JNCT Backbenchers
*जवानी का अंतिम छोर (दौर) *
तारीख 15 मई, दिन बुधवार, सन 2019।
स्थान -जेएनसीटी रीवा
1 साल पहले की बात-
सुबह की नई रोशनी, नई किरण और वो उम्मीदों से भरा नया सवेरा ( मानो ये सब कुछ दुबारा जिंदगी में नहीं मिल पायेगा)
सब लड़के /लडकियां एक कागज के पन्ने को लेकर मोहल्ले की गालियो से कई गज दूर अपने कालेज की गालियो की ओर चल दिये हैं।
सबके मन में एक ही बात चल रही है कि आज कुछ नहीं किया तो कभी नहीं कर पाउंगा/पाऊंगी।
हर रोज की तरह आज भी पहले पहुंच कर एक-दूसरे से नजरें मिलाने लगे हैं 😍
थोड़ी ही देर में सब अपनी क्लास की तरफ जाने लगे।
वो 32 पन्ने वाली कापी में कुछ भी गोद रहे थे आगे की डेस्क में बैठी लड़की को निहारते हुए हमारा ये सोचना काश् ये पल यहीं ठहर जाए। 😊
लिखते - लिखते जब अचानक से नजरें उठी तो जुल्फों को संवरती हुई वो कालेज की सबसे खूबसूरत मैडम का अंदर आती है और अंदर आकर सबको अपनी स्माइल से ही चुप करा देती है।
इस वक्त हम लडकों को हमारे कालेज के जेंटस फैकल्टी ही सबसे खराब लगते हैं। 😛 बगल की डेस्क में बैठी लड़की मुस्कुराकर सर से अपना काम निकल लेतीं हैं। 😜
वक्त बीतता गया और मैडम हवा के एक झोंके की तरह क्लास से निकल ली😜
उस तीन घंटों में बहानेबस कहीं पानी, कहीं पेन तो कहीं जबरदस्ती खाँसी का बहाना बना कर उसे अपनी ओर पलटाना ही सुझ रहा था। 😍😍🤗
जैसे तुफान से तेज भी वो तीन घंटे फुर्र से उड़ गए
हम बस वही उनकी ख्याबों (जुल्फों) में उलझे रह गए और
वो क्लास छोड़ कैटीन की तरफ निकल गए।
भारी भरकम भीड़ में हम बस उन्हें ही ढूंढते रह गए। 🥰
दिल उनसे कुछ कहना चाह रहा था पर वो तो इसी चहलपहल के बीच में खाली जगह से दूर फिर घूर रहे थे
उनके बार - बार घूरने से हमारा मन खुशी से झूम रहा था पर फिर वो पास आकर बोली वो "भैया आपके फ्रैंड का नम्बर मिल जाएगा? 😜😜🤔
और हम इंजीनियर हैं तो "हमारे यहाँ कपड़ो पर गुदवाने वाली रीति रिवाज होती है।😂
लेकिन ये रीति रिवाज सिर्फ नाम की है सच में दोस्त इतने कमीने हैं सारे कपड़ों को सीधे फाड़ ही देते हैं। 😜😜
अब बताओ भला जिसको पूरे चार साल सुंदरता का ढोंग दिखा रहे थे अब उसको नंगा बदन दिखाना पड़ रहा है। - कमीनेदोस्त😜
पुरा क्लास, हाल, कोरिडोर, गार्डन कैंटीन और पार्किंग घुम कर उनके पीछे-पीछे चल दिए। गार्ड को जल्दी घर जाना था इसलिए गार्ड ने गेट के बाहर कर दिया 😜 अब मई की तपती दोपहरी में कोई जल्दी घर जाने की जिद्द करे तो आप भी समझदार हैं। 💁♀️
और हम आज भी उससे कुछ नहीं बोल सके। #भैया 😂
खेलकूद कर सब अपने मोहल्ले की गलियों में घुस गए और कुछ कमीने दोस्त तो उसकी गलियों में भी गए थे 🙎♀️😜😜
इतिहास गवाह है मैं आज तक उसकी गली में नहीं गया बिकाज वहाँ कादव बहुत भरा पड़ा रहता है। 😜😜 IT'S HER LANGUAGE🙏😛
पर कुछ भी कहो इस अकेलेवाले पागलपन में कुछ और ही मजा होता है। ❤️❤️
बस उसी पल/दिन से हम बेघर हो गए और ये सब एक किस्से में तब्दील हो गया।
" फिर से वही ड्रेस पहन कर तेरी गालियों में घुमना चाहता हूँ।
रोज सुबह नई उम्मीदों के साथ तुम्हें देखना चाहता हूँ।।
रोज क्लास से कैटीन तक और कैटीन से क्लास तक दौड़ना चाहता हूँ।
और फिर से छूटी होने के बाद तुम्हें तमाम कोरिडोर में ढूंढना चाहता हूँ"।। ❤️💐😂
जिंदगी आसान नहीं है फिर यदि आप कोई इंजीनियर हो तो और ज्यादा। 😂
कुछ लोग इंजीनियर पर मीम और मजाक बनाते हैं
उन्हें बता दूं कि तुम्हें कोई इंजीनियर ही बनाता है to all engineers rewa
आखिर के दो शब्द -
दुनिया /समाज वाल वाले आपके बारे में क्या सोचते हैं? /क्या कहते हैं? इससे आपको नहीं पड़ना चाहिए (ये दुनिया और समाज वालों का काम है)
आप दुनिया /समाज के बारे में क्या कुछ सोचते हैं/ क्या कुछ बोलते हैं क्योंकि आपकी सोच एंव विचार ही आपका व्यक्तित्व तय करते हैं। 😘😘❤❤🙏🏻 🙏 and guys plz like and this page anf and invite your friends to like this page Dixit
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Contact the business
Telephone
Website
Address
Rewa
486446