tirth_mandir
25/03/2023
🚩🌷🐚🔱|| नवरात्र ||🔱🐚🌷🚩
🥀🌷🔱|| चौथा दिन ||🔱🌷🥀
माँ दुर्गा नौ रुपों में से चौथा रूप है,माँ कूष्माण्डा का।
नवरात्र के चौथे दिन माँ कूष्माण्डा की पूजा की जाती है।
🌺🌹|| स्तुति मंत्र ||🌺🌹 या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
🐚🌹🌺🔱|| माँ कूष्माण्डा ||🔱🌹🌺🐚
माँ कूष्माण्डा अपनी मन्द मुस्कान से अण्ड अर्थात ब्रह्माण्ड को उत्पन्न
करने के कारण इन्हें माँ कूष्माण्डा के नाम से जाना जाता है।
संस्कृत भाषा में "कूष्माण्डा", "कूम्हडे" को कहा जाता है,"कूम्हडे" की बलि इन्हें प्रिय है।
इस कारण भी इन्हें माँ कूष्माण्डा के नाम से जाना
जाता है।
माँ कूष्मांडा का नाम का अर्थ है, वह देवी जिनके उदर में त्रिविध
तापयुक्त संसार स्थित है, वह "कूष्माण्डा" माँ है।
माँ कूष्माण्डा इस चराचार जगत की अधिष्ठात्री है।
जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी उस समय अंधकार का साम्राज्य था
माँ कूष्मांडा जिनका मुखमंड सैकड़ों सूर्य की प्रभा से प्रदिप्त है, उस
समय प्रकट हुई उनके मुख पर बिखरी मुस्कुराहट से सृष्टि की पलकें झपकनी
शुरू हो गयी है।
और जिस प्रकार फूल में अण्ड का जन्म होता है उसी प्रकार कुसुम अर्थात फूल
के समान मां की हंसी से सृष्टि में ब्रह्मण्ड का जन्म हुआ है।
माँ कूष्मांडा का निवास सूर्यमण्डल के मध्य में है।
यह सूर्य मंडल को अपने संकेत से नियंत्रित रखती है।
माँ कूष्मांडा अष्टभुजा से युक्त हैं ,अत: इन्हें देवी अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है।
माँ अपने इन हाथों में क्रमश: कमण्डलु, धनुष, बाण,कमल का फूल,अमृत से
भरा कलश,चक्र तथा गदा है।
माँ के आठवें हाथ में बिजरंके (कमल फूल का बीज) का माला है
यह माला भक्तों को सभी प्रकार की ऋद्धि सिद्धि देने वाला है।
माँ कूष्मांडा अपने प्रिय वाहन सिंह पर सवार रहती है। जो भक्त श्रद्धा पूर्वक माँ कूष्मांडा की उपासना करता है।
उसके सभीप्रकार के कष्ट रोग,शोक का अंत होता है। और आयु एवं यश की प्राप्ति होतीहै।
वह भक्त सभी प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है,और माँ का अनुग्रह प्राप्त करता है। एवं अन्य प्रकार की सभी बाधा दूर हो जाती है।
भोग:-
माता को मालपुए का भोग लगाएं।
लाल वस्त्र,लाल फूल,लाल चूड़ी चढ़ाये।
लाभ:-
बुद्धि का विकास होता है एवं निर्णय करने की शक्ति में वृद्धि होती है।
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Contact the place of worship
Website
Address
HH29+4P9 श्री धर्मराज महामृत्युंजय तीर्थ सरायतरीन, Hayat Nagar Road, Sarai Tarin
Sambhal
244303