Adhya Shakti

Adhya Shakti

Share

05/11/2024

*कालाष्टमी 2024: नवंबर महीने में कब है कालाष्टमी? नोट करें सही दिनाँक एवं शुभ मुहूर्त*

*हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव देव की पूजा की जाती है। साथ ही मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक को विशेष कार्य में सफलता और सिद्धि मिलती है।

*तंत्र विद्या सीखने वाले साधक कालाष्टमी पर काल भैरव देव की कठिन उपासना करते हैं। धार्मिक मत है कि काल भैरव देव की पूजा-उपासना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही सभी प्रकार के दुख और संकट हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं। अतः साधक भक्ति भाव से काल भैरव देव की पूजा-भक्ति करते हैं। आइए, मार्गशीर्ष माह की कालाष्टमी की तिथि एवं शुभ मुहूर्त जानते हैं-

*कालाष्टमी शुभ मुहूर्त*

वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 22 नवंबर को संध्याकाल 06 बजकर 07 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 23 नवंबर को संध्याकाल 07 बजकर 56 मिनट पर होगा। काल भैरव देव की पूजा निशा काल में होती है। अतः 22 नवंबर को कालाष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी मनाई जाएगी।

*कालाष्टमी शुभ योग*

भाद्रपद माह की कालाष्टमी पर ब्रह्म योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का संयोग सुबह 11 बजकर 34 मिनट तक है। इसके बाद इंद्र योग का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा, रवि योग का भी निर्माण हो रहा है। इन योग में भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव देव की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलेगी। इसके साथ ही सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होगी। इस दिन कई अन्य मंगलकारी योग भी बन रहे हैं।

*पंचांग*

*सूर्योदय-* सुबह 05 बजकर 50 मिनट पर

*सूर्यास्त-* शाम 05 बजकर 25 मिनट पर

*चंद्रोदय-* रात 11 बजकर 41 मिनट पर

*चंद्रास्त-* दिन 12 बजकर 35 मिनट पर

*ब्रह्म मुहूर्त-* सुबह 05 बजकर 02 मिनट से 05 बजकर 56 मिनट तक

*विजय मुहूर्त-* दोपहर 01 बजकर 53 मिनट से 02 बजकर 35 मिनट तक

*गोधूलि मुहूर्त-* शाम 05 बजकर 22 मिनट से 05 बजकर 49 मिनट तक

*निशिता मुहूर्त-* रात्रि 11 बजकर 41 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक

05/11/2024

*ॐ शिवगोरक्ष योगी आदेश*

*मित्रो चौरासी लाख योनियों में परमात्मा ने सर्वश्रेष्ठ योनि मानव की बनाई मनुष्य को ईश्वर के द्वारा असीमित शक्तियां प्रदान की गई हैं और इन सभी शक्तियों में सबसे महत्वपूर्ण है,मनुष्य की वाक् शक्ति अर्थात वाणी की शक्ति मानव जीवन में वाणी का बहुत महत्व है इसे व्यक्तित्व का आभूषण कहा गया है,वाणी से जहां मनुष्य के व्यक्तित्व का परिचय मिल जाता है वही यह मनोभावों को अभिव्यक्त करने का सर्वश्रेष्ठ साधन है,परंतु महत्वपूर्ण यह है कि हम अपनी वाणी का उपयोग किस प्रकार से करते हैं क्योंकि वाणी एक दुधारी तलवार की तरह होती है जिसके माध्यम से किसी को भी अपना मित्र या शत्रु बनाया जा सकता है,इस संसार में जितने भी मनुष्य है सभी अपनी वाणी का प्रयोग करते हैं परंतु कहां क्या और कितना बोलना चाहिए यह कला बहुत कम व्यक्तियों में देखने को मिलती है,हमारे मनीषियों ने शब्द को शिव और वाणी को शक्ति कहा है इनकी समझ व सदुपयोग एक तरह से व्यक्ति को अमृततत्व का अधिकारी बना देता है,एवं व्यक्तित्व की आध्यात्मिक संपदा से परिचय करवा देता है,कुल मिलाकर यह मान लिया जाय कि यही वाणी की शक्ति अपने अलौकिक स्वरूप से साधक के जीवन को कृतार्थ कर देती है,इस तरह शब्द मात्र कंठ और जिह्वा का उच्चारण भर नहीं बल्कि इसमें अजस्र शक्ति का भंडार भरा पड़ा है जिसका उच्चारण स्वयं को तथा दूसरों को प्रभावित करता है !*

