Advocate Akhand Mishra Ak

Advocate Akhand Mishra Ak

Share

13/05/2023

¶पत्नी द्वारा ऐसे आरोप जो पति के प्रतिष्ठा को प्रभावित करते हैं, मानसिक क्रूरता के समान और तलाक मांगने का आधार:_____ सुप्रीम कोर्ट

भारत में शादी करने को चाहे जितना भी आसान बना दिया जाये लेकिन तलाक लेना उतना ही मुश्किल है तलाक अगर आपसी सहमति से हो जाये तो अच्छा है वरना ये प्रोसेस बहुत लम्बा होने वाला है। क्योकि जब मामला कोर्ट में पहुँचता है तो केस कितना लम्बा नहीं बता सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पत्नी द्वारा लगाए गए ऐसे आरोप,जो पति के करियर और प्रतिष्ठा को प्रभावित करते हैं,वह तलाक मांगने के लिए उसके खिलाफ की गई मानसिक क्रूरता के समान है।

न्यायमूर्ति *संजय किशन कौल*,न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की खंडपीठ ने कहा कि सहनशीलता का स्तर हर जोड़े में एक दूसरे से भिन्न होता है और अदालत को पक्षकारों की पृष्ठभूमि, शिक्षा के स्तर और स्टे्टस को भी ध्यान में रखना होगा, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि क्या क्रूरता का आरोप विवाह के विघटन को सही ठहराने के लिए पर्याप्त है।

इस मामले में पति एक सेना अधिकारी है,जिसने अपनी तलाक की याचिका में आरोप लगाया था कि उसे अपनी पत्नी की तरफ से दायर कई दुर्भावनापूर्ण शिकायतों का सामना करना पड़ा है,जिन्होंने उसके कैरियर और प्रतिष्ठा को प्रभावित किया है और उसकी मानसिक क्रूरता हुई है। फैमिली कोर्ट ने उसके पक्ष में तलाक का फैसला दिया था परंतु हाईकोर्ट ने उसे फैसले को पलट दिया था। शीर्ष अदालत के समक्ष अपील में पति ने प्रस्तुत किया कि उसकी पत्नी ने उसके खिलाफ सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष कई शिकायतें दायर की थी,जो चीफ आॅफ आर्मी स्टाॅफ से लेकर अन्य अधिकारियों के समक्ष दायर की गई थी। इन शिकायतों ने उसकी प्रतिष्ठा और मानसिक शांति को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है।

पीठ ने कहा कि, ”मानसिक क्रूरता का आरोप लगाने वाले पति या पत्नी की मांग पर विवाह के विघटन पर विचार करते समय यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि मानसिक क्रूरता इस तरह की होनी चाहिए,जिसके परिणामस्वरूप वैवाहिक संबंध को जारी रखना संभव ना रहे। दूसरे शब्दों में, व्यथित पक्ष से यह उम्मीद नहीं की जा सकती है कि इस तरह के आचरण को क्षमा कर दे और अपने जीवनसाथी के साथ रहना जारी रखे। सहनशीलता का स्तर हर जोड़े में एक दूसरे से भिन्न होता है और अदालत को पक्षकारों की पृष्ठभूमि, शिक्षा के स्तर और स्टे्टस को भी ध्यान में रखना होगा, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि क्या क्रूरता का आरोप विवाह के विघटन को सही ठहराने के लिए पर्याप्त है।”

हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए, पीठ ने कहा कि, ”हमारा मानना है कि हाईकोर्ट ने इस टूटे हुए रिश्ते को मध्यम वर्ग के विवाहित जीवन के सामान्य झगड़े या परेशानी के रूप में वर्णित करने में गलती की थी। यह अपीलकर्ता के खिलाफ प्रतिवादी द्वारा निर्दयतापूर्वक क्रूरता करने का एक मामला है और इसलिए इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने और फैमिली कोर्ट के आदेश को बहाल करने के लिए पर्याप्त स्पष्टीकरण पाए गए हैं।”
_____________________________________

¶केस टाइटल – जॉयदीप मजूमदार बनाम भारती जायसवाल मजूमदार
¶केस नंबर – CA NOS. 3786-3787 ऑफ़ 2020

-------------------------------------------

ऐसी ही महत्वपूर्ण अन्य विधिक जानकारियों के लिए हमारे पेज को फॉलो करें।

Akhand Mishra Ak (Legal Knowledge)

30/04/2023

भारतीय दंड संहिता,1860 के अंतर्गत महिलाओं से संबंधित अपराध.. एक नजर में_____

आइए जानते हैं भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत महिलाओं के विरुद्ध कौन-कौन से अपराध दंडनीय हैं एवं भारतीय दंड संहिता 1860 में इन अपराधों के संबंध में क्या प्रावधान किए गए हैं__
________________________________

¶ धारा 304 (बी)- दहेज मृत्यु ( Dowry Death)

¶ धारा 312- गर्भपात कारित करना (Causing Miscarriage)

¶ धारा 313- स्त्री की सम्मति के बिना गर्भपात कारित करना

¶ धारा 314- गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्यों द्वारा कारित मृत्यु

¶ धारा 354- स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग

•354 (ए)- लैंगिक उत्पीड़न और लैंगिक उत्पीड़न के लिए दंड

•354 (बी)- विवस्त्र करने के आशय से स्त्री पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग

•354 (सी)- दृश्यरतिकता (Voyeurism)

•354 (डी)- पीछा करना ( Stalking)

¶ धारा 366- विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना

• 366 (ए)- अप्राप्तवय लड़की का उपापन (Procuration Of Minor Girl)

•366 (बी)- विदेश से लड़की का आयात करना (Importation Of Girl From Foreign Country)

¶ धारा 372- वेश्यावृत्ति, आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय को बेचना

¶ धारा 373- वेश्यावृत्ति, आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय का खरीदना

______________________________

°°°°°°°यौन अपराध°°°°°°

¶ धारा 375- बलात्संग( R**e)

¶ धारा 376- बलात्संग के लिए दंड ( Punishment For R**e)

✓376 (ए)- पीड़िता की मृत्यु या लगातार विकृतशील दशा कार्य करने के लिए दंड

✓376 (एबी)- 12 वर्ष से कम आयु की स्त्री से बलात्संग के लिए दंड

✓376 (बी)- पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ पृथक्करण के दौरान मैथुन

✓376 (सी)- प्राधिकार में किसी व्यक्ति द्वारा मैथुन

✓ 376 (डी)- सामूहिक बलात्संग (Gang R**e)

✓376 (डीए)- 16 वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्संग के लिए दंड

✓376 (डीबी)- 12 वर्ष से कम आयु की स्त्री से सामूहिक बलात्संग के लिए दंड

✓376 (E)- पुनरावृतिकर्ता अपराधियों के लिए दंड

°°°°°°°°°°°°°°

¶ धारा 498- विवाहिता स्त्री को आपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाना, या ले जाना या निरूद्ध रखना

✓498 (ए)- किसी स्त्री के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करना।

____________________________________________

ऐसी ही अन्य महत्वपूर्ण विधिक जानकारियों के लिए हमारे पेज को फॉलो जरूर करें।

Compilation By- Akhand Mishra AK ✍️

Source:- Indian Penal Code, 1860

________________________

Want your practice to be the top-listed Law Practice in Satna?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Website

Address


Satna
485001