Divya vats
06/05/2026
It's official now we are a Teenager ❤️
13 साल… साथ के, समझ के, care और प्यार के।
आज जब पीछे मुड़कर देखते हैं, तो लगता है जैसे हमारा रिश्ता भी अब एक “Teenager” बन गया है।
शुरुआत में ये रिश्ता एक छोटे बच्चे की तरह था—
नया, नाज़ुक, attention और time मांगने वाला।
हर छोटी बात में excitement, हर पल में नई खुशी।
धीरे-धीरे ये बड़ा हुआ…
सीखा adjust करना, समझना, कभी-कभी रूठना और फिर खुद ही मान जाना।
आपस के झगड़े बढ़ते जा रहे, हर "10 min में आ रहा हूं" सिर्फ डायलॉग लगने लगा है क्योंकी ये 10 मिन कभी पूरा होता ही नहीं 😃अपनी अपनी जिम्मेवारियों में पिसते जा रहे हैं। फिर भी एक सुकून है कि साथ हैं तो हर तूफ़ान को आंख दिखा सकते हैं।
"बच्चा है पर सच्चा है" वाली फीलिंग अटकी हुई है।
Proud भी है और fear भी, ये सोच सोच कर कि मेरा पति अब भी "सिर्फ मेरा" नहीं बन पाया😞 ( सौतन साथ में है और वो भी first priority पर😉)
सब्जी हो या राशन, लाने में भी मुझे घसीट कर ले जाने वाला इंसान बस मेरी सौतन के आगे मुझे दरकिनार कर देता है 😐
घूमा फिरा के बात कहना हो या समझाना इस पति नामक प्राणी के समझ के ऊपरी फ्लोर से निकल जाता है।
और,
जब Point to Point बात हो तो मुंह बना लेना इस प्राणी की पहचान होती है ।
जैसे एक teenager अपनी identity ढूंढता है,
वैसे ही हमारे रिश्ते ने भी अपनी गहराई और maturity पाने के लिए उत्साहित है।
लेकिन, इसके साथ अब और ज्यादा supervision की जरूरत लगती है मुझे।
अब इसमें सिर्फ प्यार नहीं,
बल्कि respect, patience और एक सुकून भरा companionship है।
13 साल बाद, हम सिर्फ साथ नहीं हैं…
हम एक-दूसरे की आदत बन चुके हैं,
एक ऐसी presence जो बिना कहे भी सब समझ लेती है।
Happy 13 years to us 💖
Our relationship is growing… evolving… and beautifully alive, just like a Teenager
05/07/2025
मैं नारी हूं
अविरल प्रवाह...
न थमने वाली, न झुकने वाली
चट्टानों सी स्थिरता लिए
हर मोड़ पर
पगडंडी से फिसलकर
फिर खुद को संभालती हूं।
मैं वो रहगुज़र हूं
जिसने सफर चुना है
यूँ ही नहीं,
मंज़िल की एक जुनूनी चाह है।
मैं महत्वाकांक्षी हूं
हां!
