VOICE OF FREEDOM
14/07/2026
नोएडा में बेटी को कुत्तों ने नोचा, 3 साल बाद मिला इंसाफ
नोएडा। शहर में प्रतिदिन 350 लोगों को आवारा कुत्ते काटते हैं। घटनाओं में आरडब्ल्यूए और प्राधिकरण एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते हैं। लेकिन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं होती।
सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 में चार वर्षीय बच्ची के साथ हुई घटना में उनके पिता आशीष कुमार ने न्यायालय में जनवरी 2024 में शिकायत दी। न्यायालय के आदेश पर जून 2025 में तीन आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों पर थाना फेज-3 में मुकदमा दर्ज हुआ।
मामले में पुलिस की जांच चल रही है। लेकिन, प्रतिदिन होने वाली सैकड़ों घटनाओं में कोई जवाबदेही तय नहीं होती है।
नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही बताई गई
आशीष कुमार अग्रवाल ने बताया कि 22 जून 2022 को घटना के बाद उन्होंने आरडब्ल्यूए से शिकायत की। आरडब्ल्यूए की ओर से कोई जिम्मेदारी नहीं निभाई गई। आरडब्ल्यूए को लीगल नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया तो कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर आरडब्ल्यूए की ओर से डराया गया। आठ जुलाई 2022 को पुलिस को शिकायत दी। शिकायत में बच्ची के साथ हुई घटना की वजह आरडब्ल्यूए और नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही बताई गई।
न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज
इसके बाद न्यायालय में शिकायत दी। न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ। न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ। घटना की वजह से हुई क्षतिपूर्ति के लिए आशीष ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दी। आदेश से संतुष्ट हैं। उपभोक्ता आयोग ने आरडब्ल्यूए पर क्षतिपूर्ति के लिए जुर्माना लगाया है।
आशीष ने बताया कि उनकी बेटी अब आठ वर्ष की हो चुकी है। कुत्तों से आज भी डरती है। आवारा कुत्तों की शहर में कोई जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है। सोसायटी में सुविधा और सुरक्षा का हम रुपया देते हैं। सुविधा और सुरक्षा की सबसे पहली जिम्मेदारी आरडब्ल्यूए की बनती है।
पांच से छह कुत्तों ने घेरकर नोचा
जून 2022 की रात करीब साढे नौ बजे चार वर्ष की शायरा अग्रवाल पार्क में खेल रहीं थीं। उनकी बडी बहन साइकिल चला रहीं थीं। इसी दौरान पांच से छह आवारा कुत्तों ने शायरा को घेर लिया और जमीन पर गिराकर नोंचने लगे। पीठ पर वे नोच चुुके थे। वहां मौजूद व्यक्ति ने दौडकर शायरा को बचाया। घटना की सीसीटीवी फुटेज भी है।
मासूम की हुई मौत पर भी नहीं हुई थी कार्रवाई
सेक्टर-100 स्थित लोटस बुलेवार्ड सोसायटी में अक्टूबर 2022 में आठ महीने के बच्चे को आठ से अधिक आवारा कुत्तों ने बुरी तरह से नोचा। बच्चे की आंते बाहर निकल आईं थीं। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना में न तो किसी की जवाबदेही तय हुई और ना ही किसी पर कोई कार्रवाई हुई।
पालतू कुत्तों के मालिकों पर दर्ज हुईं हैं एफआईआर
सोसायटी और सेक्टर में पालतू कुत्तों के हमलों के मामले के मालिकों पर एफआइआर के मामले नोएडा और ग्रेटर नोएडा दोनों जगहों पर दर्ज हुए हैं। लेकिन, आवारा कुत्तों के लिए नियम होने के बाद भी हमलों के मामले में किसी पर कार्रवाई और जवाबदेही तय नहीं हुई।
14/07/2026
IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड में कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें
नई दिल्लीः करीब साढ़े छह साल पहले नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों के बीच लापता हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा (26) की मौत मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों को हत्या का दोषी ठहराया। कोर्ट ने कहा कि भीड़ की हिंसा में शामिल लोग उसके सामूहिक अपराधों के लिए भी समान रूप से जिम्मेदार हैं। एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या, दंगा, अपहरण और अलग-अलग समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने जैसी धाराओं में दोषी माना। हालांकि अदालत ने ताहिर हुसैन को आपराधिक साजिश के आरोप से बरी कर दिया।
घर से निकले लेकिन लौटे नहीं अंकित
अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान अंकित घर से निकले थे, लेकिन लौटे नहीं। अगले दिन उनका शव चांद बाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले से बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम में सामने आया कि उनके शरीर पर धारदार और कुंद हथियारों से किए गए 51 घाव थे। अदालत ने यह भी माना कि पहचान छिपाने के लिए उनके चेहरे और शरीर पर एसिड डाला गया था। आरोपों पर पारित आदेश में अदालत ने कहा था कि जिस इमारत में ताहिर हुसैन मौजूद था, वह हिंसक भीड़ का संचालन केंद्र बन गई थी। बता दें कि इन दंगों में 53 लोगों की जान गई थी।
