Ajay Raj Modi
28/06/2026
देश का पहला प्रधानमंत्री नेहरू को यदि अपने देश और हिन्दू समुदाय के हितों का ध्यान रहता,तो मुस्लिम और ईसाई को धार्मिक शिक्षा के लिए खूली छूट वो भी कानूनन नहीं देता। पर वो स्वयं स्वीकार किया है कि मैं accidental hindu हुं,तो भला उसे हिन्दू धर्म संस्कृति से कैसी लगाव और यही सिलसिला इंदिरा गांधी,राजिव गांधी और अभी के बुद्धिमान महाधिराज राहुल भी वही रवैया अपनाए हुए है।
लेकिन हिन्दू समुदाय 75 वर्षों से उसी परिवार और कांग्रेस के तलवे चाटने में लगा हुआ है। कांग्रेस के ही सरकार में 2004-13 में NGO और फर्जीवाड़ा कंपनी का धंधा ऊंचाई पर था और इन्हीं के माध्यम से विदेशी फंडिंग का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है हिन्दू का धर्मांतरण करने में । ईसाई मिशनरी चर्च और स्कूल, कालेज Xavier's , Francis के नाम पर खोल कर और मुस्लिम मदरसा, मस्जिद बनाकर दोनों हिन्दू धर्म को मिटाने पर लगा हुआ है।
कांग्रेस ने तो इतनी लचीला कानून FCRA बनाया,जिसके जरिए ईसाई मिशनरी विदेशी फंडिंग का भरपूर उपयोग कर सके और एजेंडा भी सेट कर रखा है धर्मांतरण का।
दशकों तक, कुछ विदेशी फंड वाली NGOs को आराम की छूट मिली हुई थी। "आस्था की रक्षा", "धार्मिक शिक्षा", या आम "सामाजिक सेवा" की आड़ में, इनमें से कई समूह चुपचाप, अच्छे-खासे फंड वाले ईसाई धर्मांतरण रैकेट चलाते थे।
लेकिन अब मोदी जी की सरकार ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम( FCRA) फ्रेमवर्क में कई बड़े बदलाव करके वो दरवाज़ा बंद कर दिया है।
संशोधित नियमों में धर्मांतरण को अब धार्मिक और धर्मार्थ श्रेणियों से साफ तौर पर हटा दिया गया है।
सीधे शब्दों में, संगठन अब शिक्षा या चैरिटी के नाम पर विदेशी दान नहीं ले सकते और उन पैसों का इस्तेमाल धर्मांतरण के लिए नहीं कर सकते।
NGOs को अब अपने अंतिम विदेशी डोनर बताने होंगे - लेयर वाली संस्थाओं के पीछे छुपना बंद।
सोशल मीडिया फुटप्रिंट की सख्त, लगातार निगरानी होगी।
संस्थाओं के अहम पदों पर विदेशी नागरिकों की संख्या पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है।
फील्ड वेरिफिकेशन से ये पक्का होगा कि पैसा उसी काम में खर्च हो रहा है जिसका कागज पर वादा किया गया था।
निष्क्रिय संगठनों के लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिए जाएंगे।
अगर विदेशी पैसा भारत आता है, तो वो पारदर्शी, जवाबदेह होना चाहिए और उसी काम में खर्च होना चाहिए जो घोषित किया गया था। धुंधली छतरी के नीचे काम करके अलग एजेंडा चलाने के दिन खत्म।
भारत का FCRA कानून लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय लॉबिंग और आलोचना का निशाना रहा है, और ये कदम राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा हेतु अनिवार्य है ।
हाल ही में अमेरिकी मार्को रुबियो कोलकाता जाकर मदर टेरेसा की मिशनरीज ऑफ चैरिटी से मिले थे ताकि वो उनके और उनके धर्मांतरण एजेंडे के साथ एकजुटता दिखाएं। G7 समिट के अगले ही दिन राजदूत सर्जियो गोर गृहमंत्री अमित शाह से मिलने दौड़े चले आए।
2014 में एन डी ए के सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार ने करीब 45,000 बड़े NGOs और 2,00,000 छोटी संस्थाओं पर शिकंजा कसा है जो धर्मांतरण और अन्य संदिग्ध गतिविधियों में लगी थीं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल, ग्रीनपीस जैसे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय NGOs, जो भारत में अपना हानिकारक एजेंडा चला रहे थे, भारत में उनके पर कतरे जा चुके हैं।
भारत सरकार कल्याण और मानवीय सहायता के लिए विदेशी फंडिंग का स्वागत करता है, लेकिन धर्मांतरण या अपारदर्शी प्रभाव संचालन के बैकडोर के रूप में इसका इस्तेमाल नहीं हो सकता है ।
यही कारण है कि अमेरिका सरकार में खलबली मची हुई है,और उसका एजेंट सोरेस गैंग भारत में मोदी विरोधी अभियानों में जूटे हुए हैं।
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