर हैं।
भाईचारा कोई कमज़ोरी नहीं,
भाईचारा ही सबसे बड़ी ताकत है।
जिस दिन हम एक-दूसरे का हाथ थाम लेंगे,
उस दिन भारत को कोई रोक नहीं पाएगा।
आइए, आज संकल्प लें—
न हम भेदभाव करेंगे,
न भेदभाव सहेंगे।
न जाति के नाम पर नफ़रत फैलाएँगे,
न फैलने देंगे।
एक भारत, श्रेष्ठ भारत
का सपना तभी साकार होगा
जब हर भारतवासी कहेगा—
मेरी पहचान मेरी जाति नहीं, मेरा देश है।
इन्हीं शब्दों के साथ
मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।
जय भीम
जय भारत🇮🇳
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