Harshnath Ancient Temple - Sikar Rajasthan
18/07/2023
Pleased to share my Article about Harshnath Temple near Sikar, Published today by Maruvedna Newspaper. Originally, it was written for this FB page, created by me to Create Awareness about & Promote Harshnath Ancient Temple - Sikar Rajasthan, as a tourist attraction. All of you are also requested to visit this page to know more about Harshnath Temple. Please also like & Share the page & posts thereon. Please also support newspaper, which, Mr. Devendra, is publishing from Jhunjhunu & circulating it all over India, as a voice of Rajasthan & Pravasi Rajasthanies. Thank you.
-Dr. CA. Sunil Sharma, Mumbai. (Originally from Sikar)
21/09/2022
आइए, जानें हर्षनाथ के बारे में...!!!
हर्ष पर्वत पर हम सब सीकर वाले लोग जाते रहते हैं, और सीकर आने वाले सैलानियों को भी ले जाते रहते हैं। पर्यटन के लुत्फ के साथ मंदिर में शिवलिंग एवम पास ही स्थित भैरों जी की पूजन अर्चन भी कर आते हैं। लेकिन, शायद बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि इस पहाड़ी को हर्ष व यहां के शिव मंदिर को हर्षनाथ के नाम से क्यों पुकारा जाता है? यहां पर दो शिव मंदिरों का निर्माण क्यों हुआ तथा यह एतिहासिक मंदिर मुगल बादशाह औरंगजेब के निशाने पर कैसे आया?
मंदिर का पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व एवम भगवान शिव के दुर्लभतम पंचमुखी व विश्व के एकमात्र लिंगोद्भव की मूर्ति की जानकारी भी बहुत कम लोगों को होगी। आज आपको हर्ष के इन महादेव मंदिरों का पूरा रहस्य उजागर करतें है। जो पूजा- पाठ, पुराण व पुरातत्व तीनों लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है।
हर्ष में थी विश्व की एकमात्र लिंगोद्भव मूर्ति, और आज भी मौजूद है दुर्लभतम पंचमुखी शिव और अर्धनारीश्वर गणेश जी।
हर्ष एवम हर्षनाथ नामकरण के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी है। शिवपुराण में जिक्र है कि त्रिपुर राक्षस ने इंद्र व अन्य देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया था। शिलालेख के अनुसार तब देवताओं ने इसी पहाड़ी पर शरण ली थी। इसके बाद जब भगवान शिव ने त्रिपुर राक्षस का अंत किया तो प्रसन्न हुए देवताओं ने इसी पहाड़ी पर भगवान शिव की स्तुति की थी। चूंकि देवताओं ने बहुत हर्ष के साथ यह स्तुति की थी। ऐसे में इस पहाड़ी का नाम हर्ष व यहां स्थापित शिव हर्षनाथ कहलाए।
रानोली के एक ब्राह्मण के आग्रह पर 1048 साल पहले बना था मंदिर। प्रागैतिहासिक काल का शिव मंदिर संवत एक हजार में अजमेर सांभर के चौहान वंश के शासक सिंहराज के क्षेत्राधिकार में था। जय हर्षनाथ- जय जीण भवानी पुस्तक के लेखक महावीर पुरोहित लिखते हैं कि इस काल में रानोली का नाम रणपल्लिका था। यहां के एक ब्राह्मण सुहास्तु रोजाना पैदल चलकर इस पर्वत पर शिव आराधना किया करते थे। इन्हीं सुहास्तु के कहने पर राजा सिंहराज से हर्ष पर हर्षनाथ मंदिर निर्माण व वहां तक पहुंचने के लिए सुगम रास्ते की मांग की। इस पर महाराज सिंहराज ने विक्रम संवत 1018 में हर्षनाथ मंदिर की नींव रखी और पहाड़ की गोद में एक नगर बसाया। जिसका नाम हर्षा नगरी रखा गया। यही आज हर्ष गांव कहलाता है। इतिहासकार डा. सत्यप्रकाश ने इसे अनन्ता नगरी भी कहा। यहां सदा बहने वाली चंद्रभागा नदी भी थी। मंदिर का निर्माण सुहास्तु के सलाहकार सांदीपिता के मार्गदर्शन में वास्तुकार वाराभद्र ने वैज्ञानिक ढंग से किया था।