28/08/2024

सम्पूर्ण कुंभो न करोति शब्दं ,अर्द्धोघटो घोषमुपैति नूनम्।
विद्वान् कुलीनो न करोति गर्वं गुणैर्विहीना बहु जल्पयंति॥

जिस प्रकार आधा भरा हुआ घड़ा अधिक आवाज करता है,परन्तु पूरा भरा हुआ घड़ा जरा भी आवाज नहीं करता,उसी प्रकार विद्वान् अपनी विद्वत्ता पर घमण्ड नहीं करते,जबकि गुणविहीन लोग अपनी भाषा वर्तन स्वभाव व व्यवहार से स्वयं को गुणी सिद्ध करने में लगे रहते हैं,लेकिन पता नही की समाज मे उनकी कोई इज्जत नही रहती व उसे कोई सम्मान नही देता,अतः मनुष्य को अपनी कमियों को देखना होगा दुसरो के दोषों व कमियों को नही,

27/08/2024

आध्यात्मिक संदेश

मित्रो आज के आधुनिक युग में मनुष्य को अधिक विकसित एवं समर्थ करने का प्रयास बहुत ही तेजी से चल रहा है,एक तरफ जहां विज्ञान के रूप में मनुष्य को ऐसा हथियार मिल गया है जिसके बल पर वह दूरगामी लक्ष्य को भी आसानी से शीघ्रता के साथ निशाना बना रहा है,जहां पहले मनुष्य के पास साधन का अभाव था पढ़ने लिखने की सुविधाएं सीमित थीं,सारा जीवन प्रयत्न करने पर भी कोई व्यक्ति किसी एक क्षेत्र में ही पहुंच पाता था वहींं आज स्थिति अलग है,थोड़ी सी सूझबूझ और थोड़ा सा पैसा मिलाकर व्यक्ति थोड़े से समय में ही चाहे तो अपने विचार और अपने निष्कर्ष हजारों लाखों नहीं करोड़ों तक पहुंचा सकता है,आज लाखों की संख्या में धर्मग्रंथ छप रहे हैं और हाथों हाथ बिक भी जा रहे हैं लोग उनका स्वाध्याय भी कर रहे हैं परंतु इतना सब होने के बाद भी पहले की अपेक्षा मनुष्य की आंतरिक चेतना में गिरावट आई है,क्योंकि पहले के लोग जहां धर्मग्रंथों की बात पढ़कर या सुनकर उन्हें आचरण में लाने का प्रयास करते थे,वहीं आज के युग में सत्संग स्वाध्याय केवल मनोरंजन या वाग्विलास का साधन बनकर रह गया है,जिस प्रकार चिकने घड़े पर पानी की बूंद भी नहीं ठहरती है उसी प्रकार लोगों के मनोभूमि में इतनी गिरावट आती जा रही है कि उन पर इन प्रेरणा का कोई असर होता नहीं दिख रहा है,पुस्तकें पढ़ लेने मात्र से कुछ नहीं होता है सत्संग सुन लेने मात्र से जीवन नहीं सुधरता है बल्कि सत्संग एवं पुस्तकों में वर्णित व्याख्यान को स्वयं के जीवन में उतारना पड़ता है,यही आज हम नहीं कर पा रहे हैं और दिग्भ्रमित हो करके जीवन यापन कर रहे हैं,यदि हमारे पूर्वज अनपढ़ होते हुए भी ज्ञानवान हो गए थे तो उसका कारण था कि वे कहीं से भी सुने हुए ज्ञान को आत्मसात कर लेते थे,परंतु आज का मनुष्य स्वयं इतना ज्ञानी हो गया है कि दूसरों की बात उसके हृदय में ठहरती ही नहीं है यही कारण है कि हम आधुनिक होते हुए भी अपने पूर्वजों से बहुत पीछे रह गये हैं |

