Atul Rai

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Photos from Atul Rai's post 12/05/2026

ये दोनों महोदय पूर्वांचल के कद्दावर नेता है इसमें कोई शक नहीं है,, फर्जी ही कद्दावर लेकिन है,, एक दूसरे पर हर नेता टिप्पणी करता है अपनी राजनीति चमकाने के लिए ,, और समर्थक लोग बेकार अपना एनर्जी लॉस कर रहे हो नेता जी लोगों के लिए,,
न आप के गुस्सा होने से मनोज जी ओमप्रकाश सिंह जी का सर फोड़ देंगे न ओमप्रकाश जी मनोज जी का सर फोड़ देंगे और न ही अपना संबंध छोड़ देंगे,, फिर क्या मतलब है,,
ये राजनीति है इसमें बात विवाद चलता रहता है ,
फिर ये दोनों नेता आपस में मिलकर साथ ही खाएंगे बैठेंगे उठेंगे,,
हा एक बात जरूर है कि ओमप्रकाश सिंह जी को पूरे जाति और समाज के बारे में टिप्पणी नहीं करना चाहिए था क्यों कि पूरा राजपूत समाज न ओमप्रकाश सिंह से है और न पूरा भूमिहार समाज केवल मनोज सिन्हा से है ,,
इसलिए पूरे समाज को टारगेट नहीं करना चाहिए था आपको ओमप्रकाश जी ,,
रही बात भूमिहार की तो जमानिया विधानसभा अतुल राय का लड़ाकूपन देखे ही थे कि कैसे नींद भी आना बंद हो गया था आपका रात रात भर जागते थे और 2016 का ब्लॉक प्रमुखी चुनाव याद होगा ही न आपको ??
बाकी आप समझदार है इसलिए आगे से ध्यान रहे कि पूरे समाज को टारगेट न करे ,,
और कभी भी भूमिहार समाज के बारे में जानना हो तो विधानसभा जमानिया अतुल राय को याद कर लीजिएगा और 2016 ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जरूर याद कर लीजिएगा आपको भूमिहार समाज की ताकत और जिद्दी पन का एहसास जरूर हो जाएगा ,,
आप दोनों लोग बात विवाद करिए आपस में हमको उससे कोई दिक्कत नहीं लेकिन ओछी टिप्पणी से बचिए किसी के बाप के बारे में किसी को बोलने का हक नहीं है चाहे वो कोई भी हो मनोज जी अपने बाप के घर से नहीं कराएं है तो आप भी अपने बाप के घर से नहीं कराएं होंगे आप भी सरकार के ही पैसे से कराए और मनोज जी भी सरकार के पैसे से कराए है
इसलिए आप दोनों लोग आपस में बात विवाद करिए बीच में समाज को न लाइए,,
क्यों कि कोई भी समाज किसी व्यक्ति विशेष से नहीं होता है
महादेव

02/05/2026

कोई हाथ पकड़े बैठा है तो कोई सिर थामे बैठा है। कोई मानने को तैयार ही नही कि यह भी हो सकता है। जितनी जल्दी बिजली चमकती है उसी तरह से वह मैदान में आया और कुछ ही पलों में पूरा समीकरण इधर उधर करके चला गया। राजस्थान रॉयल्स के मुख्य सहायक कोच विक्रम राठौर दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ लाइव मैच के दौरान यह कह रहे थे कि उनकी टीम इस पिच को स्लो पिच मान रही है और दो सौ या उसके इर्दगिर्द जो भी स्कोर बनाएगी वह उसे डिफेंड करने की कोशिश करेंगे।

उधर राजस्थान रॉयल्स डोनोवन फरेरा को कुलदीप यादव से बचाने में लगी थी और इसी चक्कर में रवींद्र जडेजा को बल्लेबाजी क्रम में ऊपर भेजा गया। इधर अक्षर पटेल भी कुलदीप यादव का एक ओवर बचा के रखे थे। जब कुलदीप यादव अपना आखिरी ओवर करने पारी के 18वें ओवर में फरेरा के सामने आए तो लगा कि बाजी कुलदीप यादव जीतेंगे लेकिन सवाई मानसिंह स्टेडियम में बड़ी स्क्रीन पर आई एम डॉन जब दिखाया गया तो इसका मतलब डॉन फरेरा से था। डोनावन फरेरा ने कुलदीप यादव के इस ओवर में तीन छक्के जड़ दिए।

कुलदीप यादव को कूटने के बाद आत्मविश्वास से लबरेज फरेरा ने फिर मिचेल स्टार्क को भी नहीं बख्शा और आखिरी ओवर में टी नटराजन को भी कूटा। डोनावन फरेरा अब फरारी बनकर उड़ने लगे थे तो पारी के 20 ओवर ही खत्म हो चुके थे। राजस्थान रॉयल्स की रणनीति जो फरेरा को कम गेंद खेलने को दिए वो गलत साबित हुई वरना राजस्थान रॉयल्स 250 प्लस बना सकता था। फरेरा ने 14 गेंद पर 2 चौके और 6 छक्के लगाते हुए नाबाद 47 रन बनाए।

01/05/2026

पुलिस में 20 साल नौकरी पूरी करके स्वेच्छा से रिटायरमेंट लेकर जा रहे हवलदार को बहुत देर समझाने के बाद SP साहब ने पूछा, "सब कुछ तो मिल रहा है नौकरी में, तो फिर नौकरी छोड़कर क्यों जा रहे हो" ?

