Astro Samadhan
10/10/2024
*रक्षाबंधन पर्व 2024 कब मनाये
🎊🎊🎊💐💐💐🎊🎊🎊
जानिए शुभ लाभ ज्योतिष परामर्श केंद्र
एस्ट्रो पंडित अरविंद पाठक गुरुजी से
9768051328 *
*आप सभी को रक्षाबंधन की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाएं*
*जैसा कि आप जानते हैं भारतीय सनातन संस्कृति में प्रत्येक त्यौहार में मुहूर्त का विशेष महत्व है बिना मूहुर्त कोई भी त्योहार नहीं मनाया जाता*
*इसी प्रकार रक्षाबंधन में भी मुहूर्त देखना अति आवश्यक है । बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है अगर बिना मुहूर्त बांधी जाए तो ऐसी मान्यता है उसका फल कम हो जाता है इसलिए इस बार रक्षाबंधन को लेकर थोड़ी असमंजस की स्थिति बनी हुई है उसकी निवृत्ति के लिए भारत के प्रतिष्ठित पंचांग श्री ऋषिकेश का अवलोकन किया गया जिसमें स्पष्ट लिखा है कि कल 19 अगस्त दिन सोमवार 2024 को दोपहर 1:26 से रक्षाबंधन का मुहूर्त शुरू होगा*
*अर्थात सभी बहनें अपने भाई की कलाई पर दोपहर 1:26 pm से राखी बांधना प्रारंभ करें *
नोट: चंद्रमा कुंभ राशि स्थित होने पर भद्र दोपहर 1:25 तक पृथ्वी लोक में निवास है इसलिए इसके उपरांत रक्षाबंधन त्योहार मनाएं
हर हर महादेव हर हर गंगे
🚩🚩🚩🙏🏻🙏🏻🎊🎊💐💐🚩🚩🚩
Astro Samadhan
Dears We are the children of god , Every one has 2 legs, 2 hands, minds, 2eyes & all things but after all few peoples success why ????????????????????????
समस्या कैसै भी समाधान जैसे भी.....
यह वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं
१. घर में पूजा करने वाला एक ही मूर्ति की पूजा नहीं करें। अनेक देवी-देवताओं की पूजा करें। घर में दो शिवलिंग की पूजा ना करें तथा पूजा स्थान पर तीन गणेश नहीं रखें।
२. शालिग्राम की मूर्ति जितनी छोटी हो वह ज्यादा फलदायक है।
३. कुशा पवित्री के अभाव में स्वर्ण की अंगूठी धारण करके भी देव कार्य सम्पन्न किया जा सकता है।
४. मंगल कार्यो में कुमकुम का तिलक प्रशस्त माना जाता हैं। पूजा में टूटे हुए अक्षत के टूकड़े नहीं चढ़ाना चाहिए।
५. पानी, दूध, दही, घी आदि में अंगुली नही डालना चाहिए। इन्हें लोटा, चम्मच आदि से लेना चाहिए क्योंकि नख स्पर्श से वस्तु अपवित्र हो जाती है अतः यह वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं।
६. तांबे के बरतन में दूध, दही या पंचामृत आदि नहीं डालना चाहिए क्योंकि वह मदिरा समान हो जाते हैं।
७. आचमन तीन बार करने का विधान हैं। इससे त्रिदेव ब्रह्मा-विष्णु-महेश प्रसन्न होते हैं। दाहिने कान का स्पर्श करने पर भी आचमन के तुल्य माना जाता है।
८. कुशा के अग्रभाग से दवताओं पर जल नहीं छिड़के।
९. देवताओं को अंगूठे से नहीं मले। चकले पर से चंदन कभी नहीं लगावें। उसे छोटी कटोरी या बांयी हथेली पर रखकर लगावें।
९. पुष्पों को बाल्टी, लोटा, जल में डालकर फिर निकालकर नहीं चढ़ाना चाहिए।
१०. भगवान के चरणों की चार बार, नाभि की दो बार, मुख की एक बार या तीन बार आरती उतारकर समस्त अंगों की सात बार आरती उतारें।
११. भगवान की आरती समयानुसार जो घंटा, नगारा, झांझर, थाली, घड़ावल, शंख इत्यादि बजते हैं उनकी ध्वनि से आसपास के वायुमण्डल के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। नाद ब्रह्मा होता हैं। नाद के समय एक स्वर से जो प्रतिध्वनि होती हैं उसमे असीम शक्ति होती हैं।
१२. लोहे के पात्र से भगवान को नैवेद्य अपर्ण नहीं करें।
१३. हवन में अग्नि प्रज्वलित होने पर ही आहुति दें। समिधा अंगुठे से अधिक मोटी नहीं होनी चाहिए तथा दस अंगुल लम्बी होनी चाहिए। छाल रहित या कीड़े लगी हुई समिधा यज्ञ-कार्य में वर्जित हैं। पंखे आदि से कभी हवन की अग्नि प्रज्वलित नहीं करें।
१४. मेरूहीन माला या मेरू का लंघन करके माला नहीं जपनी चाहिए। माला, रूद्राक्ष, तुलसी एवं चंदन की उत्तम मानी गई हैं। माला को अनामिका (तीसरी अंगुली) पर रखकर मध्यमा (दूसरी अंगुली) से चलाना चाहिए।
१५. जप करते समय सिर पर हाथ या वस्त्र नहीं रखें। तिलक कराते समय सिर पर हाथ या वस्त्र रखना चाहिए। माला का पूजन करके ही जप करना चाहिए। ब्राह्मण को या द्विजाती को स्नान करके तिलक अवश्य लगाना चाहिए।
१६. जप करते हुए जल में स्थित व्यक्ति, दौड़ते हुए, शमशान से लौटते हुए व्यक्ति को नमस्कार करना वर्जित हैं। बिना नमस्कार किए आशीर्वाद देना वर्जित हैं।
१७. एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए। सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें।
१८. जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।
१९. जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।
२०. संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।
२१. दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।
२२. यज्ञ, श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं।
किसी भी समस्या के समाधान के लिये समय लेकर सम्पर्क करे.
WhatsApp : 9768051328
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Contact the place of worship
Telephone
Website
Address
Mumbai
401105