Divinity gyansang
29/03/2023
*"सम्राट अशोक" की जन्म-जयंती हमारे देश में क्यों नहीं मनाई जाती ??*
बहुत सोचने पर भी, "उत्तर" नहीं मिलता! आप भी इन "प्रश्नों" पर विचार करें!🤔🤔
*सम्राट अशोक*
*पिताजी का नाम - बिन्दुसार गुप्त*
*माताजी का नाम - सुभद्राणी*
जिस "सम्राट" के नाम के साथ संसारभर के इतिहासकार “महान” शब्द लगाते हैं
जिस -"सम्राट" का राज चिन्ह "अशोक चक्र" भारतीय अपने ध्वज में लगाते है l
जिस "सम्राट" का राज चिन्ह "चारमुखी शेर" को भारतीय "राष्ट्रीय प्रतीक" मानकर सरकार चलाते हैं l और "सत्यमेव जयते" को अपनाया है l
जिस देश में सेना का सबसे बड़ा युद्ध सम्मान, सम्राट अशोक के नाम पर, "अशोक चक्र" दिया जाता है l
जिस सम्राट से पहले या बाद में कभी कोई ऐसा राजा या सम्राट नहीं हुआ"...जिसने "अखंड भारत" (आज का नेपाल, बांग्लादेश, पूरा भारत, पाकिस्तान, और अफगानिस्तान) जितने बड़े भूभाग पर एक-छत्र राज किया हो l
सम्राट अशोक के ही, समय में "२३ विश्वविद्यालयों" की स्थापना की गई l जिसमें तक्षशिला, नालन्दा, विक्रमशिला, कंधार, आदि विश्वविद्यालय प्रमुख थे l इन्हीं विश्वविद्यालयों में विदेश से छात्र उच्च शिक्षा पाने भारत आया करते थे।
जिस -"सम्राट" के शासन काल को विश्व के बुद्धिजीवी और इतिहासकार, भारतीय इतिहास का सबसे "स्वर्णिम काल" मानते हैं।
जिस "सम्राट" के शासन काल में भारत "विश्व गुरु" था l "सोने की चिड़िया" था l जनता खुशहाल और भेदभाव-रहित थी l
जिस सम्राट के शासन काल में, सबसे प्रख्यात महामार्ग "ग्रेड ट्रंक रोड" जैसे कई हाईवे बने l २,००० किलोमीटर लंबी पूरी "सडक" पर दोनों ओर पेड़ लगाये गए l "सरायें" बनायीं गईं..l
मानव तो मानव..,पशुओं के लिए भी, प्रथम बार "चिकित्सा घर" (हॉस्पिटल) खोले गए l पशुओं को मारना बंद करा दिया गया l
ऐसे *"महान सम्राट अशोक"* जिनकी जयंती उनके अपने देश भारत में क्यों नहीं मनायी जाती ?? न ही कोई छुट्टी घोषित की गई है?
दुख: है कि, जिन नागरिकों को ये जयंती मनानी चाहिए...वो अपना इतिहास ही भुला बैठे हैं, और जो जानते हैं, वो ना जाने क्यों मनाना नहीं चाहते??
*"जो जीता वही चंद्रगुप्त"* ना होकर, *"जो जीता वही सिकन्दर"* कैसे हो गया??
जबकि ये बात सभी जानते हैं, कि सिकन्दर की सेना ने चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रभाव को देखते हुए ही लड़ने से मना कर दिया था। बहुत ही बुरी तरह से मनोबल टूट गया था और सिकंदर को "वापस लौटना" पड़ा था।
*आइए हम सब मिलकर इस "ऐतिहासिक भूल" को सुधार करने की शपथ लें।🙏🏻*
*कम से कम पांच ग्रुप मैं जरूर भेजे*
*कुछ लोग नही भेजेंगे*
*लेकिन मुझे यकीन है आप जरूर भेजेंगे*👍🏻
🙏🏻🙏🏻
Jai shri krishna
27/07/2021
"भंडारा...."
तीन दोस्त भंडारे मे भोजन कर रहे थे कि-
*उनमें से पहला बोला....* काश....हम भी ऐसे भंडारा कर पाते .....
*दूसरा बोला....* हां यार ....सैलरी आने से पहले जाने के रास्ते बनाकर आती हैं ...
*तीसरा बोला....* खर्चे इतने सारे होते है तो कहा से करें भंडारा ....
पास बैठे एक *महात्मा* भी भंडारे का आनंद ले रहे थे वो उन दोस्तों की बाते सुन रहे थे; महात्मा उन तीनों से बोले....बेटा भंडारा करने के लिए धन नहीं केवल अच्छे मन की जरूरत होती है ....
