Atul Kushwah
09/04/2026
अक्षरम में कवि सम्मेलन की कुछ तस्वीरें, हिसार में गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स और प्रोफेसर्स के बीच कविताओं की एक ख़ूबसूरत शाम... विनीत भैया का शानदार संचालन, विनोद भाई साहब, अभिसार भाई, सूर्या भाई, मोहिनी जी के साथ मेरा भी काव्यपाठ... आनंद की रस वर्षा... 🙏❤️
04/04/2025
एबटाबाद की वादियों में जन्म, दिल्ली के कैंपों में मां की पुकार, पिता की हथेली पर रखी गई वो कसम… और फिर लहरों में बहते 'आंसू'
- ये कोई फिल्म नहीं, बल्कि उस अभिनेता की असल ज़िंदगी की स्क्रिप्ट थी, जिसने पर्दे पर 'भारत' बनकर करोड़ों के दिलों में जगह बनाई.
हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी कैसे मनोज कुमार बने और फिर कैसे बन गए ‘भारत कुमार’, इसकी शुरुआत एक शरणार्थी बच्चे की आंखों में बसे आंसुओं से हुई थी.
वो बच्चा जो बचपन को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानता था, जो कहता था- 'जिसका बचपन मर गया, वो आदमी मर गया.'
जिसने दो महीने के भाई को खोया और खुद उम्र भर डूबता रहा उस दर्द में. जिसने दंगे देखे, विस्थापन झेला, मां-बाप की बेबसी देखी, और उसी स्याह स्याही से अपने किरदारों में रोशनी की लकीरें खींच दीं.
ये कहानी सिर्फ एक अभिनेता की नहीं, बल्कि उस पूरे दौर की है, जब देश बंटा था, परिवार बिखरे थे और एक पीढ़ी का बचपन दंगों की चीखों में दम तोड़ रहा था. लेकिन इन्हीं चीखों के बीच से उठी थी एक आवाज़ - जो सिनेमा के ज़रिए भारत के जज़्बात को ज़िंदा रखने चला था.
वो मनोज कुमार थे... जो सिर्फ अभिनेता नहीं, एक दौर की पहचान बन गए....
- लिंक कमेंट बॉक्स में...
#मनोजकुमार #भारतकुमार #दिलसेभारत
02/04/2025
ग़ज़ल पर आपकी राय का मुन्तज़िर रहूंगा...😍 बहुत-बहुत शुक्रिया भाई अक्षय श्रीवास्तव जी 😊🙏
08/03/2025
Mahila Diwas Shayari: मैं इस दुनिया को अब पहले से बेहतर देख सकती हूं...
Mahila Diwas Shayari: मैं इस दुनिया को अब पहले से बेहतर देख सकती हूं... आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हम मशहूर शायरात के बेहतरीन शेर लेकर आए है. ये अशआर सिर्फ अल्फाज़ नहीं, बल्कि महिलाओ.....
'सज़ा से तुम नहीं डरना मेरा दिल कैदखाना है
मुहब्बत इश्क़ का मुजरिम यहां सारा ज़माना है...' (अतुल)
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