The First Yogi
25/07/2021
श्रावण मास मनाने के वैज्ञानिक कारण :
श्रावण मास प्रकृति से आज तक जो भी हमने हवा, हरियाली, जल आदि जो नि:शुल्क उपयोग किया है, इसकी कृतज्ञता प्रकट करने का माह है श्रावण मास।
वैज्ञानिक कारण :
पृथ्वी पर किसी भी प्रकार की वनस्पति, अनाज इत्यादि के जन्म का पहला कारण 'वर्षा' ही है इसी से पृथ्वी उपजाऊ बनती है, परन्तु वर्षा ऋतु का आगाज आषाढ़ माह से होने से श्रावण मास में उपजने वाला पत्ते और सब्जियां प्रथम वर्षा के जल से दूषित हो जाते हैं। हमारे ऋषियों ने इसको पहले ही जान लिया था। इसलिए पत्ते वाली सभी सब्जियां खाना वर्जित किया। इसलिए पूरे माह व्रत रखने का संदेश दिया गया, जिसे आज भी एक बड़ा वर्ग मानता है।
शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का वैज्ञानिक कारण :
चूंकि प्रथम वर्षा ऋतु में उपजी सब्जियां, पत्ते वाली सब्जियों का सेवन गाय-भैंस के करने से निकलने वाला दूध भी दूषित होता है। ये इंसानों के पीने लायक नहीं होता, इससे गंभीर बिमारियां होने की संभावना है। अत: ऋषियों ने विष पीने वाले शिव पर सिर्फ श्रावण मास में ही दूध चढ़ाने का आदेश दिया।
पंचामृत क्या है :
पाँच तत्व- दूध, दही, घी, शहद और शकर क्रमशः जल, वायु, अग्नि, आकाश और धरती तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनसे मानव शरीर बना है। वह तत्व रूपी पंचामृत देकर ईश्वर के प्रति कृतज्ञता अर्पित करते हैं।
वैज्ञानिक कारण: मौसम में अचानक होने वाले परिवर्तन की वज़ह से शरीर में 'वात, पित्त तथा कफ़' स्वभाविक रूप से असंतुलित हो जाते हैं जिससे शरीर अनेकों रोगों का शिकार हो सकता है। पंचामृत इसका सबसे सटीक समाधान है। पंचामृत सिर्फ़ इम्यूनिटी मजबूत नहीं करता बल्कि शरीर में 'वात, पित्त तथा कफ़' को संतुलित भी कर देता है। सचमुच हज़ारों लाखों साल पहले सिर्फ़ भारतीय ऋषि मुनि ही असली वैज्ञानिक थे जिन्होनें इतने प्रयोग किये।
नाभि पर ब्रह्मा, छाती के मध्य भाग को विष्णु, मस्तक का मध्य भाग शिवजी का प्रतिनिधित्व करता है।
By - Sanjeev Kumar Karn
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05/07/2021
श्री यंत्र महा मेरु मंदिर का जटिल प्रवेश द्वार लुभावनी रूप से सुंदर वास्तुशिल्प आश्चर्य है। अमरकंटक में 3500 फीट की ऊंचाई पर मैकाल, सतपुड़ा और विंध्य पर्वतमाला के बीच में मंदिर बनाया गया है।
मंदिर के प्रवेश द्वार पर 4 सिर वाली एक विशाल मूर्ति है जिसमें देवी लक्ष्मी, सरस्वती, काली और भुवनेश्वरी के चेहरे हैं। उनके नीचे ६४ योगिनियों या ४ देवी-देवताओं के सहयोगियों की बारीक तराशी हुई आकृतियाँ हैं, प्रत्येक तरफ १६।
मंदिर का निर्माण 1991 में शुरू हुआ था। ज्योतिष के अनुसार, गुरु पुष्य नक्षत्र के निर्माण के लिए सबसे शुभ है। इसलिए इसे इसी नक्षत्र में बनाया जा रहा है.
The intricate entrance of The Sri Yantra Maha Meru Mandir is breathtakingly beautiful architectural wonder. Mandir is created in the middle of the Maikal, Satpura & Vindhya ranges at a height of 3500ft in Amarkantak. https://t.co/KeSn2FrCuD
The entrance of the temple has a huge sculpture with 4 heads with the faces of Goddess Laxmi, Saraswati, Kali & Bhuvaneshwari. Beneath them are finely sculpted figures of 64 yoginis or associates of the 4 Goddesses, 16 on each side.
The construction of the temple started in 1991. According to astrology, Guru Pushya is most auspicious for the formation of Nakshatra. That is why it is being made in this constellation.
Cr Deepa Shree
22/06/2021
Pinnacle of craftsmanship...!
Ancient Sanatani tales written on stones all over.
Madurai Meenakshi Amman Temple, Tamil Nadu.
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