Dr Rajan Patil
02/10/2022
असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक नवरात्र के समय नव दुर्गा अर्थात स्त्री के नौ स्वरूपों के आधार पर उनका स्मरण, पूजन और शत्रु के विनाश के लिए किए गए कार्यों का कथा के रूप में वर्णन किया जाता है। वास्तविकता यह है कि देवी के इन अवतारों की पृष्ठभूमि में न्याय, समानता और संतुलित व्यवहार की ही भूमिका है।
जहां एक ओर शत्रु के दमन के लिए शस्त्र का प्रयोग है, वहां मन में छिपी वासना को समाप्त करने और अपनी इच्छाशक्ति को प्रबल करने के लिए ज्ञान का प्रवाह है। इसका अर्थ यह है कि जब किसी पुरुष या स्त्री के साथ दुव्र्यवहार और उसे अपमानित करने की इच्छा ही नहीं होगी तो उसके साथ होने वाले अन्याय का प्रतिकार करने की जरूरत ही नहीं रहेगी। लेकिन क्या ऐसा संभव है? शायद नहीं। राजा दक्ष द्वारा अपनी पुत्री का अपमान और उसके पति के प्रति घृणा का परिणाम यह हुआ कि शिव को तांडव करना पड़ा। आज के संदर्भ में इसका अर्थ यही है कि यदि कोई व्यक्ति किसी महिला का अपमान करता है और वह चाहे उसका पिता ही क्यों न हो, तो उसका वध करने तक में कोई बुराई नहीं है। यदि इस पर पालन हो तो समाज में महिलाओं के साथ भेदभाव से लेकर उनके साथ जोर-जबरदस्ती करने, बलात्कार जैसा घिनौना कृत्य करने की मानसिकता पर अंकुश लग सकेगा।
सही और गलत का भेद : नवरात्र में मनुष्य की अनेक गलत प्रवृत्तियों पर रोक लगाने, सद्व्यवहार करने तथा जन कल्याण को ही सर्वोपरि मानते हुए यदि ङ्क्षहसक होना पड़े तो यह न केवल सही है बल्कि इसे प्रतिष्ठित भी किया गया है। इसलिए यदि कोई इस प्रकार का अपराध करने वालों के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए उन्हें सुधारने के लिए एक अवसर देने की बात करता है तो यह सामाजिक संतुलन को अस्थिर करने का ही प्रयास होगा। यदि इसे ध्यान में रखा जाए तो फिर अपराधियों को दंड देने में न तो देरी लगेगी और न ही उनके बचाव के लिए कानून में छेद खोजने का प्रयास होगा। नव दुर्गा का पर्व जहां एक ओर शक्ति की पूजा करने का आह्वान करता है, वहां ताकत के गलत इस्तेमाल अर्थात घमंड से जन्मे क्रोध से संसार को आतंकित करने की कोशिश पर लगाम भी लगाता है। शक्ति स्वरूपा दुर्गा द्वारा असुरों का वध और विनाश इसका ही प्रतीक है।
क्रोध की मानसिकता : यहां एक बात पर विचार करना जरूरी है कि जब दुर्गा को क्रोध आता है तो वह शत-प्रतिशत होता है, दुष्ट का नाश करने के लिए किसी भी तरह की कोमलता का सर्वथा अभाव रहता है। एकमात्र उद्देश्य यही है कि दानव तथा दानवीय भावनाओं का समूचा नाश हो। इसी प्रकार जो असुर है, वह भी पूर्ण क्रोध से देवी पर आक्रमण करता है। जब दोनों आेर से क्रोध की पूर्णता होती है, तब ही विनाश के बाद निर्माण की प्रक्रिया जन्म लेती है। इसका अर्थ यह कि शत्रु का संपूर्ण विनाश ही क्रोध का लक्ष्य होना चाहिए। इसे इस उदाहरण से समझिए कि जब अमरीका ने अल कायदा को खत्म करने और ओसामा बिन लादेन को मारने की योजना को मूर्त रूप दिया तो उसका यह काम पूरे क्रोध के साथ अपने लक्ष्य को भेदना था। भारत के संदर्भ में भी यही बात लागू होती है। कश्मीर हो या कहीं और, यदि आतंकवाद को नेस्तोनाबूद करना है तो सम्पूर्ण क्रोध से सींचा गया आचरण करना ही होगा। आतंकवाद इसी कारण समाप्त नहीं हो रहा क्योंकि हम क्रोध तो करते हैं लेकिन इसमें किंतु परंतु को शामिल कर लेते हैं।
