RPS
31/10/2025
1857 के संग्राम में लखनऊ की पासी वीरांगना उदा देवी ने अपने साहस से इतिहास रच दिया था। जब ब्रिटिश सेना ने सिकंदरबाग पर हमला किया, तो उन्होंने इमली के पेड़ पर चढ़कर दर्जनों अंग्रेज़ सिपाहियों को मार गिराया।
बाद में जब उनका शव मिला, तो सैनिक यह जानकर दंग रह गए कि वह एक महिला थीं — जिन्होंने सिपाही का वेश धारण कर देश की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी थी।
उदा देवी ने अपने पति मक्का पासी की शहादत के बाद बदला लेने की कसम खाई थी और बेगम हज़रत महल के नेतृत्व में महिलाओं की एक सेना ‘दलित वीरांगनाएँ’ बनाई थी।
आज भी 16 नवंबर को लखनऊ में ‘उदा देवी शहीद मेला’ मनाया जाता है, जो उनके बलिदान और दलित साहस की मिसाल को जीवित रखता है।
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