Vipul Against Reservation

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03/10/2018

रात के समय एक आदमी को उसके घर वाले अस्पताल ले के आये,शायद उसके पैर की हड्डी में फ्रैक्चर था ।
मरीज का फ्रैक्चर गंभीर नहीं था तो कुछ दिनों बाद उसे छुट्टी दे दी गयी पर घर पर ही रहने की सलाह दी गयी चूंकि वो बिना सहारे के चल पाने में असमर्थ था तो डॉक्टरों ने इस समस्या के हल के रूप में उसे सरकारी अस्पताल से मुफ़्त में मिलने वाली बैसाखी देते वक़्त बोला कि

*ये सरकार की तरफ से है इसलिए इसकी संख्या और सीमा निर्धारित है, जब आप खुद से चलने में समर्थ हो जाओ तो इस बैसाखी को लौटा देना ताकि ये भविष्य में आने वाले आप जैसे लोगों के भी काम आ सके*

फिर वो लिखी हुई दवाएं लेने सरकारी दवाखाने पंहुचा तो वो भी लाइन में लग गया,लाइन में लगे बाकि लोगों ने जब उसके पैर में प्लास्टर बंधा और बैसाखी के सहारे खड़े देखा तो मानवता के चलते उसे आगे जाने दिया और उसे दवा जल्दी ही मिल गयी .

अब उसे स्टेशन जाना था तो ऑटो पकड़ने पंहुचा,ऑटो रुकी तो ऑटो वाले ने भी उसकी लाचारी को देखते हुए उसके सामान को उठा कर रख दिया और उसको भी चढ़ने में मदद की और स्टेशन तक छोड़ा.

ट्रेन पकड़ने पंहुचा तो ट्रेन में बहुत भीड़ थी, बैठने की जगह न होने से खड़ा रहना पड़ा फिर लोगों ने देखा कि बेचारा बैसाखी के सहारे एक आदमी खड़ा है तो एक आदमी ने उठ कर उसे अपनी सीट दे दी और वो घर आराम से पहुच गया .

कुछ दिनों में उसकी मेडिकल लीव भी ख़त्म हो चुकी थी तो ऑफिस जाना था,सुबह तैयार हो कर बाहर निकला और बस का वेट करने लगा। पड़ोसी ने देखा कि बेचारा बैसाखी के सहारे चल रहा है तो उसे ऑफिस तक अपने स्कूटर पर छोड़ आये.

इतने दिन बाद ऑफिस पंहुचा था तो काम बहुत था लेकिन ऑफिस कलीग्स ने भी उसके लाचारी पर सहानभूति दिखाई और उसके ज्यादातर काम उन्होंने करके उसका हाथ बटाया मतलब ऑफिस में भी आराम रहा .
घर लौटा तो साथ वाले ने घर तक छोड़ दिया .

दिन बड़ा आराम से बीता था उसका,, इसलिए उसके दिमाग में कुछ-कुछ चल रहा था...

वह सोचने लगा....
*अगर मैं ठीक न होने का नाटक करूं तो ऐसे ही लोगों की सहानभूति मिलती रहेगी*

*या फिर ये बैसाखी ही न छोड़ूं तो ?? तो सारे काम आसानी से होते रहेंगे*

*और फिर ये बैसाखी अपने बच्चे को दे दूं तो..??वो भी मेरी तरह फायदा उठा पायेंगे*

और फिर उसने अस्पताल में बैसाखी वापस नहीं की .

*ऐसे ही कई मरीज़ों ने किया और कुछ दिनों में ही सरकारी बैसाखियां जो लोगो के मदद के लिए थी ख़त्म हो गयी और हर बैसाखी कुछ चंद लोगों की व्यक्तिगत बन चुकी थी जिसे वो अपने बच्चों को थमाने का प्लान बना चुके थे...*

और उसके जैसे दूसरे मरीज़ अब भी बैसाखियों के आस में बैठे हैं..

आखिर कब तक लोग उसके झूठ को सहते और अनदेखा करते,एक दिन विरोध तो होना ही था...

फिर आगे क्या हुआ वो हम सब देख और महसूस कर रहे हैं

07/09/2018

I m patidar
I m rajput
I m choudhary
I m jain
I m parmar
I m thakor
I m barot
I m sikh
I m muslim
I m christian
etc..
etc..
Here is the only reason why Britisher ruled INDIA for 200 years they found
No “INDIANS” in INDIA!!

07/09/2018

रिजर्वेशन तो ऑनलाइन होता है, इसमें आंदोलन क्या करना.
…Alia Bhatt

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