Parul Yadav
04/03/2024
Follow Bharatika
कोलकत्ता की पहली महिला मूर्तिकार माला पाल की सफलता की कहानी काफी संघर्ष भरी रही है। वो बचपन से ही मूर्तियां बनाने के काम में माहिर थीं। लेकिन उनके पिता की सख्ती के कारण वो कभी इसे बतौर पेशा अपनाने की बात अपने पिता से नहीं कह पाईं। वहीं दूसरी ओर कोलकत्ता का मशहूर कुमारटुली इलाका मूर्तिकारों का घर कहलाता है। जहां माला के पिता की वर्कशॉप भी थी। लेकिन मूर्तिकारों के पेशे को पुरूष प्रधान की नजर से देखा जाता है। जिसके कारण अपने पिता के होते हुए वो इस पेशे में नहीं आ सकीं। लेकिन बाद में जब उनके पिता की मृत्यु हुई और उनके भाईयों ने इस काम को संभाला, तो एक दिन मजबूरी में उन्हें मूर्तियां बनाने का काम मिला। दरअसल, हुआ यूं कि उनके भाई के पास आया मूर्ति का एक ऑर्डर पूरा नहीं हो सका था। इस काम में अकेले उनके भाई को देर हो रही थी। तब उन्होंने मदद के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया और पहली बार कोई मूर्ति ऑफिशियल तौर पर बनाकर तैयार की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। माला पाल, आज के वक्त में कुमारटुली इलाके में अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं। उनके पास दूर-दूर से मूर्तियों के ऑर्डर आते हैं। जिनमें देश के हर राज्य से लेकर विदेश तक शामिल हैं।
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Website
Address
Noida