Bijay Rajat Vlog
28/01/2026
एक आदमी ने एक बहुत ही खूबसूरत लड़की से शादी की। शादी के बाद दोनो की ज़िन्दगी बहुत प्यार से गुजर रही थी। वह उसे बहुत चाहता था और उसकी खूबसूरती की हमेशा तारीफ़ किया करता था। लेकिन कुछ महीनों के बाद लड़की चर्मरोग (skinDisease) से ग्रसित हो गई और धीरे-धीरे उसकी खूबसूरती जाने लगी। खुद को इस तरह देख उसके मन में डर समाने लगा कि यदि वह बदसूरत हो गई, तो उसका पति उससे नफ़रत करने लगेगा और वह उसकी नफ़रत बर्दाशत नहीं कर पाएगी।
इस बीच एकदिन पति को किसी काम से शहर से बाहर जाना पड़ा। काम ख़त्म कर जब वह घर वापस लौट रहा था, उसका accident हो गया। Accident में उसने अपनी दोनो आँखें खो दी। लेकिन इसके बावजूद भी उन दोनो की जिंदगी सामान्य तरीके से आगे बढ़ती रही। समय गुजरता रहा और अपने चर्मरोग के कारण लड़की ने अपनी खूबसूरती पूरी तरह गंवा दी। वह बदसूरत हो गई, लेकिन अंधे पति को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था। इसलिए इसका उनके खुशहाल विवाहित जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
वह उसे उसी तरह प्यार करता रहा। एकदिन उस लड़की की मौत हो गई। पति अब अकेला हो गया था। वह बहुत दु:खी था. वह उस शहर को छोड़कर जाना चाहता था।
उसने अंतिम संस्कार की सारी क्रियाविधि पूर्ण की और शहर छोड़कर जाने लगा. तभी एक आदमी ने पीछे से उसे पुकारा और पास आकर कहा, “अब तुम बिना सहारे के अकेले कैसे चल पाओगे? इतने साल तो तुम्हारी पत्नितुम्हारी मदद किया करती थी.” पति ने जवाब दिया, “दोस्त! मैं अंधा नहीं हूँ। मैं बस अंधा होने का नाटक कर रहा था। क्योंकि यदि मेरी पत्नि को पता चल जाता कि मैं उसकी बदसूरती देख सकता हूँ, तो यह उसे उसके रोग से ज्यादा दर्द देता।
इसलिए मैंने इतने साल अंधे होने का दिखावा किया. वह बहुत अच्छी पत्नि थी. मैं बस उसे खुश रखना चाहता था.” .. ...
सीख-- खुश रहने के लिए हमें भी एक दूसरे की कमियो के प्रति आखे बंद कर लेनी चाहिए.. और उन कमियो को नजरन्दाज कर देना चाहिए...
आप लोगों को यह कहानी कैसी लगी मित्रों जवाब जरूर दीजिएगा।
07/01/2026
एक तस्वीर ने रोक लिया था कदम**
मैं एक ग्लोबल आईटी कंसल्टिंग फर्म में काम कर रही थी। जॉब शुरू किए हुए अभी डेढ़ साल ही हुए थे। नई-नई नौकरी, बड़े सपने और खुद को साबित करने की ललक—सब कुछ एक साथ चल रहा था। उसी दौरान कंपनी का एक बड़ा इंटरनेशनल प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा हुआ। इस खुशी में शनिवार की रात शहर के एक लग्ज़री होटल में सेलिब्रेशन पार्टी रखी गई।
उस दिन मेरे टीम लीड आदित्य मल्होत्रा ने मुझे अपने केबिन में बुलाया।
“अनन्या,” उन्होंने मुसकराते हुए कहा,
“इस प्रोजेक्ट में तुम्हारा योगदान बहुत अहम रहा है। मैं चाहता हूं कि तुम पार्टी में ज़रूर आओ। वहां बोर्ड लेवल के कुछ लोग भी होंगे, तुम्हें उनसे मिलवाऊंगा। तुम्हारे करियर के लिए अच्छा रहेगा।”
“थैंक यू सर,” मैंने औपचारिक मुसकराहट के साथ जवाब दिया।
आदित्य—लंबा कद, आकर्षक व्यक्तित्व, सलीके से सजा हुआ। बोलने का ढंग इतना नरम कि सामने वाला सहज हो जाए। ऑफिस में चर्चा थी कि वे डायरेक्टर के सबसे भरोसेमंद आदमी हैं। नए क्लाइंट्स से डील कराने की जिम्मेदारी अक्सर उन्हीं को दी जाती थी।
मैंने लंच ब्रेक में अपनी एक सीनियर कलीग माया से पूछा,
“तुम पार्टी में आ रही हो न?”
