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25/08/2022

कृत्रिम मानव भ्रूण तैयार करने की तैयारी में हैं इजरायल के वैज्ञानिक

1. अंग प्रत्यारोपण के लिए नया अंग उगाना है मकसद
2. चूहों पर किया प्रयोग सफल रहा है
3. डीएनए की मदद से विकसित होगा
4. सिर्फ अंग तैयार करने के लिए प्रयोग
राष्ट्रीय खबर
रांचीः इजरायल की एक बॉयोटेक फर्म अब इंसानी डीएनए की मदद से कृत्रिम भ्रूण तैयार करना चाहती है।
कंपनी की तरफ से साफ किया गया है कि इनका उपयोग दरअसल चिकित्सा शास्त्र में विधिसम्मत अंग प्रत्यारोपण के लिए किया जाएगा। इसके जरिए कृत्रिम मानव पैदा करने की कंपनी की कोई योजना नहीं है। चूहों के कृत्रिम भ्रूण तैयार करने में मिली सफलता के बाद अब इसे आजमाया जाने वाला है। इस कंपनी का नाम रिन्यूअल बॉयो है जो अपनी जेनेटिक तकनीक की विशेषज्ञता से उनलोगों को मदद पहुंचाना चाहती है जो किसी न किसी वजह से किसी आंतरिक अंग की खराबी की वजह से परेशान है। ऐसे अंगों को नये अंग से बदल देने के बाद ऐसे मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। वैसे किसी भी बाहरी अंग को इंसानी शरीर की आतंरिक व्यवस्था सहज स्वीकार नहीं करती। इसलिए उसके लिए अलग से व्यवस्था का जरूरत पड़ती है ताकि प्रत्यारोपित अंगों क इंसानी शरीर अस्वीकार ना कर दे।
वैसे कंपनी का यह एलान होते ही दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय में एक बहस छिड़ गयी है। अनेक वैज्ञानिक प्रयोगशाला में कृत्रिम इंसानी भ्रूण तैयार करने की इस योजना का विरोध कर रहे हैं और यह कह रहे हैं कि इसके सफल होने के बाद अगले चरण में लोग कृत्रिम इंसान भी बनाने की दिशा में काम कर सकते हैं। ऐसा प्रयोग न तो नैतिक होगा और न ही प्राकृतिक संरचना के अनुकूल होगा। इसके भीषण परिणाम भी हो सकते हैं। चूहों पर ऐसा प्रयोग सफल होने के बाद अब इजरायल की यह कंपनी इंसानी स्टेम सेल की मदद से इंसानी भ्रूण प्रयोगशाला में तैयार करने की बात कह रही है। इससे पहले वेइजमैन जेनेटिक्स विभाग के वैज्ञानिकों ने चूहों पर यह प्रयोग किया था। बिना किसी गर्भाशय के इन चूहों के भ्रूणों को प्रयोगशाला में तैयार किया गया था। जिसके लिए वहां गर्भाशय जैसा माहौल बनाकर स्टेम सेलों को विकसित किया गया था। यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहा। वैसे वैज्ञानिकों ने इन भ्रूणों से पूरा चूहा नहीं बनाया और बीच में ही यह प्रक्रिया रोक दी क्योंकि ऐसा पहले से ही तय था।
प्रयोग को बीच में ही छोड़ने के बाद भी इस शोध दल के प्रमुख जैकब हान्ना ने कहा कि चूहों के भ्रूणों में दिल धड़कने लगा था, खून का संचालन सही हो रहा था और दिमाग के विकास की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी थी। साथ ही इनमें आंत की श्रृंखला भी बनने लगी थी। अब चूहों पर यह प्रयोग सफल होने के बाद वैज्ञानिक इंसानी डीएनए पर भी यह जेनेटिक अनुसंधान करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भ्रूण ही सबसे कारगर अंग विकसित करने वाली मशीन और थ्री डी प्रिंटर भी है। रिन्युअब बॉयो ने कहा है कि पहले भी कई अनुसंधान इस दिशा में हो चुके हैं। एमआईटी के शोध दल ने पाया है कि ऐसे भ्रूण से जो रक्त कोष पैदा होता है वह कई बीमारियों का ईलाज भी कर सकता है। अभी दुनिया में बहुत तेजी से लोगों के उम्र दराज होने तथा जन्मदर की कमी के बाद ऐसा करना समय की मांग है। जो लोग अपने शरीर के आंतरिक अंगों की खराबी की वजह से परेशान है, उन्हें यह तकनीक नये इंसानी अंग देकर बेहतर जीवन प्रदान कर सकती है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमरी एमिराव ड्रोरी ने कहा कि हम दुनिया को डराना नहीं चाहते हैं। हम सिर्फ एक कोशिश कर रहे हैं, जो अगर सफल रहा तो आने वाले दिनों में मानवजाति को इससे फायदा ही होगा।

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