नव दुर्गा शक्ति एक और बात पर ध्यान केंद्रित करती है कि इच्छा, ज्ञान, कर्म से मिलकर जो भी कार्य होता है उसके पूर्ण होने में कोई संदेह नहीं रहता। यहां तक कि प्रकृति के कुपित होने से जो प्राकृतिक आपदाएं आती हैं, उन पर भी काबू पाना सुगम हो जाता है। यदि ऐसा न होता तो जिन देशों में हमेशा भूकंप आते रहते हैं या जहां जल प्रलय का तांडव होता रहता है अथवा पहाड़ों, चट्टानों का खिसकना चलता रहता है, इन जगहों पर जीवन होता ही नहीं।
शक्ति कब सहायक बनती है : यदि हमारे अंदर किसी समस्या को सुलझाने की इच्छा है, उसके समाधान के लिए पर्याप्त ज्ञान अर्जित कर लिया है और तब हम कत्र्तव्य पथ पर चलते हैं और योजनाबद्ध तरीके से काम करने लगते हैं तब ही शक्ति हमारी सहायक बनती है। इसका अर्थ यह है कि केवल मन में सोचने और विचार करने से तब तक कुछ हासिल नहीं हो सकता जब तक उसके लिए चिंतन, मनन और अध्ययन से प्राप्त ऊर्जा के अनुसार योजना बनाकर अपने लक्ष्य का भेदन करने के लिए तत्पर नहीं हो जाते। नव दुर्गा के स्वरूपों का आरंभ शैलपुत्री से होकर सिद्धि धात्री तक का सफर जीवन के आरंभ से लेकर उसके अंत होने तक की कथा है। उल्लेखनीय है कि यह पर्व भगवान राम की विजय गाथा के पूर्ण होने और विजय दशमी का पर्व मनाने से जुड़ा हुआ है। इसका अर्थ यही है कि राम के रूप में चाहे पुरुष हो या दुर्गा के रूप में स्त्री हो, अन्याय पर न्याय और बुराई पर अच्छाई के प्रतीक होने का सौभाग्य दोनों को ही प्राप्त है।-
डॅा. राजन पाटील
सीसोदे हेल्थ केअर
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DR. RAJAN PATIL - YouTube *नशामुक्ति की चार बूंदें*" यह आदर्श वाक्य जैसा अंतःकरण भावसे काम कर रहे है डॉ. राजन पाटील। उन्होने अनेक स्तर से हजार.....
10/09/2022
*" समाजामध्ये LEADERSHIP दोन प्रकारच्या असतात....!!"*
*१) Image Base Leadership*
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*२) Knowledge Base Leadership*
*1) Image base leadership* ही आपल्याला सर्वच ठिकाणी बघायला मिळते. अशा leadership कडे मनीपाॅवर व मसलपाॅवर असते, गाडी असते, बंगला असतो आणि चमच्यांचा लवाजमा असतो. असे leader डोळ्यावर गॉगल लावतात आणि पांढ-या शुभ्र गाडीतून फिरतात. त्यांच्यामागे त्यांचे चमचे, दलाल
हुजरेगिरी करतात. अशी leadership समाजात पैशाच्या जोरावर image तयार करतात. परंतू ही Image केवळ एका कुरकुरेच्या पाकीटासारखी असते, ज्यात 90% हवा असते. अशा लिडरशीप पासून समाजाचे कधीही पोट भरत नाही. ते समाजाला कोणतेच हक्क, अधिकार मिळवून देऊ शकत नाही. कारण त्यांचा विश्वास चमकधमकवर जास्त असल्याने दुस-यांसाठी लढत नाही..! मात्र अशा लिडरांच्या मागेच समाजातील 90% लोक *हुजुरेगीरी* करतांना दिसतील. त्यांना इतका मानसन्मान देतील कि जणूकाही त्यांच्यामुळेच आपण जगत आहोत. वास्तविक आपल्या सर्वांना अशा leadership ची खरी औकात माहिती असते पण तरीही लोक असत्यालाच का स्विकारतात..? हा संशोधनाचा विषय आहे. अशा leadership पासून समाजाने सावध राहिले पाहिजे. जो समाज अशा leadership पासून सावध राहतो व अशांना महत्व देत नाही तोच समाज ख-या अर्थाने प्रगती करीत असतो....!