वह हंसते हुए बोली,
“अरे, आदित्य बुला रहा हो और कोई मना कर दे? बड़ा चार्मिंग है। पता नहीं कितनी लड़कियां उस पर फिदा हैं।”
“वो शादीशुदा नहीं हैं?” मैंने हल्के से पूछा।
माया ने कंधे उचकाए,
“कहते हैं शादीशुदा हैं। पत्नी किसी और शहर में जॉब करती है। लेकिन यहां ऑफिस में तो उनका नाम अक्सर किसी न किसी के साथ जुड़ता रहता है। अब सच क्या है, कौन जाने।”
शनिवार की रात मैं पार्टी में पहुंची। कोई खास मेकअप नहीं, वही सादा अंदाज़—नेवी ब्लू फ्लोर-लेंथ ड्रेस। अंदर पहुंचते ही देखा, आदित्य कुछ लोगों के बीच खड़े बातें कर रहे थे।
मुझे देखते ही उन्होंने आगे बढ़कर कहा,
“यू लुक अमेज़िंग, अनन्या। कम, आई विल इंट्रोड्यूस यू।”
उन्होंने मुझे कंपनी के रीजनल डायरेक्टर से मिलवाया।
“यह हमारी टीम की सबसे मेहनती एनालिस्ट्स में से एक हैं,” उन्होंने कहा।
तारीफ सुनकर मैं थोड़ा झेंप गई।
डिनर और ड्रिंक्स का दौर शुरू हुआ। आदित्य ने मुझसे पूछा,
“व्हाट विल यू हैव?”
“सॉफ्ट ड्रिंक,” मैंने कहा।
वे मुसकराए,
“कम ऑन, जस्ट वन ड्रिंक। रिलैक्स करो।”
मेरे गिलास में हल्की बीयर आ गई। पहले कुछ घूंट, फिर आधा गिलास। माहौल, म्यूज़िक और बातचीत—सब कुछ धीरे-धीरे असर करने लगा।
डांस फ्लोर पर फास्ट बीट्स शुरू हो चुकी थीं। आदित्य ने मेरा हाथ थामा।
“लेट्स डांस।”
पहले दूरी थी, फिर उन्होंने मेरी कमर पर हाथ रखा। आंखों में आंखें डालकर बोले,
“मुझे स्लो मूवमेंट्स पसंद हैं। बात करने का मौका मिल जाता है।”
मैं चुप रही। उनकी नज़दीकी मुझे बेचैन भी कर रही थी और कहीं न कहीं अच्छी भी लग रही थी।
“तुम शादीशुदा तो नहीं हो?” उन्होंने पूछा।
“नहीं… लेकिन सगाई हो चुकी है। मेरा मंगेतर अभी कनाडा में है, प्रोजेक्ट पर।”
उन्होंने मेरे बाल कान के पीछे करते हुए कहा,
“गुड। लेकिन ये चेहरा छुपाने के लिए नहीं है।”
उनकी उंगलियां मेरे होंठों की तरफ बढ़ीं, और तभी मैंने खुद को अलग कर लिया।
उस रात के बाद करीब दो महीने तक हम ऑफिस में बिल्कुल प्रोफेशनल रहे।
फिर एक दिन आदित्य ने कहा,
“हमें एक क्लाइंट मीटिंग के लिए सिंगापुर जाना है। तुम भी चलोगी।”
मैंने मना करने की कोशिश की, लेकिन मैनेजमेंट का फैसला तय था।
सिंगापुर में एक हफ्ते का काम था, जो तय समय में पूरा नहीं हो पाया। स्टे तीन दिन और बढ़ गया। वीकेंड था।
क्लाइंट ने सुझाव दिया,
“यहां होटल में स्पा अच्छा है। चाहें तो सेंटोसा आइलैंड भी घूम सकते हैं।”
हम सेंटोसा गए। घूमने के बाद आदित्य बोले,
“तुम स्पा ले लो। बहुत रिलैक्सिंग होता है।”
स्पा में माहौल शांत था—हल्की खुशबू, धीमी रोशनी, सॉफ्ट म्यूज़िक। महिला थैरेपिस्ट ने मसाज शुरू की। धीरे-धीरे शरीर और मन दोनों ढीले पड़ते गए। मैं एक अजीब सी भावनात्मक और शारीरिक स्थिति में थी।
मसाज के बाद पार्टीशन हटा। सामने आदित्य भी थे—उसी हालत में।
थैरेपिस्ट मुसकराकर बोली,
“यू बोथ लुक… वेरी रिलैक्स्ड।”
होटल लौटते समय मुझे अजीब सी मदहोशी थी। आदित्य मुझे अपने कमरे तक ले आए। लाइट बंद थी। उनकी सांसें पास थीं। सब कुछ जैसे नियंत्रण से बाहर जा रहा था।
