INBOX INDIA
19/06/2026
"Bharat Tiwari case 🙏
शत्रुघ्न चौहान वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया (2014) के फैसले में कहा गया कि यदि मृत्यु-दंड प्राप्त कैदी फांसी से पहले गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित हो जाए और अपनी सजा को समझने में असमर्थ हो, तो ऐसी स्थिति में फांसी देना उचित नहीं है।
क्या बिहार पुलिस कानून नहीं जानती? जब मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को फांसी नहीं दी जा सकती, तो उसे गोली कैसे मारी जा सकती है? क्या बिहार पुलिस ने BNS 2023 (पूर्व IPC328) और संबंधित कानूनी प्रावधान नहीं पढ़े हैं? इसका क्या मतलब है? यह एनकाउंटर इस सरकार पर एक कलंक है। भरत तिवारी समाज के मुद्दे उठाता था, लेकिन उसे बिना सोचे-समझे 4-5 गोलियां मार दी गईं वह भी तब जब उसने आत्मसमर्पण कर दिया था" l
#शाहपुर #बिहार #भरततिवारी #एनकाउंटर
वीडियो देखिए और खुद फैसला कीजिए, क्या यह युवा पागल (मानसिक विक्षिप्त) है?
बिहार के भोजपुर जिले का शाहपुर प्रखंड। यहाँ का जमुनिया गाँव आज एक कड़वी हकीकत का गवाह है। हर साल मानसून आता है। अपने साथ भयंकर तबाही लाता है। गंगा नदी का रौद्र रूप हंसते-खेलते आशियाने निगल जाती है।एक आम परिवार जीवन भर कमाता है। खून-पसीना एक करता है। पाई-पाई जोड़कर पक्का मकान बनाता है। लेकिन गंगा का भयानक कटाव उसे चंद मिनटों में मलबे में बदल देता है। घर के साथ-साथ यादें बह जाती हैं। बचपन की उम्मीदें टूट जाती हैं। गोतिया-रिश्तेदारों के घर मिट्टी में तब्दील हो जाते हैं।
बहरा सिस्टम और इस त्रासदी के बीच एक युवक खड़ा है। वह पिछले बीस वर्षों से इस दर्द को करीब से देख रहा है। उसके मन में जायज आशंकाएं हैं। वह 'लोलैंड' और 'हाईलैंड' की बात करता है। उसे पता है कि मिट्टीकरण कहाँ जरूरी है। वह मानसून से पहले सुरक्षा की गुहार लगाता है। वह आपदा आने के बाद की खोखली तैयारियों पर सवाल उठाता है।लेकिन हमारी प्रशासनिक व्यवस्था का रवैया देखिए। जब वह युवक प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के पास जाता है, तो उसे कोरा जवाब मिलता है—"यह मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।" अधिकारी तकनीकी नियमों का हवाला देकर तुरंत पल्ला झाड़ लेते हैं। जिम्मेदारी से भागने का यह तरीका पुराना है।
जब एक आम नागरिक लड़ते-लड़ते थक जाता है, तो व्यवस्था एक क्रूर खेल खेलती है। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए उस जागरूक युवक को 'मानसिक रूप से विक्षिप्त' यानी पागल घोषित कर दिया जाता है। क्रुर प्रशासनिक व्यवस्था का यह दौर बेहद खतरनाक है। सच बोलने वाले की आवाज को पागलपन का शोर बताकर दबा दिया जाता है, ताकि समाज भी उससे दूरी बना ले और उसकी जायज मांगें दब जाएं।
बाढ़ और कटाव नियंत्रण के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये का भारी-भरकम बजट आता है। कागजों पर बड़ी-बड़ी योजनाएं बनती हैं। तटबंधों की मरम्मत दिखाई जाती है। लेकिन धरातल पर हकीकत शून्य है। यह पैसा कहाँ जाता है? भरत तिवारी इसी 'बंदरबांट' पर सीधा चोट करता है। बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों की साठगांठ इस देश के नागरिक की जान और माल की कीमत पर फल-फूल रही है।
क्या हर बार गाँव के डूबने का इंतजार किया जाएगा? क्या आपदा आने के बाद ही सरकार की नींद खुलेगी?
