Vikrant Banat
22/06/2026
तुमसे जलन हो रही है भरत तिवारी। तुम्हारे जीवन से, तुम्हारे जज्बे से, तुम्हारे लड़ाकेपन से, तुम्हारे जुनून से। जलन हो रही है तुम्हारे मौत से भी, तुम्हारे अंतिम संस्कार में जुटे हजारों की भीड़ से। तुम्हारे लिए लोगों को रोते देखकर जलन हो रही है। जिनके लिए तुम काम कर रहे थे वो विपत्ति में अकेले छोड़े लोग थे, तुम्हारे जात के भी नहीं थे, बाढ़ में उनका सबकुछ चला गया था। तुमने उनके घर, बिजली, चापाकल, सड़क, राशन सबके लिए लड़ा। लड़ते रहे तबतक जबतक सबने तुम्हें मानसिक विक्षिप्त नहीं घोषित कर दिया। तुम्हारी भी एक मां रही होगी। जब तुम व्यवस्था से हार गए और अंत में अपने गले का हनुमानी बेच के तुमने हथियार खरीदा होगा, तब तुम्हें एहसास तो रहा होगा की इस रास्ते पे वापसी नहीं है। फिर हिम्मत कैसे किया तुमने दोस्त ? अपने मां का चेहरा याद नहीं आया ? अपने प्रेयसी संग जीवन जीने का ख़्याल कैसे भुला दिए ? तुम 30 के थे, तुम्हारे दोस्त पैसा कमाने, सुख भोगने में लगे होंगे। तुम कैसे अपने मन को मनाते थे ? चिंताएं भी होती होगी तुम्हें बहुत सी चीजों की ? कैसे इस सबसे जीते ? कैसे इन सभी मोह को त्याग पाए ? जलन हो रही है तुम्हारे त्याग से। जलन हो रही है तुम्हारे क्रांति और बदलाव के भाव से। तुम क्रांति करना चाहते थे, क्रांतिकारी बनना चाहते थे, विद्रोह तुम्हारा तेवर था। क्रांति कर दिया तुमने दोस्त। आशीर्वाद देना ऊपर से। काश की तुम्हारे तरह का मानसिक विक्षिप्त हो पाऊं। काश इतना हिम्मत पैदा हो पाए।
िवारी
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