वे बाथरूम गए। तभी उनकी जैकेट से एक वॉलेट गिरा।
अनजाने में मैंने उठा लिया।
अंदर एक महिला और एक बच्चे की तस्वीर थी।
मैं सिहर गई।
वह महिला कोई और नहीं, बल्कि शालिनी दीदी थीं—मेरी कॉलेज सीनियर। वही, जिन्होंने कभी मेरी मदद की थी, जब मैं सबसे कमजोर थी।
मेरे अंदर कुछ टूट कर जुड़ गया। जैसे किसी ने मुझे गहरी नींद से जगा दिया हो।
आदित्य बाहर आए तो मैंने साफ कहा,
#ये @आपकी पत्नी हैं… और ये #मेरा @रिश्ता #हैं
वे कुछ कह पाते, उससे पहले मैं कमरे से बाहर निकल चुकी थी।
उस दिन मैं बच गई।
तीन दिन बाद हम भारत लौट आए। उसके बाद सब कुछ सामान्य रहा—सिर्फ काम।
कुछ समय बाद मैंने शालिनी दीदी को फोन किया। हालचाल पूछा। उन्होंने कहा कि जल्द ही वे उसी शहर में ट्रांसफर लेने वाली हैं।
फोन रखते हुए मुझे फिर वही एहसास हुआ—
अगर उस दिन वह तस्वीर न होती, तो शायद मैं किसी और की ज़िंदगी में ‘वो’ बन चुकी होती।
#हिन्दीकहानी
14/01/2025
प्रेम और संभोग एक दूसरे के पूरक है। दोनो एक दूसरे के बिना अधूरे हैं। दोनो जरूरी है।
जिंदगी में ऐसा कोई जोड़ा नही है जो जंदगी भर प्रेम करे संभोग न करे। न ही ऐसा कोई है जो जिंदगी भर संभोग करे प्रेम न करे। केवल एक से ही जिंदगी भर नही जिया जा सकता है।
जैसे प्रेम गलत नही है। वैसे संभोग भी गलत नही है। लोगो की सोचने का तरीका गलत है
प्रेम से ही संभोग है
संभोग से ही प्रेम है
इसलिए जमकर प्यार करें और जमकर संभोग करें।।
22/08/2024
एक पुरानी कहानीं
एक राजा को राज करते काफी समय हो गया था।उसके बाल भी सफ़ेद होने लगे थे।एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा और अपने मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया व अपने गुरुदेव को भी बुलाया। उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया।
राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दी, ताकि नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे भी उसे पुरस्कृत कर सकें। सारी रात नृत्य चलता रहा। ब्रह्म मुहूर्त की बेला आई, नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है और तबले वाले को सावधान करना ज़रूरी है, वरना राजा का क्या भरोसा दंड दे दे। तो उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक *दोहा* पढ़ा -..✍
*"घणी गई थोड़ी रही, या में पल पल जाय।*
*एक पलक के कारणे, युं ना कलंक लगाय।"*..✍
अब इस *दोहे* का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अर्थ निकाला।
तबले वाला सतर्क होकर तबला बजाने लगा। ..✍
जब यह दोहा गुरु जी ने सुना तो गुरुजी ने सारी मोहरें उस नर्तकी को अर्पण कर दी।..✍
दोहा सुनते ही राजकुमारी ने भी अपना नौलखा हार नर्तकी को भेंट कर दिया।..✍
दोहा सुनते ही राजा के युवराज ने भी अपना मुकुट उतारकर नर्तकी को समर्पित कर दिया ।
राजा बहुत ही अचम्भित हो गया।
सोचने लगा रात भर से नृत्य चल रहा है पर यह क्या! अचानक एक दोहे से सब अपनी मूल्यवान वस्तु बहुत ही ख़ुश हो कर नर्तकी को समर्पित कर रहें हैं ?
