Chopta Plus

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07/06/2026

हांसी। क्षेत्र के गांव खेड़ी चौपटा में रविवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक महिला की मौत हो गई, जबकि दूसरी महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसा उस समय हुआ जब दोनों महिलाएं लकड़ी लेने के लिए जा रही थीं। इसी दौरान एक पानी का टैंकर अनियंत्रित होकर उनके ऊपर पलट गया। मृतक महिला की पहचान गांव खेड़ी जालब निवासी 44 वर्षीय सरोज के रूप में हुई है, जबकि हादसे में घायल 40 वर्षीय संध्या को उपचार के लिए हांसी के सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार सुबह करीब 9:30 बजे खेड़ी चौपटा-बरवाला रोड पर स्थित राजकीय विद्यालय के निकट यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि दोनों महिलाएं सड़क किनारे लकड़ी लेने जा रही थीं। इसी दौरान पानी से भरा एक टैंकर अचानक अनियंत्रित हो गया और पलटकर महिलाओं पर जा गिरा। हादसा इतना भीषण था कि सरोज की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि संध्या गंभीर रूप से घायल हो गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया। जानकारी के अनुसार सरोज अपने पति की मृत्यु के बाद अपने मायके खेड़ी जालब में अपनी मां के साथ रह रही थी। उसका एक बेटा भी है। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए। घटना की सूचना मिलते ही खेड़ी चौपटा पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए हांसी के सामान्य अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया है। मामले की जांच कर रहे हेड कांस्टेबल प्रदीप ने बताया कि पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज करने शुरू कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में यह सड़क दुर्घटना का मामला प्रतीत हो रहा है। परिजनों के बयानों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगामी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

07/06/2026

सिरसा जिले के डबवाली क्षेत्र के गांव रिसालिया खेड़ा में एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़के का शव गांव से लगभग 2 किलोमीटर दूर खेत में बनी पानी की डिग्गी से बरामद हुआ। नाबालिग 6 जून से लापता था, जिसकी तलाश में परिजन और ग्रामीण जुटे हुए थे। शव मिलने के बाद गांव में शोक का माहौल है। जानकारी के अनुसार, गांव निवासी भूप सिंह का पुत्र गुरदीप (17) 6 जून को खेतों की ओर गया था। शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई। परिवार ने पहले आसपास के क्षेत्रों और रिश्तेदारों के यहां उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद गोरीवाला पुलिस चौकी में सूचना दी गई। पूरी रात परिजन और ग्रामीण गुरदीप की खोजबीन करते रहे। अगले दिन यानी रविवार सुबह ग्रामीणों को गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर एक खेत में बनी पानी की डिग्गी के पास उसकी बाइक और चप्पलें मिलीं। इससे आशंका जताई गई कि गुरदीप संभवतः डिग्गी में गिर गया होगा। गुरदीप अपनी पांच बहनों का इकलौता भाई था। ग्रामीणों ने तुरंत डिग्गी का पानी निकलवाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद पानी कम होने पर गुरदीप का शव डिग्गी से बरामद हुआ। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।

06/06/2026

मेहुवाला और डिंग के बीच रोड पर चलती कार में लगी आग,

हरियाणा के भट्टूकलां क्षेत्र के गांव मेहुवाला निवासी पंकज पुत्र साधु राम सिहाग अपने दोस्त विक्रम बैनीवाल पुत्र छोटूराम निवासी चूली खुर्द के साथ शनिवार को दवाई लेने के लिए सिरसा जा रहे थे।
जानकारी के अनुसार जब वे मेहुवाला और डिंग के बीच पहुंचे तो अचानक कार के बोनट से शॉर्ट सर्किट जैसी आवाज सुनाई दी। स्थिति को भांपते हुए पंकज ने तुरंत वाहन सड़क किनारे रोक दिया। इसके बाद दोनों ने नीचे उतरकर बोनट खोलकर जांच की तो उसमें तेज स्पार्किंग होने लगी और देखते ही देखते आग भड़क उठी।
आग लगने से कार को नुकसान पहुंचा, हालांकि समय रहते दोनों युवक वाहन से बाहर निकल गए, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। प्रारंभिक तौर पर आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है।
गनीमत रही कि हादसे में दोनों कार सवार सुरक्षित रहे और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