जमुनिया गाँव का यह युवक कोई विक्षिप्त इंसान नहीं है। वह इस सड़ चुकी प्रशासनिक व्यवस्था का आईना है।
जब एक आम नागरिक लड़ते-लड़ते थक जाता है, तो उसकी मानसिक स्थिति चरमरा जाती है। इसी गुस्से और व्यवस्था की बेरुखी ने उसे एक बड़ी गलती करने पर मजबूर कर दिया। उसने प्रशासन के सामने बंदूक लहराई, उसने कानून को अपने हाथ में लिया।यह कदम बिल्कुल गलत था। सभ्य समाज में कानून को अपने हाथ में लेने या हथियार लहराने का समर्थन कोई नहीं कर सकता। यह उसकी एक बड़ी भूल थी, जिसकी वैधानिक सजा उसे निश्चित तौर पर मिलनी चाहिए थी।
लेकिन यहाँ सवाल न्याय की तय प्रक्रिया का है।क्या 'एनकाउंटर' ही अंतिम समाधान है?उसकी यह गलती इतनी बड़ी भी नहीं थी कि उसकी जीवनलीला ही समाप्त कर दी जाए। प्रशासन जिसे आज 'एनकाउंटर' का नाम दे रहा है, वह न्याय की स्थापित व्यवस्था के बजाय तंत्र की क्रूरता की गवाही देता है। अगर एक त्रस्त और लाचार नागरिक हताशा में रास्ता भटक जाए, तो क्या राज्य का तंत्र उसे गिरफ्तार कर कानून के दायरे में सजा देने के बजाय सीधे मौत के घाट उतार देगा?अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए पहले उस युवक की जायज मांगों को 'मानसिक रूप से विक्षिप्तता' का नाम दिया गया, और फिर मुठभेड़ की इस घटना ने उसकी आवाज को हमेशा के लिए शांत कर दिया। यह मुठभेड़ महज एक अपराधी की मौत नहीं, बल्कि एक आम नागरिक की न्याय व्यवस्था से बची-खुची उम्मीदों का अंत है।
अगर आज हम उसकी आवाज के साथ नहीं खड़े हुए, तो कल हमारा आशियाना भी इस बहरे सिस्टम की भेंट चढ़ जाएगा।
विडियो:- अनूप नारायण सिंह के वाल से साभार।।।।
#भरततिवारी #एनकाउंटर #बिहार #पुलिस
#शाहपुर
Mithilesh Kumar Tiwari Tejashwi Yadav
Amrendra Kumar Pandey Anup Kumar Srivastava Aditya Narayan Pandey
18/06/2026
"लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव पर गंभीर आरोप: पटना के फ्लैट में जबरन घुसने और धमकी देने की पुलिस से शिकायत"
"कथित बेटी से मिलने से रोकने पर अपहरण की धमकी!
Tej Pratap Yadav का पक्ष आना बाकी......
13/06/2026
जाति नहीं, पूरे समाज के सर्वमान्य नेता थे स्व. बृज बिहारी प्रसाद!
आज बिहार के कद्दावर नेता और पूर्व विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री स्व. बृज बिहारी प्रसाद जी की पुण्यतिथि है। उन्हें सिर्फ एक नेता के रूप में याद करना उनके विराट व्यक्तित्व को छोटा करना होगा। वह एक ऐसी राजनीतिक शख्सियत थे जिन्होंने कभी भी राजनीति को जातिवाद के चश्मे से नहीं देखा।
उनका जीवन शोषितों, वंचितों और समाज के हर तबके के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित था। उन्होंने हमेशा विकास, शिक्षा और सामाजिक समरसता को प्राथमिकता दी। उनका असमय चले जाना बिहार की राजनीति और पूरे समाज के लिए एक ऐसी क्षति है, जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता।
आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उनके विचार, उनकी निडरता और समाज के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।बृज बिहारी बाबू, आप हमारे विचारों और यादों में हमेशा अमर रहेंगे! 💐✨ #पुण्यतिथि #श्रद्धांजलि #बिहार_राजनीति #इनबॉक्स_इंडिया #पुण्यतिथि
13/06/2026
क्या आप बिना इंटरनेट, मोबाइल और बिजली के जीने की कल्पना कर सकते हैं?