राजा सिंहासन से उठा और नर्तकी को बोला एक दोहे द्वारा एक सामान्य नर्तकी होकर तुमने सबको लूट लिया।..✍
जब यह बात राजा के गुरु ने सुनी तो गुरु के नेत्रों में आँसू आ गए और गुरुजी कहने लगे - "राजा ! इसको नीच नर्तकी मत कह, ये अब मेरी गुरु बन गयी है क्योंकि इसके दोहे ने मेरी आँखें खोल दी हैं। दोहे से यह कह रही है कि मैं सारी उम्र जंगलों में भक्ति करता रहा और आखिरी समय में नर्तकी का मुज़रा देखकर अपनी साधना नष्ट करने यहाँ चला आया हूँ, भाई ! मैं तो चला ।" यह कहकर गुरुजी तो अपना कमण्डल उठाकर जंगल की ओर चल पड़े।..✍
राजा की लड़की ने कहा - "पिता जी ! मैं जवान हो गयी हूँ। आप आँखें बन्द किए बैठे हैं, मेरा विवाह नहीं कर रहे थे। आज रात मैं आपके महावत के साथ भागकर अपना जीवन बर्बाद करने वाली थी। लेकिन इस नर्तकी के दोहे ने मुझे सुमति दी, कि जल्दबाज़ी न कर, हो सकता है तेरा विवाह कल हो जाए, क्यों अपने पिता को कलंकित करने पर तुली है ?..✍
युवराज ने कहा - महाराज ! आप वृद्ध हो चले हैं, फिर भी मुझे राज नहीं दे रहे थे। मैं आज रात ही आपके सिपाहियों से मिलकर आपको मारने वाला था। लेकिन इस दोहे ने समझाया कि पगले ! आज नहीं तो कल आखिर राज तो तुम्हें ही मिलना है, क्यों अपने पिता के खून का कलंक अपने सिर पर लेता है! थोड़ा धैर्य रख।"..✍
जब ये सब बातें राजा ने सुनी तो राजा को भी आत्म ज्ञान हो गया । राजा के मन में वैराग्य आ गया। राजा ने तुरन्त फैंसला लिया - "क्यों न मैं अभी युवराज का राजतिलक कर दूँ।" फिर क्या था, उसी समय राजा ने युवराज का राजतिलक किया और अपनी पुत्री को कहा - "पुत्री ! दरबार में एक से एक राजकुमार आये हुए हैं। तुम अपनी इच्छा से किसी भी राजकुमार के गले में वरमाला डालकर पति रुप में चुन सकती हो।" राजकुमारी ने ऐसा ही किया और राजा सब त्याग कर जंगल में गुरु की शरण में चला गया ।..✍
यह सब देखकर नर्तकी ने सोचा "मेरे एक दोहे से इतने लोग सुधर गए, लेकिन मैं क्यूँ नहीं सुधर पायी ?" उसी समय नर्तकी में भी वैराग्य आ गया । उसने उसी समय निर्णय लिया कि आज से मैं अपना नृत्य बन्द करती हूँ "हे प्रभु ! मेरे पापों से मुझे क्षमा करना। बस, आज से मैं सिर्फ तेरा नाम सुमिरन करूं।
07/08/2024
आमिर खान ने इसलिए हम आपके हैं कौन फिल्म में काम करने से मना कर दिया था क्योंकि उन्हें इसकी स्क्रिप्ट पसंद नहीं आ रही थी। आखिरकार सूरज बड़जात्या अपने पुराने हीरो सलमान खान के पास पहुंचे। उस दौर में वैसे भी सलमान खान का करियर बहुत अच्छा नहीं चल रहा था। सलमान को जब ये फिल्म ऑफर हुई तो उन्होंने फौरन ये फिल्म साइन कर ली। और ये तो हम सभी जानते हैं कि उसके बाद क्या हुआ। सलमान खान के करियर को हम आपके हैं कौन फिल्म ने फिर किन बुलंदियों पर पहुंचा दिया।
आज हम आपके हैं कौन फिल्म को रिलीज़ हुए 30 साल हो गए हैं। 05 अगस्त 1994 को इस फिल्म ने सिल्वर स्क्रीन पर दस्तक दी थी। और तूफान उठा दिया था। छह करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने लगभग 135 करोड़ रुपए का कारोबार किया। और ये ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म बन गई। चलिए, इस फिल्म से जुड़ी और कुछ रोचक बातें भी जानते हैं।