हर्ष मंदिर में लिंगोद्भव की मूर्ति भी प्रतिष्ठित की गई थी। जो विश्व की एकमात्र मूर्ति थी। जो अब अजमेर के संग्रहालय में स्थित है। वहीं, हर्ष पर भगवान शिव की पंचमुखी मूर्ति अब भी विराजित है। जो भी दुर्लभतम मानी जाती है। संभवतया यह प्रदेश की एकमात्र व सबसे प्राचीन शिव प्रतिमा है। पुराणों में जिक्र है कि भगवान विष्णु के मनोहारी किशोर रूप को देखने के लिए भगवान शिव का यह रूप सामने आया था। इसी मंदिर प्रांगण मे, पास ही के भैरव मंदिर में अर्धनारीश्वर गणेश शायद विश्व की एकमात्र प्रतिमा है जो इस रूप में है।
इसलिए पंचाचन कहलाए शिव:
भगवान शिव के पांच मुंह पंचतत्व यानी जल, वायु, अग्नि, आकाश, पृथ्वी की उत्पत्ति व जगत कल्याण की कामना से विभिन्न कल्पों में हुए उनके सद्योजात, वामदेव, तत्पुरुष, अघोर और ईशान अवतार के प्रतीक माने जाते हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु का मनोहारी किशोर रूप देखने के लिए भी भगवान शिव इस रूप में प्रकट हुए थे। पांच मुखों के कारण शिव 'पंचानन और 'पंचवक्त्र' कहलाते हैं।
मंदिर के प्रकाश ने खींचा औरंगजेब का ध्यान:
इतिहासकारों का कहना है कि प्राचीन शिव मंदिर पर एक विशाल दीपक जलता था। जिसे जंजीरों व चरखी के जरिये ऊपर चढ़ाया जाता था। इस दीपक का प्रकाश सैंकड़ों किलोमीटर दूर से देखा जा सकता था। इसी प्रकाश को औरंगजेब ने देखा था। जिसने खंडेला अभियान के दौरान संवत 1739 में इस पर आक्रमण कर खंडित कर दिया था।
राव शिवसिंह ने बनवाया दूसरा मंदिर:
औरंगजेब के आक्रमण के बाद संवत 1781 में हर्ष पर दूसरा शिव मंदिर बना। जिसे सीकर के शासक राव शिव सिंह ने महात्मा शिवपुरी के आदेश पर बनवाया था। कहा जाता है कि महात्मा शिवपुरी के आशिर्वाद से ही शिव सिंह का जन्म हुआ था।
देश- विदेश के म्यूजियम में हर्ष की मूर्तियां
हर्ष की मूर्तियों का महत्व देश- विदेश के कई संग्रहालयों में इनके संगहण से भी समझा जा सकता है। सीकर के श्रीहरदयाल म्यूजियम के अलावा दिल्ली के राजपूताना संग्रहालय, अमेरिका के क्लीव लैण्ड ऑफ आर्ट तथा नेल्सन एटकिन्स गैलेरी तथा फिलेडोल्फिया म्यूजियम ऑफ आर्ट पेरिस के रोवर्ट रूसो के निजी संग्रह में में हर्ष की मूर्तियां है।
लिंगोद्भव मूर्ति अजमेर के संग्रहालय में है। यहां के कसौटी पत्थर की मूर्ति विदेशी ले गए।
आज भी होता है अभिषेक:
पंचमुखी शिव की प्रतिमा की पूजा अर्चना अब भी लगातार जारी है। मंदिर के विजय पुजारी का कहना है कि जाट समाज में पूनियां गोत्र की धोक आज भी इसी मंदिर में लगती है। सावन व शिवरात्रि पर मूर्ति का अभिषेक भी किया जाता है। महाशिवरात्रि पर भक्तों की विशेष भीड़ के अलावा लगभग प्रतिदिन श्रद्धालु, प्रातः भ्रमणकर्ता एवम सैलानियों की भीड़ जुटती है।
यातायात, सड़क एवम ट्रेक मार्ग से पहुंचने की सुविधा:
हर्षनाथ मंदिर सीकर से लगभग 15 किमी पर स्थित है, और यहां सांवली होते हुए तलहटी तक और फिर पहाड़ी घाट की सड़क से भी पहुंच सकते हैं, किन्तु ज्यादा लोकप्रिय है तलहटी से ट्रैकिंग का रास्ता, और प्रत्येक सुबह लोग यहां सैर के लिए भी जाते हैं, किन्तु सप्ताहांत में ट्रेकर्स एवम सैलानियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ट्रेक की पगडंडी पत्थर जमा कर बनाई गई है और कुछ ज्यादा मुश्किल नही है। घुमावदार पगडंडी पर चढ़ते हुए आसपास के गांवों, पहाड़ों और सीकर शहर के दिलकश नजारे भी दिखाई देते हैं।
