Khan Advisor
16/12/2025
✅ अल्लाह तआला हमारी और आपकी इबादतों को क़बूल फ़रमाए। (आमीन)
16/12/2025
🕋 मस्जिदे-ए-आयशा (तन्ईम) से नफ़्ली उमराह करने का आसान तरीक़ा 🕌
*HAJJ 2026*
*मस्जिद-ए-आयशा से नफ़्ल उमरा करने का तरीका*
1) मक्का अज़ीज़िया की बिल्डिंग के कमरे में इत्मीनान से ग़ुस्ल करके पाक-साफ़ हो जाएँ। ग़ुस्ल के बाद मर्द हज़रत एहराम की दो चादरें कमरे में पहन लें और औरतें अपना रोज़ाना पहना जाने वाला कपड़ा पहन लें। फिर टैक्सी या बस के ज़रिए मस्जिद-ए-आयशा जाएँ। मस्जिद-ए-आयशा में मर्द हज़रत सर ढककर अपनी जगह पर और औरतें अपनी जगह पर खड़े होकर दो रकअत एहराम की नफ़्ल नमाज़ पढ़ें। पहली रकअत में सूरह फ़ातिहा के बाद “क़ुल या अय्युहलकाफ़िरून” और दूसरी रकअत में सूरह फ़ातिहा के बाद “क़ुल हुवल्लाहु अहद” पढ़ें।
2) मस्जिद-ए-आयशा पहुँचना: मक्का से टैक्सी या बस से लगभग $7-8$ किलोमीटर दूर स्थित मस्जिद-ए-आयशा (तन्ईम) जाएँ। मस्जिद-ए-आयशा में दो रकअत नफ़्ल नमाज़ पढ़ने के बाद मर्द हज़रत अपना सर खोल दें (नंगा कर लें) और औरतें सर ढका हुआ ही रखें। फिर तुरंत उमरा की नीयत करें और मर्द बुलंद आवाज़ में तथा औरतें धीमी आवाज़ में तीन बार तलबिया पढ़ें — “लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक”।
3) उसके बाद मस्जिद-ए-आयशा से बाहर निकलकर टैक्सी या बस से हरम शरीफ़ जाएँ और रास्ते भर कसरत के साथ तलबिया पढ़ते रहें और ज़बान से कहें:
"اللَّهُمَّ إِنِّي أُرِيدُ الْعُمْرَةَ، فَيَسِّرْهَا لِي وَتَقَبَّلْهَا مِنِّي" (अल्लाहुम्मा इन्नी उरीदुल उमरा, फ़-यस्सिरहा ली व तक़ब्बलहा मिन्नी।)
4) हरम शरीफ़ पहुँचकर सर झुका कर दाहिना पैर रखकर मस्जिद में दाख़िल हों, मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ और एतकाफ़ की दुआ पढ़ें। काबा शरीफ़ के पास पहुँचकर सर उठाकर काबा के सामने खड़े हों और थोड़ी देर अल्लाह से रो-रोकर दुआएँ माँगें। अब तलबिया पढ़ना बंद कर दें। हजर-ए-असवद (काले पत्थर) के सामने पहुँचकर छाती और चेहरा करके खड़े हों और उमरा वाले तवाफ़ की नीयत करें। तवाफ़ का पहला चक्कर हजर-ए-असवद से शुरू करें। चक्कर शुरू करने से पहले हजर-ए-असवद की तरफ़ दोनों हाथ उठाकर “बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर” कहें और बोसा (चूमना) या इशारा (इस्तिलाम) करें। इसी तरह तवाफ़ के 7 चक्करों में 8 बार बोसा/इस्तिलाम करना है।
5) तवाफ़ के 7 चक्करों में मर्द हज़रत दाहिना कंधा खुला रखें और तवाफ़ पूरा होने के बाद कंधा ढक लें। पहले 3 चक्करों में मर्द हज़रत रमल करें यानी छोटे-छोटे क़दम रखते हुए सीना तानकर अकड़कर चलें। रुक्ने-यमानी से लेकर हजर-ए-असवद तक की दूरी में यह दुआ ज़रूर पढ़ें —
“रब्बना आतिना फ़िद्दुनिया हसनतन वा फिल-आख़िरति हसनतन वक़िना अज़ाबन्नार।”
6) तवाफ़ के 7 चक्कर पूरे होने के बाद दो रकअत वाजिबुत्तवाफ़ नमाज़ मक़ाम-ए-इब्राहीम के पीछे पढ़ें, अगर मौका न मिले तो हरम शरीफ़ में कहीं भी पढ़ सकते हैं (मगर मकरूह वक़्त में नहीं)। इसके बाद ज़मज़म का पानी क़िबला रुख होकर खड़े-खड़े दुआ पढ़कर पिएँ। फिर मुल्तज़म (काबा का दरवाज़ा और हजर-ए-असवद के बीच का हिस्सा) के सामने खड़े होकर अच्छी तरह दुआ करें। इसके बाद हजर-ए-असवद का 9वाँ इस्तिलाम करें।
7) इसके बाद सई के लिए सफ़ा-मरवा की बिल्डिंग में जाएँ और 7 चक्कर पूरे करें। सफ़ा की पहाड़ी पर पहुँचकर सई की नीयत करें और पहला चक्कर सफ़ा से शुरू कर मरवा पर ख़त्म करें। दूसरा चक्कर मरवा से शुरू कर सफ़ा पर ख़त्म करें। हर चक्कर में सफ़ा और मरवा की ऊँचाई पर क़िबला रुख होकर खड़े होकर कुछ देर दुआ करें। इसी तरह 7 चक्कर पूरे करें। हरियाली वाली लाइटों के बीच मर्द हज़रत तेज़ चलें और औरतें सामान्य रफ़्तार से चलें।
8) सई पूरी होने के बाद मर्द हज़रत सिर मुँडवाएँ (हल्क़) या छोटे बाल कटवाएँ (कसर) और औरतें चोटी के बाल से लगभग एक पोर या एक इंच से थोड़ा ज़्यादा काट लें। इसके बाद एहराम खोल दें।
👉 इस तरह मस्जिद-ए-आयशा से जितने चाहें उतने नफ़्ल उमरा किए जा सकते हैं।
14/09/2024
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