Pramod Kumar Pandey

Pramod Kumar Pandey

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09/12/2025

"आस"
कब, कौन, कहाँ मिल जाए और हम उसे अपना सर्वस्व मान बैठें– यह कोई नहीं जानता। यह सब तो नियति द्वारा जन्म से पूर्व ही निर्धारित होता है। जन्म पश्चात तो नियति अपने लिखे लेखानुसार मनुष्य को मार्ग दिखाती है और उसे उस मार्ग पर अविरल चलने के लिए बाध्य करती है। अब उस मार्ग पर चलते हुए कितने सुख, कितने आनंद, कितने दुःख और संताप उसे मिलेगा; यह तो नियति ही जाने। मनुष्य तो मात्र कठपुतली है, जिसे नियति अपने हिसाब से नचाती है।
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💔 “आस” — एक अधूरी प्रतीक्षा, एक अनकही पीड़ा, एक सच्चा एहसास…**

कभी-कभी कोई कहानी सिर्फ कहानी नहीं होती—
वह दिल में बस जाने वाली आस, टूटने वाला विश्वास,
और जीवन भर साथ चलने वाली भावनाओं का आईना बन जाती है।

प्रमोद कुमार पाण्डेय जी की नई पुस्तक “आस”
उसी अनकही पीड़ा, संवेदना और रिश्तों की गहराई को शब्दों में पिरोकर
आपके दिल को छू लेने को तैयार है।

🌙 नेहरू पार्क की एकBench…
👣 पीछे छूटते कदम…
💔 और वहीं बैठी एक आस—
यह कहानी आपके भावनात्मक संसार को भीतर तक हिला देगी।

📚 Coming Soon
Under Kavya Publications

✨ यह पुस्तक उन सभी दिलों के नाम है,
जो कभी किसी का इंतजार करते रह गए…

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