Paramhans Narendra
निरंतर ध्यान करने से मनुष्य में सात्विक तत्वों की वृद्धि होने लगती है । परिणामस्वरूप काम, क्रोध, लोभ, घृणा, हिंसा, द्वेष, ईर्ष्या आदि के कुविचार निरंतर दूर होते रहते है । इससे आपका मन शांत और प्रसन्नचित बना रहता है ।ध्यान से संकल्प शक्ति मजबूत होती है तथा आत्मविश्वास बढ़ता है ध्यान, मस्तिष्क की तरंगों के स्वरुप को अल्फा स्तर पर ले आता है जिससे चिकित्सा की गति बढ़ जाती है। मस्तिष्क पहले से अधिक सुन्दर, नवीन और कोमल हो जाता है। ध्यान मस्तिष्क के आतंरिक रूप को स्वच्छ व पोषण प्रदान करता है। जब भी आप व्यग्र, अस्थिर और भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं तब ध्यान आपको शांत करता है। ध्यान के सतत अभ्यास से होने वाले लाभ निम्नलिखित हैं
व्यग्रता का कम होना
भावनात्मक स्थिरता में सुधा
र रचनात्मकता में वृद्धि
प्रसन्नता में संवृद्धि
सहज बोध का विकसित होना
मानसिक शांति एवं स्पष्टता
परेशानियों का छोटा होना
ध्यान मस्तिष्क को केन्द्रित करते हुए कुशाग्र बनाता है तथा विश्राम प्रदान करते हुए विस्तारित करता है। बिना विस्तारित हुए एक कुशाग्र बुद्धि क्रोध, तनाव व निराशा का कारण बनती है। एक विस्तारित चेतना बिना कुशाग्रता के अकर्मण्य/ अविकसित अवस्था की ओर बढ़ती है। कुशाग्र बुद्धि व विस्तारित चेतना का समन्वय पूर्णता लाता है। ध्यान आपको जागृत करता है कि आपकी आतंरिक मनोवृत्ति ही प्रसन्नता का निर्धारण करती है।
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The Science of Higher Yoga Paramahansa Narendra - Human body is a temple in which resides the Supreme Divine Light. God can be known by the medium of human body only.
14/12/2020
जन्म के बाद शिशु लगातार माता-पिता के साथ रहकर बोलना, खाना, पीना, खेलना, लिखना या अन्य गतिविधियां सम्पन्न करना सीखता है। छोटे बच्चे के लिए यह एक औपचारिक विद्यालय जैसा होता है। इसी तरह बच्चा जब थोड़ा बड़ा या युवा होता है तब वह घर में माता-पिता को एक दूसरे को सहयोग करते देखता है। पिता को घर के बाहर के कार्यों को निपटाते हुए माता का सहयोग करते देखकर बच्चों में मदद करने की भावना का निर्माण होता है। इससे बच्चे घर के कार्यों में माता की मदद करना सीखते हैं।
https://youtu.be/L5uVAvVIZLA
11/12/2020
भगवान शिव के दर्शन और साक्षात्कार कैसे करे । अपने सभी सवालो के जबाव कैसे पाऐ भगवान शिव से We are here to encourage youth for yoga and meditation. Now a day a lot of stress is being put on the Behavior of the employee in the organization. For many,...
03/12/2020
क्या आपका बच्चा भी पढ़ने में कमजोर है!!!!!
https://youtu.be/ccOYZF9VIqg
बच्चे का सबसे पहला विद्यालय उसका घर और सबसे पहले गुरु उसके माता-पिता होते हैं। शिशु शुरुआती अवस्था में अपने माता-पिता से ही सारी क्रियाएं सीखता है और अपना ज्ञान अर्जित करता है। माता-पिता न सिर्फ बच्चों को अच्छी शिक्षा देते हैं बल्कि सही-गलत की पहचान कराते हुए बच्चों का स्वर्णिम भविष्य बनाने का भी काम करते हैं। बच्चे माता-पिता का मार्गदर्शन पाकर सभी कठिनाईयों पर विजय पाते हुए अपने सपने को साकार करते हैं। दरअसल माता-पिता के व्यवहार और क्रियाओं का उनके बच्चों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। यदि घर में कुछ गलत होता है तो बच्चे गलत सीखते हैं। इसी तरह यदि घर का वातावरण सही होता है तो बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलती है।
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