06/06/2026

पूरी कहानी अवश्य पढ़ें 👉👉मेहनत की कमाई और बेटों की लापरवाही, एक छोटे से गांव में एक किसान रहता था। वह साधारण किसान था, लेकिन उसकी सोच बहुत बड़ी थी। उसके पास ज्यादा जमीन भी थी, फिर भी वह दिन-रात मेहनत करता था। खेतों में खेती-बाड़ी के साथ-साथ उसने एक छोटा सा अनाज और खाद-बीज का व्यापार भी शुरू कर दिया। गांव के लोग उसकी ईमानदारी और मेहनत की मिसाल देते थे।
किसान सुबह सूरज निकलने से पहले उठ जाता और देर रात तक काम करता। उसकी पत्नी भी हर कदम पर उसका साथ देती थी। दोनों का एक ही सपना था कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और जीवन में सफल बनें।

समय बीतता गया। मेहनत रंग लाने लगी। खेती से अच्छी पैदावार होने लगी और व्यापार भी बढ़ने लगा। धीरे-धीरे किसान ने गांव में पक्का मकान बनवा लिया। और जमीन खरीद ली। घर में ट्रैक्टर, कार और अन्य सुविधाएं भी आ गईं। लोग कहते थे, "देखो, मेहनत करने वाला इंसान कभी खाली हाथ नहीं रहता।"

किसान के तीन बेटे थे। उसने अपने बेटों को शहर के अच्छे स्कूलों में पढ़ाया। बच्चों की पढ़ाई के लिए उसने कभी पैसों की कमी नहीं होने दी। कई बार खुद पुराने कपड़े पहन लिए लेकिन बच्चों की फीस समय पर भरी। बेटों ने भी पढ़ाई पूरी कर ली और अच्छे कॉलेजों से डिग्रियां हासिल कर लीं।

जब बेटे बड़े हुए तो किसान ने सोचा कि अब उसकी मेहनत सफल हो गई है। उसने अपने बेटों को व्यापार और खेती की जिम्मेदारी सौंपनी शुरू कर दी। वह चाहता था कि बेटे उसके बनाए हुए काम को और आगे बढ़ाएं।

लेकिन धीरे-धीरे हालात बदलने लगे।

बेटों को पिता की मेहनत का मूल्य समझ नहीं आया। वे आसान जिंदगी के आदी हो गए थे। उन्हें लगता था कि पैसा तो घर में बहुत है, इसलिए मेहनत करने की क्या जरूरत है। खेती-बाड़ी में उनका मन नहीं लगता था। व्यापार की देखभाल भी वे ठीक से नहीं करते थे।

एक दिन बड़े बेटे ने कहा, "पिताजी, खेती और व्यापार में इतना समय खराब करने से अच्छा है कि हम बड़ा निवेश करें। शहर में नए प्रोजेक्ट आ रहे हैं। वहां पैसा लगाकर जल्दी अमीर बन सकते हैं।"

किसान ने समझाया, "बेटा, मेहनत से कमाया हुआ धन बहुत कीमती होता है। बिना समझे-बूझे कहीं भी पैसा लगाना ठीक नहीं।"

लेकिन बेटों ने उसकी बात को पुरानी सोच कहकर नजरअंदाज कर दिया।

धीरे-धीरे तीनों बेटों ने अलग-अलग व्यवसायों में पैसा लगाना शुरू कर दिया। किसी ने शेयर बाजार में बिना जानकारी के निवेश किया, किसी ने दोस्तों की बातों में आकर बड़ा कारोबार शुरू कर दिया, तो किसी ने महंगी गाड़ियां और दिखावे पर पैसा खर्च करना शुरू कर दिया।