इस पर हवलदार ने सुंदर सा मार्मिक और दिल को लगने वाला जवाब दिया-

"सर,
जो आपने अपने सामने कुर्सीयां खाली रहते हुए भी, मुझे दो घंटे सावधान मे खड़ा करके समझाया है, बस इसलिए नौकरी छोड़कर जा रहा हूँ" ।
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20/04/2026

धनबाद में मेयर संजीव सिंह की घेराबंदी में जुटे ढुल्लू महतो, बढ़ती लोकप्रियता ने बढ़ाई परेशानी, बाघमारा पर भी नजर
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7 अप्रैल को मैंने धनबाद कोयलांचल की करवट लेती नई राजनीति के संबंध में लिखा था। यह खबर काफी पढ़ी गई। 66000 व्यू आए। लाइक+कमेंट और शेयर की बाढ़। इससे यह पता चलता है कि धनबाद की राजनीति सचमुच नहीं करवट ले रही है। खबर का असर भी दिखने लगा है।
धनबाद की राजनीति में एक नई हलचल हर तरफ देखी और सुनी जा रही है। भाजपा सांसद ढुल्लू महतो सचेत हो गए हैं। उन्होंने अपनी रणनीति बदली है। मेयर संजीव सिंह के बढ़ते प्रभाव और लोकप्रियता देख वह परेशानी महसूस कर रहे हैं। इसलिए अब तक जिसकी उपेक्षा की उसे गले लगा रहे हैं। शिकवा-शिकायत दूर कर रहे हैं। पूर्व सांसद पीएन सिंह से मेल-मिलाप बढ़ गया है। उन्हें अभिभावक बताकर अब उनका मार्गदर्शन ले रहे हैं। उन्हें भाजपा के कार्यक्रमों में आमंत्रित कर रहे हैं और सम्मान दे रहे हैं। यही नहीं 14 अप्रैल को सत्तूवान के मौके पर पीएन सिंह के घर गए। मौका भी था और दस्तूर भी।
इससे आप समझ सकते हैं कि सांसद ने अपनी रणनीति कैसे बदली है। पीएन सिंह से नजदीकी संजीव सिंह की काट में की गई है। अब वह विरोधियों को अपने पक्ष में करने की मुहिम में जुट गए हैं। भाजपा के पुराने नेताओं- कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। गले लगा रहे हैं।
हालांकि, अभी तक धनबाद विधायक राज सिन्हा से तनातनी कम नहीं हुई है। लेकिन धीरे-धीरे प्रयास इस दिशा में भी हो रहा है। संभव है प्रदेश स्तर के कुछ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद यह मामला भी रास्ता पर आ जाए।
इधर, मेयर संजीव सिंह का कारवां लगातार बढ़ता जा रहा है। उनके साथ भीड़ बढ़ रही है। सांसद ढुल्लू महतो के प्रभाव क्षेत्र कतरास और बाघमारा इलाके में भी संजीव सिंह और उनके छोटे भाई सिद्धार्थ सिंह की सक्रियता बढ़ गई है।
जनता श्रमिक संघ को बाघमारा इलाके में सक्रिय करने में सिद्धार्थ जुट गए हैं। बाघमारा में सिद्धार्थ की सक्रियता के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। कहीं सिद्धार्थ बाघमारा से विधानसभा का चुनाव लड़ने की तैयारी में तो नहीं हैं। सक्रियता से तो यही संकेत मिल रहा है।
बाघमारा सांसद का प्रभाववाला और अपना क्षेत्र है। अभी यहां से सांसद के छोटे भाई शत्रुघ्न महतो विधायक हैं। तो क्या यह माना जाए कि सिंह मेंशन की नजर अब धनबाद लोकसभा के साथ-साथ बाघमारा विधानसभा क्षेत्र पर भी है। संजीव सिंह की लोकप्रिय और सक्रियता ने सांसद की मुश्किलें बढ़ा दी है।
इधर, सांसद ढुल्लू महतो भी संजीव सिंह की घेराबंदी और प्रभाव को कैसे कम करें इस दिशा में जुट गए हैं। दोनों तरफ से राजनीति का खेल शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में धनबाद की राजनीतिक दिलचस्प मोड़ पर दिखाई पड़ेगी।
इधर, संजीव सिंह के समर्थक शुभम यादव की हत्या से राजनीति गरमा गई है। तो क्या धनबाद में खूनी संघर्ष का सिलसिला फिर से शुरू होगा क्या। यह बड़ा सवाल है।
#खरीखरी #

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