19/08/2024

आप के नाम में छुपा है राम का नाम! एक बार पूरा गणित लगाकर देख लें आश्चर्य चकित हो जाएंगे।

अदभुत गणितज्ञ "श्री.तुलसीदासजी से एक भक्त ने पूछा कि महाराज आप श्रीराम के इतने गुणगान करते हैं , क्या कभी खुद श्रीराम ने आपको दर्शन दिए हैं ?
तुलसीदास बोले :- " हां "
भक्त :- महाराज क्या आप मुझे भी दर्शन करा देंगे ???
तुलसीदास :- " हां अवश्य " ....तुलसीदास जी ने ऐसा मार्ग दिखाया कि एक गणित का विद्वान भी चकित हो जाए !!!
तुलसीदास जी ने कहा , ""अरे भाई यह बहुत ही आसान है !!! तुम श्रीराम के दर्शन स्वयं अपने अंदर ही प्राप्त कर सकते हो.""
हर नाम के अंत में राम का ही नाम है।

इसे समझने के लिए तुम्हे एक "सूत्रश्लोक " बताता हूँ।
यह सूत्र किसी के भी नाम में लागू होता है !!!
भक्त :-" कौनसा सूत्र महाराज ?"

तुलसीदास :- यह सूत्र है ---
"नाम चतुर्गुण पंचतत्व मिलन तासां द्विगुण प्रमाण
तुलसी अष्ट सोभाग्ये अंत मे शेष राम ही राम!!"

इस सूत्र के अनुसार
अब हम किसी का भी नाम ले और उसके अक्षरों की गिनती करें..
1)उस गिनती को (चतुर्गुण) 4 से गुणाकार करें
2) उसमें (पंचतत्व मिलन) 5 मिला लें
3) फिर उसे (द्विगुण प्रमाण) दुगना करें
4)आई हुई संख्या को (अष्ट सो भागे) 8 से विभाजित करें ।
"" संख्या पूर्ण विभाजित नहीं होगी और हमेशा 2 शेष रहेगा!!!यह 2 ही राम है। यह 2 अंक ही राम अक्षर हैं।

विश्वास नहीं हों रहा है ना???चलिए हम एक उदाहरण लेते हैं ! एक नाम लिखें , अक्षर कितने भी हों !!!

उदाहरण के लिए :- निरंजन... 4 अक्षर
1) 4 से गुणा करिए 4x4=16
2)5 जोड़िए 16+5=21
3) दुगने करिए 21×2=42
4)8 से विभाजन करने पर 42÷8= 5 पूर्ण अंक , शेष 2 !!!
शेष हमेशा दो ही बचेंगे,यह बचे 2 अर्थात् - "राम" !!!

विशेष यह है कि सूत्रश्लोक की संख्याओं को तुलसीदासजी ने विशेष महत्व दिया है!!
1) चतुर्गुण अर्थात् 4 पुरुषार्थ :- धर्म, अर्थ, काम,मोक्ष !!!
2) पंचतत्व अर्थात् 5 पंचमहाभौतिक :- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु , आकाश!!!
3) द्विगुण प्रमाण अर्थात् 2 माया व ब्रह्म !!!
4) अष्ट सो भागे अर्थात् 8 आठ प्रकार की लक्ष्मी (आग्घ, विद्या, सौभाग्य, अमृत, काम, सत्य, भोग आणि योग
लक्ष्मी ) अथवा तो अष्ठधा प्रकृति।

अब यदि हम सभी अपने नाम की जांच इस सूत्र के अनुसार करें तो आश्चर्यचकित रह जाएंगे कि हमेशा शेष 2 ही प्राप्त होगा ...!!
इसी से हमें श्री तुलसीदास जी की बुद्धिमानी और अनंत रामभक्ति का ज्ञान होता है !!!

Want your school to be the top-listed School/college in Mumbai?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Telephone

Website

Address


GORAKSHDHAM
Mumbai
400066