Kahi Pyar Na Ho Jaye

Kahi Pyar Na Ho Jaye

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03/11/2019

अब वही करने लगे दीदार से आगे की बात,
जो कभी कहते थे बस दीदार होना चाहिए।

26/07/2019

अपने ही ख़ून से इस तरह अदावत मत कर,
ज़िंदा रहना है तो साँसों से बग़ावत मत कर,

सीख ले पहले उजालों की हिफ़ाज़त करना,
शमा बुझ जाए तो आँधी से शिकायत मत कर,

सर की बाज़ार-ए-सियासत में नहीं है क़ीमत,
सर पे जब ताज नहीं है तो हुकूमत मत कर,

ख़्वाब हो जाम हो तारा हो कि महबूब का दिल,
टूटने वाली किसी शय से मोहब्बत मत कर,

देख फिर दस्त-ए-ज़रूरत में न बिक जाए ज़मीर,
ज़र के बदले में उसूलों की तिजारत मत कर,

पुर्सिश-ए-हाल से हो जाएँगे फिर ज़ख़्म हरे,
इस से बेहतर है यही मेरी अयादत मत कर,

सर झुकाने को ही सज्दा नहीं कहते #"$" #,
जिस में दिल भी न झुके ऐसी इबादत मत कर।

30/03/2016

KAHI PYAR NA HO JAYE

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