Vinay Kumar
17/03/2025
*अनूप कुमार चांद के चित्र*
’’चांदनी सी रात
सजनिया कैसे घर आऊं
ढ़ोला..................................’’
जब शास्त्रीय संगीत के सुपरिचित घराना सीकर घराने के गायक और सारंगीवादक उस्ताद सुल्तान खान उपर्युक्त गायन और सारंगीवादन करते हैं तो चांदनी रात की विलासिता, प्रेम, विरह और बेचैनी जीवंत हो जाती है। गायन के इसी एब्स्ट्रैंक्शन को कैनवस पर हम मूर्त होते देखते हैं, देश के महत्वपूर्ण चित्रकार अनूप कुमार चांद के कैनवस पर। अनूप चांद से लगातार साक्षात्कार होता रहा है। ’’मून लाइट नाइट नाम’’ से उनके नवीन चित्रों की श्रृंखला आज से जहांगीर आर्ट गैलेरी में प्रदर्शित है।
चांदनी रात प्रारंभ से ही कवियों, कलाकारों, संगीतकारों-गीतकारों को आकर्षित करता रहा है। सिनेमा के कुछ गीतों को देखिए;
’’सुहानी चांदनी रातें, हमें सोने नहीं देती’’
या फिर
’’चांदनी रात में,
एक बार तुझे देखा है
खुद पे इतराते हुए
खुद पे शर्माते हुए.....
न सोने की बेेचैनी, चांदनी रात में प्रियतम को देखने की इच्छा, खुद पर इतराना, खुद पर शर्माना या घर वापसी की इच्छाएं, अनूप चांद के कैनवस पर सांकेतिक रूप से और लालित्यपूर्ण ढ़ंग से अभिव्यक्त होती रही हैं। अनूप चांद मूलतः उड़ीसा के बालासोर जिले के एक गांव भोगराय के रहने वाले हैं। परिवार से मिली सांस्कृतिक विरासत उन्हें अपने पारम्परिक कलाओं से गहरे सम्पृक्त रखा।
यूं भी लोक और पारम्परिक कलांए अपने रंगों और फार्म के कारण सदैव आकर्षित करते रहे हैं। फिर समकालीन कला से एनकाउंटर ने अनूप को अपनी कला-शैली विकसित करने में मदद की है। यह कहना बेमानी नहीं है कि अधिकतर समकालीन कलाकार की जड़ें उनकी परम्परागत कलाओं से प्रभावित रही हैं या उनके सृजन के उत्स परम्पराएं रही हैं।
अनूप ने ’’मूनलाइट नाइट’’ श्रृंखला को बिम्ब और प्रतीकों के सहारे चित्रित किया है। बाघ सदैव से शक्ति और सत्ता का प्रतीक रहा है पर अनूप का बाघ तो कवि केदारनाथ सिंह की लम्बी कविता ’’बाघ’’ के कुम्हार के आंखों में बसा बाघ है। जिसकी खोज में निकले हैं कवि केदारनाथ सिंह और त्रिलोचन।
बाघ का वह मन, जो प्रेम से सिक्त है, विरह में बेचैन है, जो स्नेह में पिघल रहा हैए अनूप ने देखा और कैनवस पर उन्होंने बाघ का एक कन्ट्रास्ट भी सृजित किया। कथा अंधेरे की है, पर साथ में चांदनी भी फैली है तो कठोरतम वस्तु के भीतर का मर्म भी कैनवस पर दृष्टिगोचर होता है।
बाघ के साथ तितलिया, हाथी, चिड़िया, बकरी, हिरण, वृक्ष, उल्लू सभी चांदनी रात्रि में एक परस्पर संवादी और कन्ट्रास्ट कथाएं कहती हैं। अनूप अपने फैंटेसी युक्त नैरेटिव पेंटिंग्स के लिए जाने जाते हैं।
उनके चित्रों का संसार काफी वृहत है। जो कहीं न कहीं में मिथकीय कथाओं, पात्रों, फ्लोरा और फौना से प्रभावित रहा है। अनूप के चित्रों में दरअसल संवेदनशीलता की ललित्यपूर्ण अभिव्यक्ति है। मृग, बच्चे, बकरी को लेकर श्रृंखलावद्ध सृजन किया है तो वहीं उन्हें महात्मा गांधी, बुद्ध और महावीर भी आकर्षित करते हैं और उनके सृजनात्मक कर्म का हिस्सा भी बनते रहे हैं।
अनूप के चित्रों के विविधताएं हैं। विषयवस्तु की विविधता से लेकर रंग, स्पेस और ट्रीटमेंट की विविधता मौजूद है।
अनूप चांद के चित्रों से गुजरना कला-अरण्य से गुजरने जैसा है, जो न आपकों मोहित करता है, बल्कि सम्मोहित भी करता है।
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Contact the establishment
Website
Address
Patna