Educated India
13/11/2021
देश का पहला प्राइवेट स्टेशन भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नया नाम रानी कमलापति के नाम पर रखा जाएगा। रानी कमलापति भोपाल के पास गनौर राज्य के गौंड राजा निज़ाम शाह की पत्नी थी।
रानी कमलापति की कहानी....
रानी कमलापति की कहानी की अगर बात करें तो यह शुरू होती है उस वक्त करीब भोपाल से 50 किलोमीटर दूर स्थित गिन्नौर गढ़ नामक अति छोटी लेकिन महत्वपूर्ण रियासत के राजा निजाम शाह से। निजाम शाह गौढ़ राजा थे और कहा जाता है कि उनकी सात पत्नियां थी। इनमें से एक थी रानी कमलापति। यह राजा की सबसे प्रिय पत्नी थी और प्रिय हो भी क्यों नहीं, क्योंकि कहा जाता है कि रानी परियों की तरह खूबसूरत थीं। उस वक्त एक कहावत काफी प्रचलित थी कि 'ताल है तो भोपाल ताल और बाकी सब हैं तलैया। रानी थी तो कमलापति और सब हैं गधाईयां...'।
आज का भोपाल उस समय एक छोटा सा गांव हुआ करता था, जिस पर निजाम शाह की हुकूमत थी। आपने एक कहावत तो सुनी ही होगी कि हमें तो अपनों ने लूटा गैरो में कहा दम था। ऐसा ही कुछ हुआ निजाम शाह के साथ। दरअसल, निजाम शाह के भतीजे आलम शाह का बाड़ी पर शासन था और उसे अपने चाचा निजाम शाह से काफी ईर्श्या थी।
एक शाम भतीजा आलम शाह अपने चाचा निजाम शाह को दावत पर बुलाता है और षडयंत्र से उनके खाने में जहर मिलाकर उनकी हत्या कर देता है। इन षडयंत्रों खुद बचाने के लिए रानी कपलापति अपने एक मात्र पुत्र नवल शाह को गिन्नोर गढ़ से भोपाल के रानी कमलापति महल लेकर आ जाती हैं। निजाम शाह की मृत्यु के बाद रानी कमलापित बेहद दुखी और बेचैन रहती थीं। वह अपने शौहर की मौत का बदला लेना चाहती थीं, लेकिन फौज और पैसे की कमी के कारण वह मजबूर थीं।
इसी दौरान दोस्त मोहम्मद खान की एंट्री होती है। दोस्त मोहम्मद खान एक चतुर और चालाक अफगान सरदार थे, साथ ही एक तनख्वादार मुलाजिम था जो लोगों पैसे लेकर बदले में उनकी मदद किया करता था। वह अब तक जगदीशपुर पर अपनी हुकूमत कायम कर चुका था।
जब रानी को पता चलता है कि दोस्त मोहम्मद जगदीशपुर पर कब्जा कर चुके हैं तो रानी अपना मुद्दा बयां करती हैं और अपने पति की मौत का बदला लेने के लिए दोस्त मोहम्मद से मदद मांगती हैं।
ऐसा कहा जाता है कि दोस्त मोहम्मद एक लाख रुपए के बदले रानी की मदद के लिए तैयार हो जाते हैं। इसके बाद दोस्त मोहम्मद बाड़ी के राजा पर हमला कर उनकी हत्या कर देता है। दोस्त मोहम्मद के इस काम से रानी बहुत खुश होती हैं, लेकिन तय सौदे के मुताबिक वह 1 लाख रुपए नहीं दे पाती हैं। बदले में वह दोस्त मोहम्मद को भोपाल का एक हिस्सा दे देती हैं।
जब दोस्त मोहम्मद भोपाल पर अपना शासन जामने निकले तो उनका युद्द रानी कमलापति के बेटे नवल शाह से हुआ। ऐसा कहा जाता कि उस युद्ध में इतना खून वहां था कि वह धरती लाल हो गई थी और आज उसी जगह को लालघाटी के नाम से जाना जाता है। इस युद्ध में नवल शाह को हार का सामना करना पड़ा और दोस्त मोहम्मद का भोपाल पर एकाधिकार हो गया था।
*ll शुभ दीपावलीll*
आपको ओर आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओॅ के साथ "प्रकाश व प्रसन्नता के पर्व दीपावली पर बहुत बहुत मंगलकामनाएं। धन, वैभव, यश, ऐश्वर्य के साथ दीपावली पर माँ महालक्ष्मी आपकी सुख सम्पन्नता स्वास्थ्य व हर्षोल्लास में वृद्धि करें, इन्हीं शुभेच्छाओं के साथ।"*
*ll शुभ दीपावलीll*
🙏
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Website
Address
Singrauli
486886