TellCrime
01/07/2026
तभी एक बूढ़ी औरत उसके पास आई
जिसकी चप्पलें पूरी तरह से टूटी हुई थीं और बहुत ही ज्यादा पुरानी थी। वो मोची के पास आई और बोली, बेटा, क्या तुम मेरी चप्पलें ठीक कर दोगे?" मोची ने कहा, "हां अम्मा,लाओ चप्पलें मुझे दे दो, मैं अभी ठीक कर देता हूं।" इस पर बुढ़िया बोली, बेटा तुम इसकी मरम्मत कर दोगे लेकिन मेरे पास तुम्हें देने के लिए पैसे नहीं हैं। इस पर मोची कहता है। कोई बात नहीं अम्मा। आपने मुझे बेटा कहा है। क्या बेटे भी कभी किसी काम के लिए मां से पैसे लेते हैं। लाओ अपनी चप्पलें मुझे दे दो। मैं इनकी मरम्मत कर दूंगा। तुम्हें पैसों की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
बुढ़िया ने अपनी चप्पलें उतार कर मोची को दे दीं और मोची चप्पलों की मरम्मत में जुट गया। इसके बाद बुढ़िया बरगद के पेड़ के पास गई। वो पेड़ का चक्कर लगाती रही है और उसके बाद मोची से कहती है। मैं गांव में मौजूद सभी मोचियों के पास गई लेकिन कोई भी मेरी चप्पल मुफ्त में ठीक करने को तैयार नहीं हुआ, लेकिन तुम मेरी चप्पलें को पहली बार मुफ्त में सिलने के लिए तैयार हो गए। अब मुझे इस चप्पल का असली वारिस मिल गया है। बेटा तुम मेरी तरफ से ये चप्पल अपने पास रख लो। इस पर मोची कहने लगा, अम्मा अगर ये चप्पलें तुम्हारे पास होंगी तो ये तुम्हारे काम आएंगी, अगर मैं इन्हें अपने पास रखता हूं।
इससे मुझे क्या लाभ होगा , इस पर बुढ़िया कहती है बेटा तुम ये चप्पल पहनकर यहीं बैठो और जब तक ये तुम्हारे पैरों में रहेंगी तब तक खुदा तुम्हें खूब बरकत देगा। ये चप्पलें जब तक तुम्हारे पैरों में रहेंगी तब तक ये तुम्हारी किस्मत बदल देंगी। जब तक ये चप्पल तुम्हारे पास होंगी किसी का मोहताज नहीं रहोगे।
आखिर मोची ने उस बुढ़िया की दी हुई
चप्पलें पहन लीं। अगली सुबह जब मोची बरगद के पेड़ के नीचे अपनी दुकान पर पहुंचता है तो किसी तरह उसने बुढ़िया की दी हुई चप्पलें अपने पैरों में पहन ली। जैसे ही मोची ने उस बुढ़िया की चप्पलें पहनीं अचानक उसकी दुकान पर ग्राहकों की भीड़ जमा हो गई। पहले रास्ते में इक्का-दुक्का मुसाफिर उसके पास आते थे, गांव के लोग तो गांव में मौजूद मोची के पास ही अपने जूते-चप्पल ठीक कराया करते थे। लेकिन अब गांव के लोग उस मोची के पास भी अपने जूते-चप्पल लेकर आने लगे।
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30/06/2026
एक दिन ऐसा बीता कि उसके पास कोई ग्राहक
नहीं आया। दूसरा दिन भी उसी हालत में बीता।
उसके पास कोई ग्राहक नहीं आया क्योंकि गांव के अंदर पहले से ही तीन-चार मोची मौजूद थे, तो गांव से बाहर निकल कर उस मोची के पास अपने जूते-चप्पल ठीक करवाने भला कौन जाता।
राह चलते कोई मुसाफिर उधर से गुजरता तो वो मोची के पास चला जाता। इसके अलावा वो कई दिनों तक वहीं बैठा रहता। उसके पास कोई ग्राहक नहीं आता। उसका जीवन बड़ी गरीबी में चल रहा था। वो बहुत परेशान हालत में था। दोपहर का समय था
जब गर्मी की तीव्रता बहुत अधिक थी और सभी
लोग अपने घरों में मौजूद थे। उस समय मोची बरगद के पेड़ के नीचे बैठा ग्राहक के आने का इंतजार कर रहा था कि तभी एक बूढ़ी औरत उसके पास आई जिसकी चप्पलें पूरी तरह से टूटी हुई थीं और बहुत ही ज्यादा पुरानी थी। वो मोची के पास आई और बोली, बेटा, क्या तुम मेरी चप्पलें ठीक कर दोगे?"