किसान बार-बार उन्हें समझाता रहा, लेकिन बेटों को अपने फैसलों पर बहुत भरोसा था।

कुछ समय तक सब ठीक लगता रहा, लेकिन फिर मुश्किलें शुरू हो गईं। जिन लोगों पर भरोसा करके पैसा लगाया था, वे धोखा देकर भाग गए। कुछ व्यापार घाटे में चले गए। कई निवेश डूब गए।

देखते ही देखते लाखों रुपये का नुकसान हो गया।

बेटों ने नुकसान की भरपाई के लिए खेत बेचने शुरू कर दिए। फिर एक-एक करके कई जमीनें बिक गईं। व्यापार भी घाटे में चला गया। गांव में जो परिवार कभी समृद्धि की मिसाल माना जाता था, वह आर्थिक संकट में फंस गया।

किसान यह सब देखकर अंदर ही अंदर टूटने लगा। जिस संपत्ति को बनाने में उसने पूरी जिंदगी लगा दी थी, वह कुछ वर्षों में खत्म होती जा रही थी।

एक शाम वह अपने आंगन में बैठा था। उसकी आंखों में आंसू थे। उसने अपने बेटों को बुलाया और कहा,

"बेटों, मैं गरीब था। मैंने मेहनत करके यह सब बनाया। मुझे कभी धन का घमंड नहीं हुआ। मैं जानता था कि एक-एक रुपया कितनी मेहनत से आता है। लेकिन तुम लोगों ने बिना मेहनत के सब पाया, इसलिए उसकी कीमत नहीं समझ पाए।"

बेटे चुपचाप सिर झुकाकर सुनते रहे।

किसान आगे बोला, "धन कमाना मुश्किल है, लेकिन उसे संभालकर रखना उससे भी ज्यादा कठिन है। मैंने सोचा था कि तुम लोग मेरी मेहनत को आगे बढ़ाओगे, लेकिन तुमने जल्द अमीर बनने के चक्कर में सब कुछ दांव पर लगा दिया।"

उस दिन पहली बार बेटों को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्हें समझ आया कि पिता जो कह रहे थे, वह अनुभव की बात थी।

बड़े बेटे की आंखों में आंसू आ गए। उसने कहा, "पिताजी, हमने आपकी बात नहीं मानी। हमें लगा था कि हम आपसे ज्यादा समझदार हैं। लेकिन आज समझ आया कि मेहनत और अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता।"

बाकी दोनों बेटों ने भी अपनी गलती स्वीकार कर ली।

इसके बाद परिवार ने नया फैसला लिया। जो जमीन बची थी, उसी पर फिर से खेती शुरू की गई। पुराने व्यापार को धीरे-धीरे संभाला गया। बेटों ने पहली बार खेतों में जाकर मेहनत की। सुबह जल्दी उठना, मजदूरों के साथ काम करना और व्यापार का हिसाब रखना शुरू किया।

शुरुआत कठिन थी, लेकिन इस बार उन्हें हर कमाए हुए रुपये की कीमत समझ आने लगी थी।

कुछ वर्षों बाद परिवार की आर्थिक स्थिति फिर सुधरने लगी। पहले जैसी समृद्धि तो नहीं आई, लेकिन घर में संतोष और समझदारी लौट आई।

किसान अब बूढ़ा हो चुका था। एक दिन उसने अपने बेटों से कहा,

"मैं खुश हूं कि तुमने अपनी गलती से सीख ली। जीवन में धन का नुकसान फिर पूरा किया जा सकता है, लेकिन यदि इंसान सीखना छोड़ दे तो वह सबसे बड़ा नुकसान होता है।"

उसकी बात सुनकर तीनों बेटे भावुक हो गए।

उस दिन उन्हें समझ आया कि पिता की सबसे बड़ी विरासत जमीन, मकान या पैसा नहीं थी, बल्कि उनकी मेहनत, ईमानदारी और जीवन का अनुभव था।

सीख:
मेहनत से कमाया गया धन अमूल्य होता है। बिना सोचे-समझे निवेश और दिखावे की जिंदगी इंसान को बर्बादी की ओर ले जा सकती है। अनुभव और मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जो लोग अपने बड़ों की सीख को समझते हैं, वही जीवन में स्थायी सफलता प्राप्त करते हैं।

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