वह तीनो आश्चर्यचकित होकर महात्मा की ओर देखने लगे ....
महात्मा ने सभी की उत्सुकता को देखकर हंसते हुए कहा बच्चों .....बिस्कुट का पैकेट लो और उन्हें चीटियों के स्थान पर बारीक बनाकर उनके खाने के लिए रख दो देखना अनेकों चीटियां उन्हें खुश होकर खाएगी
*हो गया भंडारा .....*
गेहूं बाजरा (अनाज) के दाने लाओ उसे बिखेर दो चिडिया कबूतर आकर खाऐंगे ...
*हो गया भंडारा ...*
थोड़ा टाइट गुदा आटा घर से लाओ और किसी तालाब में हाथ से गोली बना का कर मछलियों को डालो
*हो गया भंडारा....*
तो आप कब कर रहे है। भंडारा
ईश्वर ने सभी के लिए अन्न का प्रबंध किया है ये जो तुम और मैं यहां बैठकर पूड़ी सब्जी का आनंद ले रहे है ना इस अन्न पर ईश्वर ने हमारा नाम लिखा हुआ है...
हम भी जीव जन्तुओं के लिए उनके नाम के भोजन का प्रबंध करने के लिए जो भी करोगे वो भी उस ऊपरवाले की इच्छाओं से होगा ....यही तो है भंडारा ...
जाने कौन कहा से आ रहा है या कोई कही जा रहा है किसी को पता भी नहीं होता कि किसको कहाँ से क्या मिलेगा ....सब उसी की माया है .....
*ऐसे अच्छे दान पुण्य के काम करते रहिए, अपार प्रसन्नता मिलती रहेगी।
27/06/2021
🌻🌻फूटा घड़ा 🌻🌻
बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में एक किसान रहता था . वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था . इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था , जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था .
उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था ,और दूसरा एक दम सही था . इस वजह से रोज़ घर पहुँचते -पहुचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था .ऐसा दो सालों से चल रहा था .
सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है , वहीँ दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पंहुचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है . फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया , उसने किसान से कहा , “ मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ ?”
“क्यों ? “ , किसान ने पूछा , “ तुम किस बात से शर्मिंदा हो ?”
“शायद आप नहीं जानते पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ , और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था बस उसका आधा ही पहुंचा पाया हूँ , मेरे अन्दर ये बहुत बड़ी कमी है , और इस वजह से आपकी मेहनत बर्वाद होती रही है .”, फूटे घड़े ने दुखी होते हुए कहा.
किसान को घड़े की बात सुनकर थोडा दुःख हुआ और वह बोला , “ कोई बात नहीं , मैं चाहता हूँ कि आज लौटते वक़्त तुम रास्ते में पड़ने वाले सुन्दर फूलों को देखो .”
घड़े ने वैसा ही किया , वह रास्ते भर सुन्दर फूलों को देखता आया , ऐसा करने से उसकी उदासी कुछ दूर हुई पर घर पहुँचते – पहुँचते फिर उसके अन्दर से आधा पानी गिर चुका था, वो मायूस हो गया और किसान से क्षमा मांगने लगा .
किसान बोला ,” शायद तुमने ध्यान नहीं दिया पूरे रास्ते में जितने भी फूल थे वो बस तुम्हारी तरफ ही थे , सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था . ऐसा इसलिए क्योंकि मैं हमेशा से तुम्हारे अन्दर की कमी को जानता था , और मैंने उसका लाभ उठाया . मैंने तुम्हारे तरफ वाले रास्ते पर रंग -बिरंगे फूलों के बीज बो दिए थे , तुम रोज़ थोडा-थोडा कर के उन्हें सींचते रहे और पूरे रास्ते को इतना खूबसूरत बना दिया . आज तुम्हारी वजह से ही मैं इन फूलों को भगवान को अर्पित कर पाता हूँ और अपना घर सुन्दर बना पाता हूँ . तुम्ही सोचो अगर तुम जैसे हो वैसे नहीं होते तो भला क्या मैं ये सब कुछ कर पाता ?”
दोस्तों हम सभी के अन्दर कोई ना कोई कमी होती है , पर यही कमियां हमें अनोखा बनाती हैं . उस किसान की तरह हमें भी हर किसी को वो जैसा है वैसे ही स्वीकारना चाहिए और उसकी अच्छाई की तरफ ध्यान देना चाहिए, और जब हम ऐसा करेंगे तब “फूटा घड़ा” भी “अच्छे घड़े” से मूल्यवान हो जायेगा.
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