Gratitude
06/05/2023
अनुभव के अनुभूत की
सारी ये कहानी है
ना मेरी है, ना 'तेरी है
मैं भी कहा, ये मेरा है
05/05/2023
हे यशोधरा !
मात्र घर से निकलकर
कोई बुद्ध नहीं बनता
जब भीतर कोई ठौर ना रहे
पर चले यात्रा निरंतर
शब्द अकथ हो जाएँ
और करुणा आकंठ
तब जाने या रुकने का
कोई मोल नहीं रहता
तब नहीं बचता गुरुत्व ना अम्बर
सब आभासी हो जाता है
तब रात के दूजे पहर
भीतर कुछ जगता है
हे यशोधरा !
तुम्हें भान था हमेशा
मुझसे कई पहले से
तुम पा चुकी हो बोधिसत्व
ठीक संसार के मध्याह्न में भी
रीता रहा तुम्हारा मन
तुम्हें बुद्ध से पहले ही बोध था
कि मात्र घर से निकलना
बुद्ध होना नहीं है
कि एक वानप्रस्थ सदैव
भीतर नदी सा बहा है
19/04/2023
I LOOKED AT THE RISING AND ASKED...WHAT WOULD YOU TEACH ME? THE SUN SMILED AND SAID ...ALWAYS GENERATE MORE THAN ......... GOODMNG
पेंटिंग अनुष्का
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