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09/07/2025
श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1 : अर्जुन का विषाद योग
🌿 श्लोक 1.1:
धृतराष्ट्र उवाच —
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय॥
🔍 अर्थ:
धृतराष्ट्र ने संजय से पूछा – हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए मेरे पुत्रों और पांडवों ने क्या किया?
🧠 सीख:
यह श्लोक सिर्फ युद्ध की शुरुआत नहीं, धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष की भूमिका है।
धृतराष्ट्र का दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि वह पक्षपाती है – वह "मेरे" और "पांडव" कहता है।
जीवन में जब हम खुद को निष्पक्ष नहीं रखते, तब हम भी धृतराष्ट्र की तरह निर्णय में गलती करते हैं।
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