अपने सपनों को
सिर्फ़ देखती नहीं,
उन्हें जीती हूं।
मैं नारी हूं—
संघर्ष में भी सौंदर्य हूं
और संकल्प में भी शक्ति।
#मेरी_कविता
दिव्या वत्स
12/06/2025
भारतीय समाज में हम स्त्री को देवी तुल्य मानते आए हैं — त्याग, ममता, करुणा और प्रेम की प्रतिमूर्ति। लेकिन हाल के कुछ मामलों में जो विचलित कर देने वाली घटनाएँ सामने आई हैं — जैसे शादी के बाद प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या — वह न केवल सामाजिक मूल्यों पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करते हैं कि हम परवरिश में क्या और कहां चूक कर रहे हैं।
एक अभिभावक की ज़िम्मेदारी, मॉरल वैल्यूज की शिक्षा, और लड़कियों की परवरिश में संतुलन पर आधारित है:
👨👩👧 "बेटी बचाओ" से आगे बढ़कर अब वक्त है "बेटी को समझाओ" का
"संस्कारों से ही समाज बनता है, और परवरिश से ही इंसान।"
हमने बेटियों को आज़ादी दी — जो ज़रूरी थी।
हमने उन्हें आगे बढ़ना सिखाया — जो गर्व की बात थी।
पर शायद हम भूल गए कि संवेदनशीलता, नैतिकता और ज़िम्मेदारी की शिक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है।
🎯 हाल की घटनाएँ — जहाँ शादी के बाद लड़कियाँ अपने प्रेमी से मिलकर निर्दोष पतियों की हत्या करवा रही हैं, एक गंभीर चेतावनी हैं।
➡ ये सिर्फ अपराध नहीं हैं — ये परवरिश की असफलता की चीखती हुई मिसालें हैं।
➡ ये दर्शाती हैं कि सिर्फ पढ़ाई या करियर नहीं, मूल्य और चरित्र निर्माण भी ज़रूरी है।
🔸 एक बेटी को यह समझाना ज़रूरी है कि:
स्वतंत्रता का अर्थ अविवेक नहीं होता।
संबंधों में विश्वास और ईमानदारी का मूल्य सबसे ऊपर होता है।
शादी सिर्फ एक सामाजिक समझौता नहीं, एक मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी है।
🕉 भारतीय संस्कृति में विवाह "संयोग" नहीं, "संस्कार" है।
🙏 एक स्त्री को "पत्नी" बनने का अर्थ सिखाना, उसे "सामाजिक भूमिका की गरिमा" समझाना, अब पहले से कहीं अधिक ज़रूरी हो गया है।
📌 अभिभावकों के लिए सुझाव:
1. बेटियों को सिर्फ "करियर" नहीं, "चरित्र" सिखाएँ।
2. भावनाओं को डिजिटल दुनिया की तात्कालिकता से बचाएँ।
3. रिश्तों की गहराई, निष्ठा और परिपक्वता के बारे में बात करें।
4. बेटियों से खुलकर संवाद करें — उनके मन को समझें, सिर्फ उनके सपनों को नहीं।
5. उन्हें ये सिखाएँ कि प्यार, संयम और आत्मानुशासन आधुनिकता के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसकी नींव हैं।
🌸 बेटी देवी बनती है, अगर उसे सींचा जाए मूल्यों से।
🌑 वरना वही शक्ति, विनाश का कारण भी बन सकती है।
#दिव्य_ज्ञान
#दिव्यावत्स
#परवरिशपरविचार
#बेटीकोसंस्कार
30/12/2024
साल बीत गया चलते चलते
शुरू से अंत तक
न जाने क्यों नुकसान बहुत हो गए
अपनी भावनाओं को, अपनी संवेदनाओं का।
हर साल यूं ही जनवरी में नया होता है
दिसंबर आकर पुराना........
यही कहानी है यही जवानी है।
कुछ अच्छा भी हुआ, कुछ नया शुरुआत भी हुआ,
बस अंत भी कुछेक चाहतों का हुआ।
साल का बदलना या कैलेंडर का बदलना तो एक उम्मीद है कि
आप अपने आप को प्रेरित करें आगे बढ़ने के लिए
ठीक उसी तरह से जैसे,
सुबह के बाद शाम होती है और
रात के बाद दिन......
बढ़ना तो हर हाल में ही है।
जीवन संघर्षों का होमवर्क है और
इसे समझना, पूरा करना हर उस इम्तिहान का रिजल्ट है।
आगे बढ़ना जरूरी है........ बढ़ो और खूब आगे बढ़ो।
अपने जज्बातों को बह जाने दो, पुराने जायेंगे तो नए बनेंगे।
है न बदलाव ?
दिव्या वत्स
#दिव्य_ज्ञान
#2024 दिसंबर
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