*2) Knowledge Base Leadership* ही कुठलाही दिखावा करत नाही. समाजात मान-सन्मान मिळावा म्हणून काम करत नाही. त्यांचं उद्दिष्ट केवळ आणि केवळ *आपल्या समाजाच्या हितासाठी कार्यरत राहणे, त्यांच्या हक्काप्रती जागरुक राहून त्यांना समाजातील घटकाला न्याय मिळवून देणे, समाजात प्रबोधनात्मक चळवळ निर्माण करणे* असे असते. अशी लिडरशीप आपनास लाखात एक व्यक्ति पाहण्यास मिळते. पण अशा लीडरशिपला समाजातील अनेक लोकांचा विरोध सहन करावा लागतो. समाज अशा लोकांना पदोपदी अपमानास्पद वागणूक देण्याचा प्रयत्न करतो. *भंपक leadership* ची चमचेगीरी करणारे अशा लिडरांची बदनामी करण्यात पुढेच असतात. मात्र ही लीडरशिप तावुन सुलाखूंन निघते. जरी या लीडर शिपला आयुष्यात यश नाही मिळाले तरी ते लोकांच्या मनावर शेकडो वर्ष राज्य करतात. जगात आतापर्यंत जे जे सकारात्मक घडले आहे, ते *Knowledge Base Leadership* नेच घडविले आहे. समाजातील मोठ्या परिवर्तनाचा पाया ते रचत असतात. म्हणून समाजातील सर्व प्रकारच्या लोकांनी या दोन लिडरशीप मधील फरक ओळखून आपला लिडर कोण हे ठरवावे...!
सध्या लोकांची स्वत:ची आकलन व निरिक्षण क्षमता खुपच अत्यल्प होत चालली आहे, योग्य काय आणि अयोग्य काय..? याची पडताळणी करायची दृष्टीही दुर्मिळ होत आहे.
मात्र जो समाज *Knowledge Base Leadership* ला ओळखून त्याच्यासोबत चालतो, तोच समाज प्रगतीपथावर असतो.
*म्हणून वेळीच ख-या लिडर्सना ओळखा....!*.
*Knowledge Base Leadership करणा-याच्या पाठीशी खंबीरपणे उभे रहा, त्यांना बळ द्या....!*
धन्यवाद..🙏
डॅा. राजन पाटील
सीसोदे हेल्थ केअर
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17/06/2022
प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारत अभियान संघटन “
प्रशिक्षन शीबीर मे “व्यसनमुक्त भारत “ईस विषय पर संभाषन करने का मोका मीला धन्यवाद डॅा.मुकेश शर्मा (रास्ट्रीय अद्यक्ष) भगवान बागुल सर (रास्ट्रीय महामंत्री)
08/05/2022
नमस्कार ,
"एक कदम नशा मुक्ती की और “ ह्या पुस्तकाचे प्रकाशन
मा. शंभाजी राजे भोसले ह्यांच्या हातुन झाले. पुर्ण भारतात पुस्तक मोफत देण्याची मोहीम राबवित आहे, यासाठी आपल्या सहयोगाची आवश्यकता आहे, 🙏🙏
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धन्यवाद
डॅा. राजन पाटील
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