हम आपके हैं कौन वास्तव में 1982 में आई राजश्री प्रोडक्शन्स की ही नदिया के पार का शहरी वर्ज़न है। नदिया के पार का निर्देशन Govind Moonish ने किया था। और वो इसी कहानी को बड़े बजट के साथ उन्नत तकनीक से बनाएं। उन्होंने सूरज को इस फिल्म पर काम करने को कहा। कहा जाता है कि अपने पिता से मिले निर्देश के बाद सूरज बड़जात्या स्क्रीनप्ले लिखने में जुट गए। और 1 साल 9 महीने की मेहनत के बाद आखिरकार उन्होंने स्क्रीनप्ले लिख लिया। नाम रखा हम आपके हैं कौन।
इस फिल्म का म्यूज़िक भी इसकी सफलता की अहम कड़ी थी। फिल्म का संगीत तैयार किया था रामलक्ष्मण ने। रामलक्ष्मण ने ही सूरज बड़जात्या और सलमान की डेब्यू फिल्म 'मैंने प्यार किया' का संगीत भी तैयार किया था। फिल्म में कुल 14 गीत थे जिन्हें देव कोहली व रविंद्र रावल ने लिखा था। महान लता मंगेशकर जी ने इस फिल्म में 11 गीत गाए थे। दीदी तेरा देवर दीवाना गीत ने तो धूम ही मचा दी थी। इस गीत के लिए लता जी को कई अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया था। फिल्मफेयर ने लता जी को इस गीत के लिए फिल्मफेयर स्पेशल अवॉर्ड दिया था। आज भी ये गाना लोग सुनते हैं। कई लोग अपनी शादी के वीडियो में इस गीत को रखवाना पसंद करते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक ये गाना उस्ताद नुसरत फतेह अली खान के गाए एक गीत सारे नबियां से प्रेरित था।
देश में सिनेमाघरों को उन्नत बनाने का काम भी 'हम आपके हैं कौन' फिल्म ने किया था। दरअसल, सूरज बड़जात्या ने इस फिल्म को रिलीज़ करने के लिए बड़े शहरों में सिर्फ उन थिएटर्स को ही चुना जहां का साउंड सिस्टम बेस्ट माना जाता था। और जहां का विज़ुअल एक्सपीरियंस भी शानदार कहा जाता था। सूरज बड़जात्या के इस कदम ने अन्य सिनेमाघर मालिकों को भी अपने थिएटर को उन्नत करने के लिए पैसा खर्च करने को प्रेरित किया।
जब हिंदी भाषी दर्शकों में 'हम आपके हैं कौन' फिल्म का क्रेज़ चल रहा था तब राजश्री प्रोडक्शन्स ने इस फिल्म की कामयाबी को और भुनाने का प्रयास किया। फिल्म को तमिल में डब करके भी रिलीज़ किया गया था। और तमिल वर्ज़न को भी बढ़िया रेस्पॉन्स मिला था।
माधुरी दीक्षित की अदायगी और उनकी खूबसूरती ने 'हम आपके हैं कौन' देखने आए दर्शकों का दिल जीत लिया था। हालांकि इस बात से शायद बहुत कम लोग वाकिफ होंगे कि सूरज बड़जात्या इस फिल्म में पहले निकी अनेजा को कास्ट करना चाहते थे। लेकिन किन्हीं वजहों से निकी अनेजा से उनकी बात बन नहीं पाई। और ये फिल्म माधुरी दीीक्षित को मिल गई।
फिल्म में एक सीन है जिसमें अनुपम खेर शोले के वीरू और मौसी वाले सीन को रिक्रिएट करने की कोशिश करते हैं। अनुपम खेर जब ये सीन शूट कर रहे थे तब वो फेशियल पैरालाइसिस से जूझ रहे थे। उन्हें शूटिंग करने के लिए डॉक्टरों ने मना किया था। लेकिन इस फिल्म को वक्त पर रिलीज़ कराने के लिए अनुपम खेर ने बीमारी के बावजूद एक्टिंग जारी रखी।
कहा जाता है कि नेपाल में होने वाली शादियों में जूता चुराई की कोई रस्म नहीं मनाई जाती थी। लेकिन इस फिल्म का प्रभाव वहां के लोगों पर इतना ज़्यादा पड़ा कि वहां भी शादियों में जूता चुराई की रस्म शुरू हो गई। हम आपके हैं कौन फिल्म की काफी शूटिंग ऊटी में हुई थी।
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