Jago Pyare Jago

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27/08/2017

पहले ही तय थी हिंसा..महिलाओ ने निभाई अहम् भूमिका..प्रशासन ने भी दिया साथ..
25 अगस्त को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को केवल साध्वी रपे केस में दोषी करार दिया गया था..जिसके बाद बाबा के गुंडों ने जो भयानक हिंसा की उससे 31 निर्दोष काल के गाल में समां गए..लेकिन सवाल ये उठता है की, जब प्रशासन को ये आदेश दे दिए गए थे की कोई भी समर्थक पंचकुला न पहुचे..भीड़ इकट्ठी न हो..तो भी इतनी भयानक हिंसा कैसे हो गई.तो आपको बता दे की इस हादसे की तैयारी तो पहले ही की जा चुकी थी..जिसमे प्रशासन ने भी अहम् भूमिका निभाई थी..उन्होंने जानबूझ कर हाई कोर्ट को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भ्रम में रखा..लेकिन अगर इस हिंसा में सबसे बड़ी भूमिका किसी ने निभाई तो वो बाबा की समर्थक महिलाये..जिनके कारन ही पुलिस को हिंसा को बीच में ही छोड़ कर भागना पड़ा.. पुलिस को अंदाजा भी नहीं था की महिलाये इस बात के लिए पहले ही तैयार थी की अगर पुलिस के कार्रवाई करने या जबरन उठाने पर उन्हें आगे होकर मोर्चा संभालना है, जबकि समर्थक उनके पीछे रहेंगे.. उन्हें चिल्लाते हुए सड़कों पर लेटने और हंगामा करने के आदेश थे ..24 अगस्त को ही डेरा प्रेमियों ने पंचकूला को हिंसा में झोंकने के लिए केमिकल, प्लास्टिक बोतलों में डीजल-पेट्रोल और देसी कट्टे इकठ्ठा कर लिया था..इस हिंसा के बाद हरियाणा सरकार निशाने पर आ चुकी है..सरकार अपना बचाव करने के लिए नयी नयी दलीले भी दे रही है..लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है की अगर सरकार चाहती तो हिंसा टाल सकती थी..लेकिन सरकार ने ऐसा नही किया..तो क्या सच में केवल अपने राजनैतिक फायदों के लिए 31 मासूम लोगों की बलि चढ़ाई गई..

22/08/2017

हाँ / नहीं

21/08/2017

विरासत की जंग— न राजा रहा..और न विरासत
भाजपा के एकाधिकार के आगे बाकी सभी पार्टिया इतनी ज्यादा बौनी हो चुकी है, की अपनी बची खुची विरासत बचाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है..अभी हाल ही में बिहार में नितीश कुमार ने जिस तरह से महागठबंधन तोड़ कर भाजपा का दामन थामा..उसने बाकी विपक्षी पार्टियों की नींव तक हिला कर रख दी है..jdu के वरिष्ठ नेता शरद यादव पूरी तरह से अलग थलग हो चुके है..देश की करीब सभी बड़ी पार्टिया..कांग्रेस ,सपा ,rjd ,बसपा समेत 10 पार्टियों के नेताओ ने सांझी विरासत को बचाने के लिए एकजुट हुए..और सब ने अपने अपने तरीके से सरकार और pm मोदी पर निशाना साधा..अब सवाल ये उठता है की कुछ वक्त पहले तक rjd के मुखिया लालू प्रसाद यादव भी 2019 लोकसभा चुनावो में pm मोदी को टक्कर देने की बात कर रहे थे..लेकिन जब उन पर मुसीबत आई तो किसी ने अपनी छत भी नहीं दी ..अब ऐसे में शरद यादव का क्या हाल होगा..और कौन होगा अलग थलग..ये तो वक्त ही बताएगा..आपको क्या लगता है,अपने विचार जरुर दे..

21/08/2017

जवाब जरूर दें....

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