Journalist Ranjeet yadav

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15/08/2025

100 साल पुराना कार्टून अब हकीकत: भारत की हुंकार, अमेरिका-यूरोप की दबंगई को खुली चुनौती
1925 का सपना, 2025 की सच्चाई: भारत, चीन और अफ्रीका बदल रहे हैं दुनिया का नक्शा

करीब सौ साल पहले, 1925 में, एक अमेरिकी कार्टूनिस्ट रॉबर्ट “बॉब” माइनर ने अपनी कलम से कुछ ऐसा बनाया, जिसने उस वक्त के लोगों को चौंका दिया। उनके कार्टून में भारत, चीन और अफ्रीका को विशाल, ताकतवर इंसानों के रूप में दिखाया गया था। सामने खड़े थे छोटे-छोटे अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस, जो अपनी ताकत के बावजूद डरे हुए नजर आ रहे थे। उस वक्त लोग इसे एक मजाक या दूर की कौड़ी समझते थे। लेकिन आज, 15 अगस्त 2025 को, यह कार्टून सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि दुनिया की सियासत में सच होता दिख रहा है।

अमेरिका का टैरिफ बम और भारत का बुलंद जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 50% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की धमकी दी है। उनका कहना है कि अगर भारत उनकी ट्रेड डील्स को नहीं मानेगा, तो वह भारत के सामान पर भारी टैक्स लगा देंगे। लेकिन भारत ने साफ-साफ कह दिया है, “हम न डरेंगे, न झुकेंगे।”
भारत सरकार का बयान है कि यह टैरिफ “अनुचित, अन्यायपूर्ण और बेतुका” है। भारत अपने 1.4 अरब लोगों की जरूरतों के लिए रूस से सस्ता तेल खरीदता रहेगा, क्योंकि यह हमारी अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस की यात्रा में कहा था, “हम तेल वहां से खरीदेंगे, जहां हमें सबसे सस्ता और फायदेमंद सौदा मिलेगा।”
चीन ने भी भारत के इस रुख का समर्थन किया है। चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, “अमेरिका की यह दबंगई भारत की आजादी और आत्मनिर्भरता के खिलाफ है।” भारत और चीन का यह एकजुट होना 1925 के उस कार्टून की भविष्यवाणी को सच साबित कर रहा है।

अलास्का में ट्रम्प-पुतिन की मुलाकात: क्या बदलेगा खेल?
आज, 15 अगस्त 2025, को ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अलास्का में मिल रहे हैं। इस मुलाकात में रूस-यूक्रेन युद्ध पर बात होगी। अगर कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, तो अमेरिका भारत पर और सख्ती कर सकता है। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद नहीं करेगा।
मजेदार बात यह है कि यूरोप और अमेरिका खुद भी रूस से गैस और खनिज खरीदते हैं, लेकिन भारत को निशाना बनाया जा रहा है। यह दोहरा रवैया साफ दिखाता है कि अमेरिका की असल मंशा भारत को दबाव में लाना है।

क्यों है भारत पर दबाव?
अमेरिका और यूरोप चाहते हैं कि भारत उनकी हर बात माने। लेकिन भारत अब वह देश नहीं, जो चुपचाप सिर झुका ले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में गिना जाता है। ट्रम्प खुद कह चुके हैं, “मोदी एक टफ नेगोशिएटर हैं।” भारत की यह ताकत और आत्मविश्वास अमेरिका को खटक रहा है।
भारत की ताकत का राज:

आत्मनिर्भर भारत: भारत अब अपने दम पर टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस में आगे बढ़ रहा है।
लोकतंत्र की ताकत: 1.4 अरब लोगों का देश अपनी नीतियां खुद तय करता है।
BRICS का साथ: भारत, चीन, ब्राजील जैसे देश अब मिलकर दुनिया में नया पावर बैलेंस बना रहे हैं।

ट्रेड डील का असली खेल: किसानों की रोजी-रोटी दांव पर
ट्रम्प चाहते हैं कि भारत अपना कृषि और खाद्य बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए खोल दे। लेकिन यह इतना आसान नहीं है।

भारत की 60% आबादी खेती-किसानी से जुड़ी है। अगर अमेरिकी कंपनियां सस्ते दाम पर अपने प्रोडक्ट्स भारत में बेचेंगी, तो हमारे किसानों का माल कौन खरीदेगा?
इससे लाखों किसानों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ सकती है।
भारत में किसानों का सम्मान सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी है। कोई भी सरकार ऐसा फैसला नहीं लेगी, जो किसानों को नुकसान पहुंचाए।

सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, “ट्रम्प भारत को डराना चाहते हैं, लेकिन वो भूल गए कि भारत अब अपने हितों से समझौता नहीं करता।”

1925 का कार्टून: एक भविष्यवाणी जो सच हुई
बॉब माइनर का कार्टून 1925 में समाजवादी अखबार डेली वर्कर में छपा था। उसमें दिखाया गया था कि भारत, चीन और अफ्रीका की ताकत उनकी जनसंख्या और संस्कृति में है। पश्चिमी देश भले ही पैसे और हथियारों से ताकतवर हों, लेकिन एक दिन ये देश दुनिया का रुख बदल देंगे।
आज, 2025 में, यह कार्टून वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर यूजर ने लिखा, “यह कार्टून सिर्फ कला नहीं, भविष्यवाणी था। भारत, चीन और अफ्रीका अब वैश्विक बदलाव ला रहे हैं।”

भारत: दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जो जल्द तीसरे नंबर पर पहुंचने वाली है।
चीन: टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया का पावरहाउस।
अफ्रीका: तेजी से उभरता हुआ बाजार और प्राकृतिक संसाधनों का खजाना।

ये तीनों अब मिलकर दुनिया में नया संतुलन बना रहे हैं।

नया विश्व, नया भारत
1925 में जो सपना था, वह 2025 में हकीकत बन रहा है। BRICS जैसे संगठन, डॉलर से अलग व्यापार, और अपनी शर्तों पर फैसले लेना—यह सब दिखाता है कि अब दुनिया में सिर्फ अमेरिका या यूरोप का दबदबा नहीं चलेगा।
भारत का संदेश साफ है: “हम अपने देश, अपनी अर्थव्यवस्था और अपने किसानों के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।”
नरेंद्र मोदी ने एक बार कहा था, “यह नया भारत है, जो न सिर्फ सपने देखता है, बल्कि उन्हें पूरा भी करता है।” आज भारत वही कर रहा है—अपने हितों की रक्षा और दुनिया में अपनी जगह पक्की करना।

आप क्या सोचते हैं?
क्या आपको लगता है कि भारत को अमेरिका की धमकियों के सामने झुकना चाहिए? या भारत का यह रुख सही है कि हम अपने हितों को सबसे पहले रखें? अपनी राय जरूर बताएं।
1925 का कार्टून अब सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि एक नई दुनिया की कहानी है। और इस कहानी का हीरो है—भारत।









Ranjeet Yadav

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