Future TALES

Future TALES

Share

13/08/2021

कल नाग पंचमी 13 अगस्त, दिन शुक्रवार को पड़ रहा है।
पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह में 05:49 बजे 08:28 बजे तक का है।
आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जिन्हें नाग पंचमी के दिन करने से काल सर्प तथा सर्प दोष के बुरे प्रभाव में कमी आती है और धन- सम्पदा की प्राप्ति होती है।

1- काल सर्प दोष के बुरे प्रभाव के निवारणर्थ नाग पंचमी के दिन से 41 दिन तक लगातार सुबह श्री सर्पसूक्त का पाठ करे अथवा श्रवण करे, यह एक सिद्ध प्रयोग हैं ।

2- काल सर्प दोष से पीड़ित साधक को चाहिए की वह नाग पंचमी के दिन चांदी , ताम्बे अथवा मिटटी का नाग-नागिन का जोड़ा शिवलिंग पर चढ़ाये , इससे कुण्डली में काल सर्प दोष का बुरा प्रभाव कम होता है, साथ ही धन लाभ भी होता है।

3- काल सर्प दोष से पीड़ित साधक नाग पंचमी के दिन रोली / कुमकुम से भोजपत्र पर स्वास्तिक बनाकर पूजन करें। स्वास्तिक पर बेल पत्र अर्पित कर ॐ नागेन्द्रहाराय नमः मंत्र का तथा अपने इष्ट मंत्र का 108 जाप करें। उस अभिमंत्रित स्वास्तिक को कण्ठे में लाल धागे से गले में धारण करें। ऐसा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है ,धन लाभ होता है।

4- जिस व्यक्ति की कुण्डली में राहु-केतु की महादशा के कारण बने हुए काम बिगड़ रहे हों।उन्हें इस नाग पंचमी पर चांदी या पंच धातु के नाग-नागिन का जोड़ा शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए।

5- नाग पंचमी के दिन घर के मुख्य द्वार पर गोबर या मिट्टी से नाग देवता की आकृति बना कर उनका पूजन करें और इस मंत्र का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं और सर्प दोष, सर्प भय से मुक्ति प्रदान करते हैं और घर में समृद्धि का आगमन होता है।
ॐ नवकुलाय विद्महे, विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्प प्रचोदयात

6- नाग पंचमी के दिन भगवान शिव के वासुकी नाग और भगवान विष्णु के शेषनाग का पूजन करने से भी सभी संकट दूर होते हैं ।

11/03/2021

🚩🌹🔱ॐ नमः शिवाय 🙏आशुतोष शशांक शेखर चंद्र मौली चिदंबरा ! कोटि कोटि प्रणाम शंभु कोटि नमन दिगम्बरा॥ निर्विकार ॐ कार अविनाशी तुम्हीं देवाधिदेव! जगत सृजक प्रलयकर्ता शिवम सत्यम सुंदरा॥ निरंकार स्वरुप कलेश्वर महा योगीश्वर! दयानिधि दानीश्वर जय जटाधार अभयंकरा॥ शूल पाणी त्रिशूलधारी औघडि बाघम्बरी!जय महेश त्रिलोचनायम विश्वनाथ विशम्भरा॥ नाथ नागेश्वर हरो हर पाप श्राप अभिशापतम! महादेव महान भोले सदाशिव शिव शंकरा॥ जगत पती अनुरक्ति भक्ति सदैव तेरे चरण हो! क्षमा हो अपराध सब जय जय जयती जगदीश्वरा॥ जनम जीवन जगत क़ा संताप ताप मिटै सभी ॐ नमः शिवाय मन जपता रहे पन्चाक्षरा॥ आशुतोष शशांक शेखर चंद्रमौली चिदंबरा कोटि कोटि प्रणाम शंभु कोटि नमन दिगम्बरा॥🔱🌹🙏🚩