आज जब हमारी सुबह फेसबुक नोटिफिकेशन और ईमेल्स देखकर होती है, वहीं हमारे ही देश में एक ऐसा अनोखा गांव भी है जो 21वीं सदी में रहकर भी 18वीं सदी का जीवन जी रहा है!
यह कोई मजबूरी नहीं, बल्कि उनका अपना फैसला है।
हम बात कर रहे हैं आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित 'कुर्मा ग्रामम' (Kurma Gramam) की। इसे एक 'वैदिक विलेज' के रूप में जाना जाता है, जहाँ का जीवन आज के आधुनिक समय में बिलकुल अविश्वसनीय और हैरान कर देने वाला है।
इस अनोखे गांव की पूरी कहानी नीचे दी गई रिपोर्ट में पढ़ें 👇🌾 'सादा जीवन, उच्च विचार' का साक्षात उदाहरण लगभग 60-70 एकड़ में फैले इस गांव में करीब 14-17 परिवार रहते हैं। इनमें से कई लोग तो इंफोसिस और विप्रो जैसी बड़ी टेक कंपनियों में इंजीनियर की नौकरियां छोड़कर यहाँ बसे हैं! इतना ही नहीं, इस जीवनशैली से प्रभावित होकर रूस, अर्जेंटीना और इटली जैसे देशों के विदेशी नागरिक भी यहां स्थायी रूप से आकर बस चुके हैं।
आधुनिक सुविधाओं पर पूर्ण प्रतिबंध:-
नो गैजेट्स, नो नेटवर्क: गांव में मोबाइल फोन, इंटरनेट, टीवी या कंप्यूटर जैसी कोई चीज नहीं है। पूरी कम्युनिटी के लिए बाहरी दुनिया से जुड़ने के लिए सिर्फ एक लैंडलाइन फोन है।
बिना बिजली के घर: यहां के लोगों का मानना है कि बिजली आने से जीवन मशीनी हो जाएगा। इसलिए वे आज भी बिना बिजली के रहते हैं। उनका दिन सूरज उगने के साथ (सुबह 3:30 - 4:30 बजे) शुरू होता है और सूरज ढलने के बाद समाप्त हो जाता है।
मिट्टी और चूने के मकान: यहां सीमेंट या लोहे का इस्तेमाल नहीं किया जाता। सभी घर पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी, चूने और बांस से बने हैं।
आत्मनिर्भरता की मिसाल खुद उगाते हैं अनाज:
यहां के लोग पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं। वे केमिकल-फ्री सब्जियां और अनाज खुद उगाते हैं।
लकड़ी के चूल्हे पर खाना: खाना बनाने के लिए एलपीजी (LPG) गैस का नहीं, बल्कि सूखी लकड़ियों और गोबर के उपलों का इस्तेमाल किया जाता है।
कपड़े और बर्तन: ये लोग अपने कपड़े खुद बुनते और सिलते हैं, साथ ही दैनिक उपयोग के बर्तन भी खुद बनाते हैं।
कुएं का पानी: पीने और रोजमर्रा के काम के लिए पानी सीधे कुएं से खींचा जाता है।
अनोखी शिक्षा प्रणाली:
यहां बच्चों के लिए आधुनिक और महंगे स्कूलों की जगह गुरुकुल शिक्षा प्रणाली है, जहां वैदिक शास्त्रों के साथ-साथ विज्ञान भी सिखाया जाता है। यह शिक्षा बिल्कुल मुफ्त है।
दिलचस्प बात यह है कि यहां लेनदेन के लिए पैसे से ज्यादा 'बाटर सिस्टम' (सामान के बदले सामान) का उपयोग होता है।
भगवान राज राजेश्वर श्री कृष्ण के आदर्शों पर आधारित जीवन:
यह पूरा गांव भगवान श्री कृष्ण की भक्ति और वैदिक वर्णाश्रम के सिद्धांतों पर चलता है। लोगों का मानना है कि भौतिक सुख-सुविधाओं को छोड़कर ही आत्मा को शांति और परमात्मा को पाया जा सकता है।आज जहां दुनिया मानसिक तनाव और डिप्रेशन से जूझ रही है, वहीं कुर्मा गांव के लोग प्रकृति के करीब रहकर एक बेहद सुखी और संतुष्ट जीवन बिता रहे हैं।