हमारी प्राथमिकता निष्पक्ष जांच थी: कमिश्नर
अदालत ने पांच दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा ने कहा कि दंगों के दौरान पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ निष्पक्ष, साक्ष्य आधारित और पेशेवर जांच करना था। अदालत के फैसले से जांच टीम की मेहनत और प्रफेशनल अप्रोच पर न्यायिक मुहर लगी है। वही दंगों के दौरान स्पेशल सीपी के पद पर तैनात थे और जांच का नेतृत्व कर रहे थे। उधर, स्पेशल सीपी (क्राइम) एचजीएस धालीवाल ने कहा कि क्राइम ब्रांच की गहन और साक्ष्य आधारित जांच से आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस पेश करने में सफल रहा।
कोर्ट ने सबूतों का स्वतंत्र मूल्यांकन किया
पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन की ओर से पैरवी कर रही एडवोकेट तारा नरूला ने कहा कि बचाव पक्ष ने पूरे मुकदमे के दौरान मजबूत पैरवी की और जिरह में अभियोजन के कई गवाहों की गवाही को प्रभावी ढंग से चुनौती दी। उन्होंने कहा कि छह अन्य आरोपियों का बरी होना भी दर्शाता है कि अदालत ने साक्ष्यों का स्वतंत्र मूल्यांकन किया। हालांकि, ताहिर हुसैन को दोषी ठहराए जाने से वे निराश हैं और अब फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की जाएगी।
ऐसे मामलों में कोई नहीं जीतता
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मधुकर पांडे ने फैसले को अभियोजन की जीत मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि एक परिवार ने अपना बेटा खोया है, जबकि दोषी ठहराए गए लोगों के परिवार भी अब कठिन समय का सामना करेंगे। साप्रदायिक हिंसा का सबसे बड़ा नुकसान पूरे समाज को होता है। इसलिए ऐसे मामलों में अदालत का फैसला न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम होता है, लेकिन इसे किसी पक्ष की जीत के रूप में नही देखा जाना चाहिए।
11 आरोपियों में से 5 दोषी करार
आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में अदालत कुल 11 आरोपियों में से पांच को दोषी ठहराया, जबकि छह आरोपियों को मुख्य आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या समेत अन्य गंभीर अपराधों का दोषी माना। वहीं, हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, समीर खान, फिरोज, गुलफाम, शोएब आलम उर्फ बॉबी और मुंतजिम उर्फ मूसा को साक्ष्यों के अभाव में मुख्य आरोपों से बरी कर दिया गया। इस मामले में मार्च 2023 में सभी 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।
14/07/2026
भोजशाला परिसर नवाज़ मामले में S C ने मुसलमान को दी राहत
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर दशकों से जारी विवाद पर अब देश की सबसे बड़ी अदालत में सुनवाई होगी। सर्वोच्च अदालत ने पिछले दिनों हाई कोर्ट की ओर से मंदिर करार दिए गए भोजशाला पर रोजाना सुनवाई पर सहमति जताई। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक तो नहीं लगाई है, लेकिन मुसलमानों को एक राहत जरूर दी है। अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार से परिसर के आसपास किसी खुले स्थान पर शुक्रवार को दोपहर 1-3 बजे के बीच नमाज की व्यवस्था करने को कहा है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की बेंच ने भोजशाला परिसर के पास नमाज की व्यवस्था का आदेश राज्य सरकार को दिया है। अदालत ने कहा, 'दोनों पक्षों के अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना यह निर्देश दिया जाता है कि शुक्रवार को 1-3 बजे के बीच नमाज के लिए एक अलग खुला स्थान/परिसर के पास याचिकाकर्ताओं और अन्य (मुसलमानों) को उपलब्ध कराया जा सकता है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि धार्मिक कार्यों में किसी पक्ष की तरफ से बाधा उत्पन्न ना हो।'
अस्थायी होगी नमाज वाली व्यवस्था, बदलाव से पहले लेगी होगी अनुमति: SC
अदालत ने साफ किया कि यह व्यवस्था अस्थायी होगी और अपील के अंतिम परिणाम पर निर्भर करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) किसी प्रकार के संरचनात्मक परिवर्तन करता है तो उसे अदालत की पूर्व अनुमति लेनी होगी। अदालत ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है, इसलिए हमें हर शब्द का अत्यंत सावधानी से प्रयोग करना होगा।
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