Serinyty
26/09/2025
प्रेम और प्यार में अंतर क्या है?
प्यार लौकिक है, और प्रेम आलौकिक।
प्यार एक भावना मात्र है, और प्रेम है कण कण में व्याप्त शिव।
प्रेम में कोई लेन देन या पैमाने नहीं है, जबकि प्यार में तो ये सब चलता रहता है। "मैने तुझे प्यार किया, तो तू भी कर। मैने तुझे प्यार किया, तो अब तू ये कर, अब तू वो कर। मैने तुझे प्यार किया, तो अब ये और अब वो"
प्यार की एक्सपायरी डेट हो सकती है, पर प्रेम अनंत होता है
प्रेम मूल तत्व है, सारांश है, जीवन और जीवन से परे जो भी स्थित या अनुपस्थित है उसका आधार, और प्यार तो जैसे बस क्षणिक भर का कोई आभास
आज किसी के सुंदर से चेहरे को देख कर आपको बहुत प्यार आ सकता है, और कल उसी इंसान के किसी गलत व्यवहार पर गुस्सा भी आ जाएगा, और नफरत भी हो सकती है। लेकिन प्रेम है, उस व्यक्ति के झुर्रिदार चेहरे में भी सुंदरता देख पाना, गलत व्यवहार पर भी बड़प्पन का भाव रख उसे माफ कर पाना, प्यार से सही गलत समझा पाना
प्यार तो किसी से भी हो जाता है। उसके लिए कोई वस्तु या व्यक्ति विशेष होने की आवश्यकता नहीं। अगर आपका व्यक्तित्व प्यारा है, तो उच्च संभावना है कि आपके हृदय में भी सबके लिए प्यार का भाव होगा। पर उसी प्यार के भाव को निरंतर बनाए रखना, और उसकी मात्रा में वृद्धि करते रहना, वह प्रेम से आता है। प्रेम आपको हर मुश्किल का सामना करने का साहस देगा। अंधेरों में भी छोटा सा दीपक बनकर आपको रोशनी देता रहेगा। प्रेम में बारे में जितना कहू, उतना ही कम है।
प्रेम के ऊपर चर्चा करना, यानी उस परम पिता परमेश्वर की बात करना। जिसका न कोई ओर है, न छोर है। प्रेम की बात करना, अर्थात प्रेम में डूबे रहना। प्रेम में डूबे रहना, अर्थात एक जोगी हो जाना। फिर तो आप मलंग हैं। यहां आकर सब बंधन खत्म हो जाते हैं, और सब सीमाएं पार हो जाती है। इस अवस्था में, सिर्फ एक चेतना मात्र, आप बस भक्ति में प्रभु के लीन होते हैं। और इस अवस्था को प्राप्त करना बहुत सरल है 😊 बस आपको सरल बनना पड़ेगा, और वो होगा प्रेम से 💚
~अनु
#आध्यात्मिकज्ञान
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