12/12/2020

*"घर को तपोवन बनाने के लिए गृह पति को स्वयं तपस्वी बनना पड़ता है। भीतर से और बाहर से जैसा सांचा होगा, वैसे ही सिक्के ढलते चले जाएंगे। दर्पण में वैसी ही आकृति दीखेगी जैसी कि स्वयं की होगी। परिवार का स्वरूप और वातावरण उत्कृष्ट स्तर का बनाने के लिए अपने को ऐसा बनाया जाना चाहिए जिसका अनुकरण परिवार के सदस्यगण स्वयं ही करने लगे।"*🙏

23/11/2020
05/11/2020

प्राचीन अरबों ने सिन्ध को सिन्ध ही कहा तथा भारतवर्ष के अन्य प्रदेशों को हिन्द निश्चित किया। सिन्ध से हिन्द होने की बात बहुत ही अवैज्ञानिक है। इस्लाम मत के प्रवर्तक मोहम्मद के पैदा होने से 2300 वर्ष पूर्व यानि लगभग 1800 ईश्वी पूर्व भी अरब में हिंद एवं हिंदू शब्द का व्यवहार ज्यों का त्यों आज ही के अर्थ में प्रयुक्त होता था।

अरब की प्राचीन समृद्ध संस्कृति वैदिक थी तथा उस समय ज्ञान-विज्ञान, कला-कौशल, धर्म-संस्कृति आदि में भारत (हिंद) के साथ उसके प्रगाढ़ संबंध थे। हिंद नाम अरबों को इतना प्यारा लगा कि उन्होंने उस देश के नाम पर अपनी स्त्रियों एवं बच्चों के नाम भी हिंद पर रखे ।

अरबी काव्य संग्रह ग्रंथ ‘ सेअरूल-ओकुल’ के 253वें पृष्ठ पर हजरत मोहम्मद के चाचा उमर-बिन-ए-हश्शाम की कविता है जिसमें उन्होंने हिन्दे यौमन एवं गबुल हिन्दू का प्रयोग बड़े आदर से किया है । ‘उमर-बिन-ए-हश्शाम’ की कविता नयी दिल्ली स्थित मन्दिर मार्ग पर श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर (बिड़ला मन्दिर) की वाटिका में यज्ञशाला के लाल पत्थर के स्तम्भ (खम्बे) पर काली स्याही से लिखी हुई है, जो इस प्रकार है -

” कफविनक जिकरा मिन उलुमिन तब असेक ।

कलुवन अमातातुल हवा व तजक्करू ।1।

न तज खेरोहा उड़न एललवदए लिलवरा ।

वलुकएने जातल्लाहे औम असेरू ।2।

व अहालोलहा अजहू अरानीमन महादेव ओ ।

मनोजेल इलमुद्दीन मीनहुम व सयत्तरू ।3।

व सहबी वे याम फीम कामिल हिन्दे यौमन ।

व यकुलून न लातहजन फइन्नक तवज्जरू ।4।

मअस्सयरे अरव्लाकन हसनन कुल्लहूम ।

नजुमुन अजा अत सुम्मा गबुल हिन्दू ।5।

अर्थात् – (1) वह मनुष्य, जिसने सारा जीवन पाप व अधर्म में बिताया हो, काम, क्रोध में अपने यौवन को नष्ट किया हो। (2) अदि अन्त में उसको पश्चाताप हो और भलाई की ओर लौटना चाहे, तो क्या उसका कल्याण हो सकता है ? (3) एक बार भी सच्चे हृदय से वह महादेव जी की पूजा करे, तो धर्म-मार्ग में उच्च से उच्च पद को पा सकता है। (4) हे प्रभु ! मेरा समस्त जीवन लेकर केवल एक दिन भारत (हिंद) के निवास का दे दो, क्योंकि वहाँ पहुँचकर मनुष्य जीवन-मुक्त हो जाता है। (5) वहाँ की यात्रा से सारे शुभ कर्मो की प्राप्ति होती है, और आदर्श गुरूजनों (गबुल हिन्दू) का सत्संग मिलता है

Want your practice to be the top-listed Clinic in Noida?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Telephone

Address


Noida
201301

Opening Hours

Monday 11am - 7pm
Tuesday 11am - 7pm
Wednesday 11am - 7pm
Thursday 11am - 7pm
Friday 11am - 7pm