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08/05/2026

सागर-बीना विधायक निर्मला सप्रे का बयान,अब न्यायालय में मामला है वहीं तय होगा कि मैं किस पार्टी में हूँ,बीना के लिए 3 सौ करोड़ और बीना को जिला बना दें उमंग सिंघार तो मैं उनके साथ चली जाऊंगी,देखिये NEWS 24 की खबर

08/05/2026

सागर-तेज आंधी से नरवाई की आग पहुंची स्टेट हाइवे पर,आधे घंटे आवागमन रहा बंद,,सागर-बीना रोड का बताया जा रहा वीडियो आया सामने,NEWS24 की खबर

03/05/2026

बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण-बजट रहित सफेद हाँथी की सवारी में किसी की रुचि नही

उमेश यादव "त्राहिमाम"

राजनीतिक नियुक्तियों की इस बरसात के दौरान बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के नाम पर बादल भी दिखाई नही दे रहे है जबकि जबलपुर,विंध्य,चित्रकूट सहित अन्य प्राधिकरण में कुछ नियुक्तियां की जा चुकी है और कुछ महत्त्वपूर्ण प्राधिकरणों के लिए राय शुमारी जारी है,
बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण सफेद हाँथी की उपमा से ख्यात है कारण यह कि वर्ष 2007 में इस प्राधिकरण के गठन से लेकर आज तक महज 60 करोड़ रुपये का बजट दिया गया जिसके खर्च पर भी यदा-कदा संदेह जताया जाता रहा है,रामकृष्ण कुसमरिया जैसे नेता इसके अध्यक्ष रहे लेकिन इस BDA के लिए एक कार्यालय तक मयस्सर नही हुआ,कभी सागर के 2 नंबर रेस्ट हाउस में तो कभी कमिश्नरी के एक कमरे में प्राधिकरण का बोर्ड लटका दिखाई देता रहा है,
बहरहाल, ऐसा नही है कि इस क्षेत्र को प्राधिकरण की आवश्यकता नही है या प्राधिकरण अनुपयोगी है,सागर,पन्ना,छतरपुर,टीकमगढ़,दमोह,निवाड़ी और दतिया सहित 7 जिलो तक BDA का कार्य क्षेत्र है,विकास के अनगिनत छोटे बड़े प्रोजेक्ट चल रहे है जिनके साथ ही शहरी और ग्रामीण बुनियादी विकास के मामलों में समान और दूरगामी लक्ष्य आधारित प्लानिंग और क्रियान्वयन,संभावनाओं,शासन से समन्वय जैसी गतिविधियों के लिए यह सिंगल विंडो की तरह काम कर सकता है लेकिन सिर्फ चुनावी दृष्टि से जब गठन किया ही गया था तो इसके (BDA) के बायलॉज क्यों और कौन बनाता,
बजट रहित,कार्यालय रहित,स्टाफ रहित,बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण एक प्रमाण है कि मलाई रहित होने के कारण इसमे नेताओ की रुचि नही है,मलाई तो है ही नही और न ही इसे सार्थक बनाने के प्रयास की सोच ,यानी चुनौती स्वीकार करने और इसे (BDA) प्रभावी बनाने के लिए समय और ऊर्जा खर्च करने के लिए थोड़ी नेता राजनीति में दिन रात एक कर रहे है,
आंचलिक क्षेत्र में समान बुनियादी विकास के लिए दर्जनों एजेंसियां काम कर रही है,क्षत्रिय विकास में संतुलन हो इसके रचनात्मक प्रयास को मूर्त रूप विकास प्राधिकरण की टेबिल पर ही बेहतर दिया जा सकता है लेकिन बात फिर वही आती है कि यहां अभी तो सिर्फ काम करना है,मलाई नही है,खैर..
इस बुंदेलखंड प्राधिकरण को पुनः जीवित करने की यदि सरकार की मंशा हो तो लालबत्ती का सपना देखने वालों को नही बल्कि किसी ऐसे स्वप्नद्रष्टा को इसकी कमान दे जो इस सफेद हाँथी को विकास के रथ में जोत सके,जो इस वीर भूमि के कल्याण के लिए लालायित हो न कि अपने विकास के लिए,हालांकि भूसे में सुई ढूढ़ने जैसा टास्क है यह,प्रयोग भी किया जा सकता है,
बहरहाल,इस बुंदेलखंड क्षेत्र को विकास प्राधिकरण की महती जरूरत है,केन-बेतवा प्रोजेक्ट हो या सभी जिलों की निर्माणधीन बड़ी सिंचाई परियोजनाएं हो या बीना कैमिकल इंड्रस्टीज कॉरिडोर का क्रियान्वयन हो या फिर चौतरफा बनते हाइवे हों,बुंदेलखंड में विकास तो जारी है लेकिन कहीं बेतरतीव और असंतुलन निर्मित न हो इसलिए क्षेत्रीय केंद्रीय कार्यालय जो विकास प्राधिकरण ही हो सकता है यह जरूरी है,कोई नेता न मिले तो किसी प्रशानिक अधिकारी के हवाले ही कर दिया जाए लेकिन बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण को पुनःजीवित किया जाना इस क्षेत्र के कल्याण के में सहायक होगा
त्राहिमाम मीडिया