मोची ने कहा, "हां अम्मा,लाओ चप्पलें मुझे दे दो, मैं अभी ठीक कर देता हूं।" इस पर बुढ़िया बोली, बेटा तुम इसकी मरम्मत कर दोगे लेकिन मेरे पास तुम्हें देने के लिए पैसे नहीं हैं। इस पर मोची कहता है। कोई बात नहीं अम्मा। आपने मुझे बेटा कहा है। क्या बेटे भी कभी किसी काम के लिए मां से पैसे लेते हैं। लाओ अपनी चप्पलें मुझे दे दो। मैं इनकी मरम्मत कर दूंगा। तुम्हें पैसों की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
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29/06/2026
मैंने अपने दोस्त से कहा कि मुझे उस मोची से मिलना है. मैं उसे देखना चाहता हूं, उससे बात करना चाहता हूं,
इस पर मेरे दोस्त ने कहा रूको हम उसके पास ऐसे
ही नहीं जा सकते। मैं अपने साथ कुछ जूते या
चप्पल ले लेता हूं, इसके बाद मेरे दोस्त ने अपने
घर में ढूंढा तो उसे अपनी मां की एक टूटी हुई
चप्पल मिली, उसने चप्पल उठाई और कहा चलो
मोची के पास चलते हैं अब हम दोनों मोची से
मिलने के लिए घर से निकल पड़े। रास्ता चलते
चलते मेरे दोस्त ने मोची के बारे में एक कहानी
सुनाई जो पूरे गांव में मशहूर थी। वो कहने लगा हैं
कि करीब 32 साल पहले एक मोची ने गांव के
बाहर एक बरगद के पेड़ के नीचे जाकर अपनी
दुकान लगाई ताकि वो कुछ कमाई कर सके, लेकिन
एक दिन ऐसा बीता कि उसके पास कोई ग्राहक
नहीं आया। दूसरा दिन भी उसी हालत में बीता।
उसके पास कोई ग्राहक नहीं आया क्योंकि गांव के
अंदर पहले से ही तीन-चार मोची मौजूद थे, तो गांव
से बाहर निकल कर उस मोची के पास अपने
जूते-चप्पल ठीक करवाने भला कौन जाता।
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28/06/2026
मैं अपने एक दोस्त के गांव में
उसकी बहन की शादी में शामिल होने गया था।
बातों-बातों में मेरे दोस्त ने मुझे अपने गांव के एक मोची के बारे में बताया। हमारे गांव में एक मोची है जो बहुत मशहूर है। उसके पास हमेशा ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। उसके मशहूर होने का कारण ये नहीं है कि उसके पास जूते और चप्पल बनाने का हुनर है। बल्कि ईश्वर ने उसे इतनी बुद्धि और दूरदर्शिता दी है कि मोची किसी के भी जूते या चप्पल अपने हाथ में लेता है और फिर उसे उसके गुजरे हुए समय और भविष्य के बारे में सही जानकारी देता है। अक्सर लोग उनके पास जूते-चप्पल सिलवाने के बहाने अपनी स्थिति और भविष्य की जानकारी लेने आते हैं. उसके पास हमेशा भीड़ लगी रहती है. अगर आप उनके पास जूते-चप्पल सिलवाने जाते हैं तो आपका काम तुरंत हो जाएगा. ये संभव नहीं कि आपको कई घंटों इंतजार करना पड़े, अपने दोस्त के मुंह से उस मोची की इतनी तारीफ सुनकर दिल में उस मोची से मिलने की इच्छा जागी. मैंने अपने दोस्त से कहा कि मुझे उस मोची से मिलना है. मैं उसे देखना चाहता हूं, उससे बात करना चाहता हूं,
27/06/2026
दोस्तों आपने अक्सर सुना होगा कि कभी-कभी इंसान की एक छोटी सी गलती उसके लिए बहुत बड़ी मुसीबत और परेशानी का कारण बन जाती है। हम आपको एक भाई की एक ऐसी ही छोटी सी गलती की कहानी बताने जा रहे हैं। उस भाई ने एक छोटी सी गलती की और उस छोटी सी गलती के परिणामस्वरूप उसे बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
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