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06/03/2026
होली… खुशियों का त्योहार।लेकिन दिल्ली के उत्तम नगर से आई एक खबर ने इस त्योहार को मातम में बदल दिया।
बताया जा रहा है कि एक 11 साल की बच्ची से गलती से पानी से भरा गुब्बारा नीचे गिर गया, जो गली से गुजर रही पड़ोस की एक मुस्लिम महिला पर जा गिरा।थोड़ी बहस हुई, लेकिन आसपास की महिलाओं ने तुरंत माफी मांग ली और मामला वहीं खत्म हो गया।
सबको लगा बात खत्म हो गई…
लेकिन रात करीब 11 बजे जब उस बच्ची का भाई तरुण अपने दोस्तों के साथ होली खेलकर घर लौट रहा था, तभी कुछ मुस्लिम युवकों ने उस पर हमला कर दिया।
एक छोटी-सी बात…और एक जवान जिंदगी खत्म।
इलाज के दौरान तरुण की मौत हो गई।
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि तरुण को किसने मारा।सवाल यह है कि हम किस तरह का समाज बना रहे हैं?
क्या अब त्योहारों की खुशियों की कीमतकिसी की जान होगी?
एक समय था जब हिंदू-मुस्लिम मिलकर होली खेलते थे,एक-दूसरे के घर जाते थे, गले मिलते थे।
लेकिन आज हालात ऐसे हो गए हैं किछोटी-सी बात भी खून-खराबे में बदल जाती है।
सच यह है किअपराधी चाहे किसी भी धर्म का हो — वह सिर्फ अपराधी होता है।
और अगर समाज अपराधियों के खिलाफ खड़ा नहीं होगा,तो अपराध और बढ़ेंगे।
मेरी मुस्लिम समाज से भी अपील है —अगर आपके बीच से कोई गलत करता है,तो उसका खुलकर विरोध कीजिए।
और यही अपील हिंदू समाज से भी है —क्योंकि नफरत का जवाब नफरत से नहीं,न्याय और इंसानियत से दिया जाता है।
याद रखिए —जब समाज चुप हो जाता है,तब अपराधी मजबूत हो जाते हैं।
आज जरूरत है कितरुण के लिए न्याय की आवाज उठे।
नफरत नहीं…इंसाफ चाहिए।
01/03/2026
धर्म का चश्मा उतारो…
ये लड़ाई मज़हब की नहीं — ज़मीर की है।
जब ताक़तवर हमला करे तो उसे “शांति मिशन” कहा जाता है,
और जब कोई सिर उठाकर खड़ा हो जाए तो उसे “खतरा” घोषित कर दिया जाता है।
दुनिया कब तक ये दोहरा खेल देखती रहेगी?
डील करने का रास्ता उनके पास भी था।
झुक जाने का विकल्प भी था।
हाथ मिला लेते… तो आज सुरक्षित होते।
लेकिन कुछ लोग ज़िंदा रहने से ज़्यादा
सिर ऊँचा रखने को अहमियत देते हैं।
ताक़त गोलियों से दिखाई जाती है,
मगर हिम्मत इतिहास में लिखी जाती है।
डर से साम्राज्य बनते हैं,
साहस से किरदार।
कुछ नाम सत्ता से चमकते हैं,
कुछ नाम कुर्बानी से अमर हो जाते हैं।
जो झुका नहीं…
जो डरा नहीं…
जो आख़िरी सांस तक अपने रुख़ पर अड़ा रहा —
उसे मिटाने वाले अक्सर भूल जाते हैं,
कि शहादत अंत नहीं… शुरुआत होती है।
इतिहास ताक़तवरों का नहीं,
डटकर खड़े रहने वालों का होता है।
🔥 याद रखो —
सिर झुकाने से उम्र बढ़ सकती है,
लेकिन सिर ऊँचा रखकर मरना…
पीढ़ियाँ जगा देता है।
27/02/2026
भारतीय टीम के बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता का निधन हो गया है,वो लंबे समय से लिवर के कैंसर से ग्रसित थे।
आज नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में उन्होंने अंतिम सांस ली।
मजदूरी करके उन्होंने अपने बेटे का क्रिकेट खेलने का सपना पूरा किया था।
ईश्वर से प्रार्थना करते है उन्हें अपने चरणों में स्थान दे।
ॐ शांति
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