दृश्य, वातावरण एवम ऐतिहासिक पुरातन धरोहरें:
ट्रेक पूरा करके जैसे ही पहाड़ के ऊपर पहुंचते हैं तो समतल सी जगह पर काफी सारी पवनचक्कियां घूम घूम कर विद्युत निर्माण में व्यस्त मिलेंगी और काफी सारे काले मुंह के लंगूरों के झुंड आपसे कुछ खाद्य पदार्थ की आशा के भाव चेहरे पर लिए मासूम निगाहों से आपका स्वागत करते मिलेंगे, और आपकी मंजिल के रूप में लगभग 400 मीटर पर दिखाई देगा मंदिर का शिखरबन्ध।
नजदीक पहुंचने पर पुरातत्व विभाग के बोर्ड आपका स्वागत करते हैं, एक तरफ बड़ा से मंदिर जो नया बना हुआ है, सीढियां चढ़ कर वहां दर्शन एवम अभिषेक करते हुए ऊंचाई की हवा खाते हुए वहां से चारों तरफ के विहंगम दृश्य का आनंद उठा सकते हैं।
मंदिर के ही एक तरफ एक टूट फूटा सा खंडहर नुमा मंदिर दिखाई देता है, जो कि असली हर्षनाथ मंदिर है। इस मंदिर के खंभे, छत एवम सब तरफ बनी हुई शानदार मूर्तियां और नक्काशी, आततायियों के नष्ट करने के प्रयासों के बावजूद अब तक बच कर, बिना कुछ बोले ही इस जगह के आध्यत्मिक एवम ऐतीहासिक भूतकाल की कहानियां सुना रही है। प्रांगण में भी काफी सारी मूर्तियां और मंदिर के पुरातन अवशेष बिखरे पड़े हैं, जब कि काफी सारी मूर्तियां यहां से बाहर जाकर देश विदेश के विभिन्न संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रही है। मुमकिन है कि भूतकाल की काफी सारी धरोहर मूर्तिचोरों ने भी चुरा कर बेच डाली हो। लेकिन फिर भी अतीत के झरोखों से झांक कर यहां गौरवशाली इतिहास हमे चारों तरफ नजर आता है।
इसी प्रांगण में एक प्राचीन जलाशय के साथ साथ एक और प्राचीन मंदिर है, भैरों जी का। वहां भी प्राचीन मूर्तियां, खंभे और कलाकृतियां बिखरी, और कच्ची पक्की दीवारों में चुनी पड़ी है। किंतु इस मंदिर में अर्धनारीश्वर गणेश की अनूठी प्राचीन मूर्ति है, जो संभवतः गणेश जी के इस स्वरूप की एकमात्र मूर्ति है। इसलिए कला एवम पुरातत्व की दृष्टि से इस मूर्ति का अलग ही महत्व है।
प्राकृतिक सौंदर्य एवम पर्यटन:
रोमांच एवम नैसर्गिक पर्यटन की दृष्टि से भी यह एक ऐसी ट्रेक है जो कहीं कहीं खड़ी चढ़ाई और उखड़ती पगडण्डी के पत्थरों के कारण कठिन हो जाती है, अन्यथा आसान सी है। पूरे वर्ष मंद मंद बयार बह कर ताजगी फैलाती रहती है। सूर्योदय एवम सूर्यास्त के रंग आसमान में फैलते हैं तो यहां के नजारे बड़े ही मनमोहक बन जाते हैं। वर्षा ऋतु में यह सुरम्य स्थान स्वर्ग से कम नही रहता, कभी कभी तो हल्की फुहारों में भीगने का अलग ही मजा और कभी ऐसा लगता है हम बादलों के लोक में ही विचरण कर रहे हैं। पहाड़ की वनस्पति पर चहचहाते नाना प्रकार के पक्षी एवम उछलते खेलते लंगूर यहां के प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगा देते हैं।
आध्यात्मिक, पौराणिक, धार्मिक, वास्तुकला, स्थापत्य, इतिहासिक एवम रोमांचकारी पर्यटन के अनूठे मिश्रण वाली इस धरोहर में आपका भी स्वागत है। आइए, इस स्थान का आनंद लें एवम आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे संजो कर रखने के प्रयासों में सहभागी बने।
-डॉ सीए सुनील शर्मा, मुम्बई/सीकर
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Website
Address
Sikar