Jashn-e- zindagi
16/06/2024
पितृ दिवस पर मेरी आज रचित कविता
कवि : गौरव
www.thekavijee.in
गम छुपा हंस पाना मुमकिन नहीं है
मानना हर फरमाईश मुमकिन नहीं है
अपने सपने होम करना किसी के वास्ते
ये संभव बस पिता से, और से मुमकिन नहीं है
कैसे बताऊँ कि शब्दों में समेटना मुमकिन नहीं है
सुख के सागर हैं पिता,वो हो तो दुःख मुमकिन नहीं है
प्रथम पूज्य हो पाए गणेश तो बस इस वास्ते
पिता को माना दुनियाँ, तो दुनियाँ ना जीते ये मुमकिन नहीं है
पिता का क़र्ज़ चुका पाना मुमकिन नहीं है
पिता के दुःख से बड़ा दुःख मुमकिन नहीं है
उस ईश्वर को भी सब कहते हैं परम पिता
मान लो पिता को परम तो हो कुछ नामुमकिन मुमकिन नहीं है
Happy Father’s Day
TheKaviJee Let's Think Better
10/06/2023
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22/01/2023
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04/12/2022
कवि : गौरव
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