इसे देखकर यह सोचना लाजिमी है कि असली प्रगति किसमें है—आधुनिक मशीनों में या इस असीम मानसिक शांति में?आप इस अनोखी जीवनशैली के बारे में क्या सोचते हैं? क्या आप बिना फोन और इंटरनेट के एक दिन भी रह सकते हैं? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं!💬 #अजूबा
12/06/2026
दशकों पहले सआदत हसन मंटो ने समाज की सबसे बड़ी बीमारी पर चोट की थी, जो आज भी बिल्कुल सच साबित हो रही है। जब कलम बिकती है, तो पूरी व्यवस्था दम तोड़ देती है।
"कोठे की तवायफ़ और एक बिका हुआ पत्रकार दोनों एक ही श्रेणी में आते हैं, लेकिन इनमें तवायफ़ की इज़्ज़त ज़्यादा होती है।" — सआदत हसन मंटो
📍 क्यों बड़ी है यह बात?तवायफ़ अपनी मजबूरी में नृत्य या सौदा करती है, लेकिन एक बिकाऊ पत्रकार देश, समाज और जनता के भरोसे का कत्ल करता है।
कलम की ताकत समाज को जगाने के लिए है, खुद को बेचने के लिए नहीं। मंटो के इस विचार पर आपकी क्या राय है?
#सआदतहसनमंटो #मंटो #पत्रकारिता #कड़वासच #साहित्य #माफीवीर #क्रांतिवीर_नहीं_दलालीवीर
11/06/2026
उल्लू को आमतौर पर बर्बादी या सूनेपन का प्रतीक माना जाता है।
कहते हैं कि किसी अच्छे-भले बसते हुए बगीचे (देश या समाज) को उजाड़ने के लिए सिर्फ एक अयोग्य या गलत सोच वाला व्यक्ति ही काफी होता है। जब किसी परिवार या समाज में हर स्तर पर खराबी आ जाए जब परिवार या समाज में निर्णय लेने वाला व्यक्ति ही कोई अयोग्य या भ्रष्ट हो, तो उस पूरे समाज का भविष्य (अंजाम) क्या होगा?
#माफीवीर
11/06/2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित नेता का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 4,399 से अधिक दिनों का यह कार्यकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ा विमर्श लेकर आया है। जहां एक वर्ग इसे अभूतपूर्व प्रगति का काल मानता है, वहीं दूसरा वर्ग इस दौरान उपजी गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा करता है।आइए इस सफर के दोनों पहलुओं पर नजर डालें:
बेहतर क्या?
वैश्विक साख: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रभाव बढ़ा।
डिजिटल क्रांति: यूपीआई और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का व्यापक विस्तार।
कल्याणकारी योजनाएं: करोड़ों गरीबों तक सीधे राशन और वित्तीय मदद।
राष्ट्रीय सुरक्षा: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और कड़ा रुख।
आलोचनात्मक पक्ष (चुनौतियां और चिंताएं):-
आर्थिक चुनौतियां: बेरोजगारी की ऊंची दर और बढ़ती महंगाई।
संस्थागत दबाव: केंद्रीय एजेंसियों के कथित राजनीतिक दुरुपयोग के आरोप।
सामाजिक ध्रुवीकरण: समाज में वैचारिक मतभेद और तनाव बढ़ने की चिंताएं।
सत्त्ता का केंद्रीकरण: लोकतांत्रिक विमर्श और विपक्ष की आवाजों को दबाने की आलोचना।
यह रिकॉर्ड कार्यकाल भारत की विकास यात्रा और उसकी लोकतांत्रिक परिपक्वता दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण विश्लेषण का विषय है।
इस ऐतिहासिक सफर पर आपकी क्या व्यक्तिगत राय है? नीचे कमेंट्स में मर्यादित चर्चा करें। 👇
Click here to claim your Sponsored Listing.
Contact the business
Telephone
Website
Address
Patna
800001