30/04/2026

स्वक्षता में उच्च स्थान प्राप्त करने के निकट पहुंचा सागर,नागरिको का स्वानुशासन दिला सकता है बड़ी उपलब्धि

उमेश यादव "त्राहिमाम"

सागर/ कुछ अपवाद क्षेत्र छोड़ दिये जायें तो हम पाते है कि निगम सफाई कर्मी और कचरा वाहन सतत शहर का कचरा साफ करने और शिफ्ट करने का काम समर्पण के साथ करते है,शायद ही कुछ क्षेत्र या वार्ड ऐसे हों जहां कचरे और गंदगी से जनता परेशान हो लेकिन शायद ही ऐसा होता होगा कि जनता की शिकायत पर तुरंत एक्शन न लिया जाय,वर्तमान स्थिति में शहर की लगभग सभी गालियां और नालियां पक्की बनी हुई है,कचरा घर की जगह बड़े डस्टबिन स्थापित किये जाते रहे है जिनसे कचरा कलेक्शन होता है और शहर से दूर भेजा जाता है,यानी निगम प्रशासन और अमले ने हमें अनुकूल स्थितियां उपलब्ध कराई है कि हम अपने आस पास स्वक्षता बनाये रख सकते है लेकिन जब तक स्वानुशासन-सिविक सेंस नही होगा तब तक यूँ ही डस्टबीन टूटते रहेंगे और घर का कचरा नाली में या चौराहे पर हम फेंकते रहेंगे और फिर गंदगी का ठीकरा निगम के सिर पर फोड़ते रहेंगे,
इंदौर को स्वक्षता में नंबर 1 बनाये रखने मे वहां के प्रशासन की भूमिका से बड़ी भूमिका जनता की है,सभी नागरिक स्वानुशासन का पालन करते है,कचरे का निष्पादन तय और उचित माध्यम से करते है,प्रशासन आपको साधन और वातावरण उपलब्ध कराता है बाकी फिर आप जैसे होंगे वैसे रहेंगे और आपका घर-आंगन भी वैसा ही होगा,
बहरहाल अभी स्वक्षता सर्वेक्षण 2026 के लिए शहर तैयार हो रहा है,पिछली बार हमारा सागर शहर देश के 10 स्वक्ष शहरों की श्रेणी में शामिल था इस बार सब मिलकर प्रयास करें कि कम से कम टॉप 3 में तो हम स्थान बना ही सकें इसके लिए खुद स्वानुशासन का पालन करें और दूसरों को भी टोकें,हम यह तो कर ही सकते है,
निगमायुक्त राजकुमार खत्री भी इस दिशा में लगातार नवाचार कर रहे है,अभी कबाड़ से जुगाड़ का उनका प्रोजेक्ट सच मे कमाल कर रहा है,कई चौराहों पर कबाड़ से बनी कलाकृतियां दिखाई देती है जो संदेश देने के साथ ही सुंदरता में भी इजाफा कर रही है लेकिन अब बारी जनता की है,स्वक्षता सर्वेक्षण में शहरों की रैंकिंग हेतु सर्वे कार्य शुरू हो चुका है,ऑनलाइन लिंक fyad https://cf-sbmurban-org/ के माध्यम से नागरिकों के स्वच्छता फीडबैक लिए जा रहे हैं,आगामी समय में कभी भी सर्वे टीमें आ सकती हैं इसलिए निगमायुक्त खत्री ने नगर निगम के सभी अधिकारी,कर्मचारीयो से कहा है कि इस सर्वेक्षण प्रतिस्पर्धा को जीतने में अपना सर्वश्रेष्ठ दें,अपने-अपने कार्यक्षेत्र वार्डों के नागरिकों से सतत सम्पर्क करें और फीडबैक अवश्य करायें,प्रत्येक रहवासी का फीडबैक सागर को नंबर-1 बनाने में महत्वपूर्ण है,जिस तरह निगमायुक्त राजकुमार खत्री अपनी टीम से उम्मीद कर रहे है वैसे ही हम नागरिक भी उतनी ही जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभाये तो हमारे शहर को साफ शहर का उच्च दर्जा प्राप्त होना असंभव बिल्कुल नही है,"त्राहिमाम मीडिया"

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